रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद केली कुंज में बदली साधकों की वेशभूषा
दर्शन-दीक्षा अनिश्चितकाल के लिए बंद, वायरल संदेश में अचला न पहनने और सादे कपड़े रखने की अपील
मथुरा। वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम केली कुंज से जुड़े साधक रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद आश्रम की व्यवस्थाओं में बदलाव देखने को मिल रहा है। दर्शन और दीक्षा पहले ही अनिश्चितकाल के लिए बंद किए जा चुके हैं। अब साधक-साधिकाओं की वेशभूषा में भी बदलाव नजर आ रहा है। सफेद कपड़े और पीला अचला पहनने वाले साधक अब कुर्ता-पायजामा या किसी रंग की धोती में दिखाई दे रहे हैं।
वेशभूषा में बदलाव से संबंधित एक संदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें पूज्य महाराज की आज्ञा का हवाला देते हुए साधकों से नई वेशभूषा में आने को कहा गया है। संदेश में अचला-मार्किन पहनकर राधा केली कुंज में नहीं आने, कुर्ता-पायजामा के साथ अंगोछा रखने और बाल-दाढ़ी को व्यवस्थित रखने की बात कही गई है। बच्चों को भी सादे और मर्यादित कपड़े पहनाने का अनुरोध किया गया है। संदेश के अंत में ‘श्री हरिवंश’ नाम लिखा है।
25 सितंबर को हुई थी रसिक दुलारी शरण की मौत
रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की 25 सितंबर को मौत हुई थी। जानकारी के अनुसार वह वृंदावन के वराह घाट मार्ग स्थित गुरु कृपा कुंज अपार्टमेंट के कमरे से सुबह करीब 10:25 बजे बाहर निकले और लगभग 10:36 बजे चौथी मंजिल की छत से नीचे कूद गए। घटना के बाद पुलिस को उनके शरीर पर गंभीर चोटें मिली थीं। पुलिस के अनुसार कमरे से एक इलेक्ट्रिक ग्राइंडर भी बरामद हुआ, जिसकी फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। पोस्टमार्टम में अधिक रक्तस्राव को मौत का कारण बताया गया है।
मौत की जांच में 30 से ज्यादा लोगों से पूछताछ
मामले की जांच के सिलसिले में सीओ वृंदावन संदीप सिंह, कोतवाली प्रभारी अश्वनी कुमार और पुलिस टीम केली कुंज आश्रम पहुंची। टीम ने आश्रम से जुड़े लोगों से पूछताछ की और करीब आधे घंटे से अधिक समय तक वहां रही।
सीओ वृंदावन के मुताबिक, अब तक 30 से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। पुलिस रसिक दुलारी शरण की मौत के कारणों की जांच कर रही है और यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम क्यों उठाया और उनके शरीर पर मिले घावों की परिस्थितियां क्या थीं।
‘श्री हरिवंश’ नाम को लेकर यह जानकारी
वायरल संदेश के अंत में ‘श्री हरिवंश’ नाम लिखा है। श्री हित हरिवंश महाप्रभु को राधावल्लभ संप्रदाय का संस्थापक माना जाता है। संत प्रेमानंद महाराज भी इसी राधावल्लभ परंपरा से जुड़े हैं। हालांकि वायरल संदेश किस व्यक्ति या संस्था की ओर से जारी किया गया, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
दर्शन और दीक्षा पर अभी कोई समयसीमा नहीं
रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद केली कुंज में संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन और दीक्षा अनिश्चितकाल के लिए बंद किए गए हैं। इन्हें दोबारा कब शुरू किया जाएगा, इस संबंध में अभी कोई समयसीमा सामने नहीं आई है। आश्रम प्रबंधन की ओर से इस संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

