रंगदारी के केस में नया मोड़: होटल कारोबारी कोर्ट में अपने बयान से पलटा
2.50 करोड़ रुपये रंगदारी मांगने के आरोप से किया इनकार, कहा- पुलिस को कोई बयान नहीं दिया; अभियोजन ने पक्षद्रोही घोषित करने की मांग की, 25 सितंबर को होगी जिरह
कानपुर। अधिवक्ता अखिलेश दुबे से जुड़े रंगदारी के मामले में मंगलवार को उस समय नया मोड़ आ गया, जब मुकदमे के वादी होटल कारोबारी सुरेश पाल अपने पूर्व आरोपों से मुकर गए। जिला जज अनमोल पाल की कोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए दर्ज कराए गए बयान में कारोबारी ने घटना से ही इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि न तो उनसे कोई रंगदारी मांगी गई और न ही उन्होंने पुलिस को इस संबंध में कोई बयान दिया था।
सुरेश पाल के बयान के बाद अभियोजन ने उन्हें पक्षद्रोही घोषित करने की मांग कोर्ट के सामने रखी, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। अब अभियोजन 25 सितंबर को वादी से जिरह करेगा।
2025 में दर्ज कराई थी रिपोर्ट
होटल कारोबारी सुरेश पाल ने 7 अगस्त 2025 को किदवई नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि अधिवक्ता अखिलेश दुबे और उनके साथी आयुष मिश्रा उर्फ लवी ने वर्ष 2021 में उन्हें फर्जी दुष्कर्म के मुकदमे में फंसाया था। आरोप था कि मुकदमे से बचाने के नाम पर अखिलेश दुबे ने उनसे पांच करोड़ रुपये की मांग की थी। बाद में बातचीत के बाद ढाई करोड़ रुपये में मामला तय होने का आरोप लगाया गया था। कारोबारी ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया था कि उन्होंने कई बार में अखिलेश दुबे और लवी मिश्रा को रकम दी थी। मामले से जुड़े कारोबारी के बेटे और आरोपियों के बीच बातचीत के कई ऑडियो भी सामने आए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने छह महीने में ट्रायल पूरा करने का दिया था आदेश
मामले में आरोपी अखिलेश दुबे की ओर से सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन दाखिल की गई थी। 18 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए ट्रायल छह महीने के भीतर पूरा करने का आदेश दिया था। इसके बाद किदवई नगर पुलिस ने अखिलेश दुबे और लवी मिश्रा के खिलाफ 230 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। मामला जिला जज अनमोल पाल की अदालत में ट्रायल पर चल रहा था।
बीमारी का हवाला देकर वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुई गवाही
कार्यवाहक डीजीसी ओंकार नाथ वर्मा के मुताबिक, वादी सुरेश पाल की ओर से कोर्ट में अर्जी देकर बताया गया था कि वह गंभीर रूप से बीमार हैं और गवाही देने के लिए अदालत में उपस्थित होने में असमर्थ हैं। इसके साथ मेडिकल संबंधी दस्तावेज भी दाखिल किए गए थे। मंगलवार को अदालत ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उनके बयान दर्ज किए। इस दौरान सुरेश पाल ने अपने पहले लगाए गए आरोपों से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके साथ ऐसी कोई घटना नहीं हुई और उनसे किसी तरह की रंगदारी भी नहीं मांगी गई। उन्होंने पुलिस को कोई बयान देने से भी इनकार किया।
अभियोजन ने पक्षद्रोही घोषित करने की मांग की
वादी के बयान बदलने के बाद अभियोजन ने कोर्ट से उन्हें पक्षद्रोही घोषित करने की मांग की। अदालत ने अभियोजन की मांग स्वीकार कर ली। अब 25 सितंबर को अभियोजन पक्ष वादी सुरेश पाल से जिरह करेगा। इस जिरह में उनके पूर्व आरोपों और अदालत में दिए गए मौजूदा बयान के बीच के अंतर पर सवाल किए जाने की संभावना है।
अन्य मामलों में भी दर्ज हुए थे मुकदमे
अखिलेश दुबे के खिलाफ इससे पहले भी अलग-अलग मामलों में मुकदमे दर्ज किए गए थे। इनमें भाजपा नेता रवि सतीजा के खिलाफ कथित फर्जी दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराकर 50 लाख रुपये रंगदारी मांगने का आरोप, होटल कारोबारी प्रज्ञा त्रिवेदी से रंगदारी, डकैती और मारपीट के आरोप, कांग्रेस नेता संदीप शुक्ला को दुष्कर्म के मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर 10 लाख रुपये रंगदारी मांगने का आरोप तथा अवैध कब्जों की शिकायत करने पर शैलेंद्र कुमार के खिलाफ कथित फर्जी एफआईआर दर्ज कराने और 20 लाख रुपये रंगदारी मांगने का मामला शामिल है। रंगदारी के एक मामले में जमानत न मिलने के कारण भाजपा नेता रवि सतीजा जेल में बंद थे। इसी दौरान उन्होंने बर्रा थाने में कथित फर्जी दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराकर 50 लाख रुपये रंगदारी मांगने का आरोप लगाते हुए अखिलेश दुबे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद किदवई नगर और कोतवाली थाने में अखिलेश दुबे और उनके साथियों के खिलाफ एक के बाद एक कई मुकदमे दर्ज हुए। चार मामलों में जमानत मिलने के बाद होटल कारोबारी से कथित 2.50 करोड़ रुपये रंगदारी मांगने के मामले में जमानत नहीं मिली थी। अब वादी के अदालत में अपने पूर्व आरोपों से मुकरने के बाद इस मुकदमे की सुनवाई में नया मोड़ आ गया है।

