विनीत मिनोचा हत्याकांड में शालू की रिहाई का रास्ता साफ
विवेचना में भूमिका नहीं मिलने पर पुलिस ने कोर्ट में दाखिल की क्लोजर रिपोर्ट, आज हो सकती है सुनवाई
कानपुर। दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में जेल भेजी गई उनकी बहू शालू की रिहाई का रास्ता फिलहाल साफ होता दिखाई दे रहा है। पुलिस की विवेचना में शालू की हत्या में भूमिका सामने नहीं आने के बाद पुलिस ने उसके पक्ष में कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है। रिपोर्ट पर सोमवार को सुनवाई होनी है। न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शालू की रिहाई का रास्ता खुल सकता है।
शालू के भाई धीरज अरोड़ा ने कहा कि जिस दिन पुलिस ने उनकी बहन को हत्याकांड में आरोपी बनाकर जेल भेजा था, उसी दिन से उन्हें भरोसा था कि शालू इस वारदात में शामिल नहीं हो सकती। अब उनका कहना है कि उन्हें इस बात की खुशी है कि जिस पुलिस ने प्रारंभिक जांच के आधार पर शालू को गिरफ्तार किया था, उसी पुलिस ने विस्तृत विवेचना के बाद उसकी भूमिका नहीं मिलने पर कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है।
जेल से निकलकर सीधे लखनऊ जाएगी शालू
धीरज अरोड़ा ने बताया कि शालू का बेटा श्रीजय फिलहाल लखनऊ में उनके पास रह रहा है। रिहाई के बाद शालू कानपुर स्थित रतन ऑर्बिट की अपनी ससुराल वाले फ्लैट में जाने के बजाय सीधे लखनऊ जाएगी और सबसे पहले अपने बेटे से मुलाकात करेगी।
5 सितंबर को हुई थी दवा कारोबारी की हत्या
दादानगर के रतन ऑर्बिट स्थित फ्लैट सी-104 निवासी दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की पांच सितंबर को चाकू से वार कर हत्या कर दी गई थी। पुलिस के मुताबिक उनके शरीर पर 17 चाकू के वार किए गए थे। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और परिवार तथा आसपास के लोगों से पूछताछ के साथ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया।
मामले में पुलिस की शुरुआती जांच के दौरान शालू की भूमिका संदिग्ध मानी गई और उसे आरोपी बनाकर जेल भेज दिया गया था। इसके बाद वह लगातार जेल में बंद थी।
बेटे सुब्रत की गिरफ्तारी के बाद बदली जांच की दिशा
मामले में बीते गुरुवार को पुलिस ने विनीत मिनोचा के बेटे सुब्रत मिनोचा को गिरफ्तार कर जेल भेजा। पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान मामले से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए। सुब्रत ने मीडिया के सामने अपने पिता की हत्या में शामिल होने की बात स्वीकार की थी।
पुलिस के अनुसार सुब्रत का आरोप था कि उसके पिता के कई महिलाओं से संबंध थे। उसका कहना था कि इसी वजह से उसकी मां पूनीता मिनोचा उनके साथ नहीं रहती थीं। सुब्रत ने पुलिस को बताया था कि उसे आशंका थी कि भविष्य में कोई महिला उसके घर आकर विनीत से संबंध होने या उनके बच्चे की मां बनने का दावा कर सकती है।
पुराने नौकर और उसके साथी से हत्या कराने का आरोप
पुलिस के मुताबिक सुब्रत ने बताया कि उसने अपने पुराने नौकर विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर के जरिए पिता की हत्या कराई थी। सुब्रत के बयान के अनुसार उसने विशाल से यह भी कहा था कि यदि वह पकड़ा जाए तो शालू का नाम ले लेना।
किन साक्ष्यों के आधार पर शालू पर हुआ था शक
प्रारंभिक जांच के दौरान शालू की भूमिका को लेकर पुलिस के सामने कई तथ्य आए थे। पुलिस के मुताबिक विशाल के शुरुआती बयान, शालू और विशाल के बीच हुई व्हाट्सऐप चैट तथा वॉयस कॉल डिटेल की जांच की गई थी।
इसके अलावा सिक्योरिटी गार्ड मदन सिंह के बयान को भी जांच का हिस्सा बनाया गया। पुलिस के मुताबिक गार्ड ने बताया था कि शालू ने विशाल का नाम पूछे जाने और एंट्री रजिस्टर में उसका नाम दर्ज नहीं करने की बात कही थी। इन तथ्यों के आधार पर शुरुआती जांच में शालू पर संदेह मजबूत हुआ और उसे हत्याकांड में आरोपी बनाकर जेल भेज दिया गया था।
सुब्रत के कबूलनामे के बाद जांच में आया बदलाव
24 सितंबर को सुब्रत द्वारा हत्या में अपना अपराध स्वीकार किए जाने के बाद पुलिस की विवेचना की दिशा बदली। पुलिस ने सुब्रत के बयानों और अन्य साक्ष्यों को सामने रखकर मामले की दोबारा जांच की। विवेचना के दौरान शालू की हत्या में प्रत्यक्ष भूमिका सामने नहीं आने पर पुलिस ने उसके पक्ष में क्लोजर रिपोर्ट तैयार की।
पुलिस ने शुक्रवार को क्लोजर रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल कर दी। अब सोमवार को कोर्ट में इस रिपोर्ट पर सुनवाई होनी है। न्यायालय के आदेश के बाद ही शालू की रिहाई की औपचारिक स्थिति स्पष्ट होगी।

