गंगा-यमुना के जलस्तर में गिरावट जारी, कानपुर बैराज पर 1.87 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज
चेतावनी और खतरे के निशान से नीचे पहुंचा जलस्तर, शुक्लागंज में भी राहत; औरैया में यमुना 103.66 मीटर पर
कानपुर। पहाड़ों और मैदानी क्षेत्रों में बारिश की स्थिति सामान्य होने के साथ गंगा और यमुना के जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। सोमवार सुबह आठ बजे फ्लड कंट्रोल कार्यालय, एलजीसी कानपुर की रिपोर्ट के मुताबिक कानपुर बैराज के अपस्ट्रीम में गंगा का जलस्तर 113.580 मीटर, जबकि डाउनस्ट्रीम में 112.890 मीटर दर्ज किया गया। बैराज से इस समय 1,87,750 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया है।
कानपुर बैराज का चेतावनी स्तर 114 मीटर और खतरे का स्तर 115 मीटर निर्धारित है। ऐसे में अपस्ट्रीम का जलस्तर चेतावनी के निशान से 0.420 मीटर नीचे है। वहीं डाउनस्ट्रीम का जलस्तर भी चेतावनी स्तर से काफी नीचे है। पिछले दिनों की तुलना में जलस्तर में आई गिरावट से नदी किनारे के इलाकों में बाढ़ का दबाव कम हुआ है।
शुक्लागंज में भी चेतावनी स्तर से नीचे गंगा
शुक्लागंज में सोमवार सुबह गंगा का जलस्तर 111.730 मीटर दर्ज किया गया। यहां चेतावनी स्तर 113 मीटर और खतरे का स्तर 114 मीटर है। इस तरह शुक्लागंज में भी गंगा का जलस्तर चेतावनी निशान से 1.270 मीटर नीचे बना हुआ है। जलस्तर में गिरावट से तटवर्ती क्षेत्रों में राहत की स्थिति बनी हुई है।
हरिद्वार और नरौरा से भी कम हुआ डिस्चार्ज
गंगा के ऊपरी हिस्सों में भी पानी के डिस्चार्ज में कमी दर्ज की गई है। सोमवार सुबह आठ बजे हरिद्वार बैराज से 59,403 क्यूसेक और नरौरा बैराज से 31,900 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना है। इन बैराजों से कम डिस्चार्ज का असर आगे गंगा के जलस्तर पर भी पड़ने की संभावना है।
औरैया में यमुना 103.66 मीटर पर
उधर, औरैया में यमुना नदी का जलस्तर भी लगातार नीचे जा रहा है। सोमवार सुबह आठ बजे यमुना का जलस्तर 103.660 मीटर दर्ज किया गया। रिपोर्ट में नदी का ट्रेंड घटता हुआ बताया गया है। यहां यमुना का चेतावनी स्तर 112 मीटर और खतरे का स्तर 113 मीटर है। यानी यमुना चेतावनी स्तर से 8.340 मीटर नीचे बह रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को औरैया जिले में बारिश शून्य दर्ज की गई। यमुना का सर्वाधिक बाढ़ स्तर (एचएफएल) 118.51 मीटर 6 अगस्त 2021 को दर्ज किया गया था।
फिलहाल कानपुर बैराज, शुक्लागंज और औरैया में नदियों का जलस्तर चेतावनी और खतरे के निशान से नीचे होने के साथ गिरावट का रुख बनाए हुए है। प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है।

