आगरा में UGC के विरोध में बड़ा प्रदर्शन, 200 ट्रैक्टरों के साथ सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारी

आगरा में UGC के विरोध में बड़ा प्रदर्शन, 200 ट्रैक्टरों के साथ सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारी

कलेक्ट्रेट घेराव के लिए निकले युवकों को पुलिस ने रोका, जेसीबी-बुलडोजर और हाइड्रा लगाकर की नाकेबंदी; वैकल्पिक रास्तों से आगे बढ़ी भीड़, यमुना एक्सप्रेस-वे तक पहुंचा प्रदर्शन
आगरा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों के विरोध में रविवार को आगरा में बड़ा प्रदर्शन हुआ। यूजीसी मुक्ति मोर्चा के आह्वान पर सवर्ण समाज के बड़ी संख्या में लोग करीब 200 ट्रैक्टरों के साथ मुड़ी चौराहा पर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने सभा करने के बाद आगरा कलेक्ट्रेट का घेराव करने के लिए ट्रैक्टर मार्च शुरू किया। अलग-अलग रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों की संख्या करीब 1,000 से 1,500 तक बताई गई है।
प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस और पीएसी ने पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर रखी थी। मुड़ी चौराहा और आसपास के प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई। कई स्थानों पर रास्ता रोकने के लिए जेसीबी, बुलडोजर और हाइड्रा जैसी भारी मशीनें भी खड़ी की गईं। पुलिस का प्रयास था कि प्रदर्शनकारी मुख्य मार्ग से आगे बढ़कर कलेक्ट्रेट तक न पहुंच सकें।
शनिवार शाम से शुरू हो गया था जमावड़ा
यूजीसी मुक्ति मोर्चा की ओर से रविवार को मुड़ी चौराहा से कलेक्ट्रेट तक ट्रैक्टर मार्च निकालने का ऐलान किया गया था। कार्यक्रम की जानकारी मिलने के बाद शनिवार शाम से ही प्रदर्शनकारियों का मुड़ी चौराहा पहुंचना शुरू हो गया था। रविवार सुबह तक बड़ी संख्या में लोग और ट्रैक्टर वहां जमा हो गए।
सभा के दौरान यूजीसी के नियमों के विरोध में नारेबाजी की गई। इसके बाद प्रदर्शनकारी ट्रैक्टरों के साथ कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हो गए।
पुलिस ने जेसीबी और बुलडोजर लगाकर रोका रास्ता
प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस और पीएसी ने कई स्थानों पर मोर्चा संभाला। नादऊ चौराहा के पास मुख्य रास्ते को जेसीबी और अन्य भारी मशीनें लगाकर बंद किया गया था।
मुख्य मार्ग बंद मिलने पर प्रदर्शनकारियों ने ट्रैक्टरों को खेतों की ओर मोड़ दिया। बड़ी संख्या में लोग खेतों और वैकल्पिक रास्तों से आगे बढ़ने लगे। इससे पुलिस-प्रशासन के सामने प्रदर्शनकारियों को रोकने के साथ-साथ इलाके में यातायात व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती भी पैदा हो गई।
अवरोध के पास हुई नोकझोंक
दोपहर करीब 12 बजे प्रदर्शनकारी पुलिस द्वारा लगाए गए अवरोध के पास पहुंच गए। रास्ता बंद करने को लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कुछ लोगों ने अवरोध पार कर आगे बढ़ने की कोशिश की।
इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारी बुलडोजर पर भी चढ़ गए और आगे जाने का प्रयास किया। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। करीब 300 मीटर आगे पुलिस ने दोबारा बैरिकेडिंग कर रास्ता बंद कर दिया। मौके पर काफी देर तक गहमागहमी बनी रही।
यमुना एक्सप्रेस-वे तक पहुंची भीड़
मुख्य मार्ग पर पुलिस की नाकेबंदी के बावजूद प्रदर्शनकारियों का एक समूह यमुना एक्सप्रेस-वे के पास तक पहुंच गया। कुछ प्रदर्शनकारी एक्सप्रेस-वे पर चढ़ गए और सड़क पर खड़े होकर वाहनों को रोकने का प्रयास करने लगे। इससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित होने की स्थिति बनी।
पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उन्हें एक्सप्रेस-वे से हटने के लिए समझाया। इसके बाद प्रदर्शनकारी वहां से हट गए। हालांकि, इसके बाद भी कई लोग अलग-अलग रास्तों से कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने का प्रयास करते रहे।
इस घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर भी सामने आया है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में एक्सप्रेस-वे पर यातायात प्रभावित होने की बात कही गई, जबकि पुलिस के हवाले से सामने आई जानकारी में कहा गया कि एक्सप्रेस-वे पर बड़ी बाधा नहीं होने दी गई और लोगों को समझाकर वहां से हटाया गया।
कई रास्तों से आगे बढ़ते रहे प्रदर्शनकारी
एक्सप्रेस-वे से हटने के बाद प्रदर्शनकारी अलग-अलग रास्तों से कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने लगे। पुलिस की टीमें भी उनके पीछे लगी रहीं और कई स्थानों पर उन्हें रोकने का प्रयास किया गया।
कुछ रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस द्वारा लाठी फटकारने का उल्लेख किया गया है। वहीं पुलिस की ओर से यातायात बाधित करने की कोशिश कर रहे लोगों को हटाए जाने की बात कही गई है।
राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के दौरान आंदोलन से जुड़े नेताओं की ओर से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन एसडीएम एत्मादपुर को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी से संबंधित नियमों को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
प्रदर्शनकारियों की ओर से यूजीसी के संशोधित अधिनियम को वापस लेने, आरक्षण से जुड़े प्रावधानों में बदलाव और आर्थिक आधार पर आरक्षण की व्यवस्था लागू करने जैसी मांगें उठाई गईं। इसके अलावा एससी-एसटी एक्ट में संशोधन की मांग भी सामने आई।
सितंबर में तीसरा बड़ा प्रदर्शन
आगरा में सितंबर के दौरान यूजीसी के मुद्दे को लेकर यह तीसरा बड़ा प्रदर्शन बताया जा रहा है।
1 सितंबर को क्षत्रिय सभा के बैनर तले बाइक रैली निकाली गई थी। प्रदर्शनकारियों ने एत्मादपुर तहसील के आसपास प्रदर्शन किया था, जिससे यातायात प्रभावित हुआ था।
18 सितंबर को सवर्ण समाज और सिस्टम सुधार संगठन की ओर से एत्मादपुर से कलेक्ट्रेट तक ट्रैक्टर मार्च का प्रयास किया गया। उस दौरान भी पुलिस ने कई मार्गों पर नाकेबंदी की थी और प्रदर्शनकारियों तथा प्रशासन के बीच काफी देर तक गहमागहमी रही थी।
20 सितंबर को यूजीसी मुक्ति मोर्चा के आह्वान पर मुड़ी चौराहा से कलेक्ट्रेट घेराव के लिए ट्रैक्टर मार्च निकाला गया। इस दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग के साथ जेसीबी, बुलडोजर और हाइड्रा लगाकर रास्ते रोकने की कोशिश की, जबकि प्रदर्शनकारी वैकल्पिक रास्तों से आगे बढ़ते रहे।
क्या है UGC को लेकर विवाद?
प्रदर्शनकारी उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव से संबंधित यूजीसी के 2026 में अधिसूचित नियमों का विरोध कर रहे हैं। इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव और असमानता से निपटने के लिए व्यवस्था को मजबूत करना बताया गया है।
इन नियमों को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध की आवाजें उठी हैं। इनके क्रियान्वयन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी मामला पहुंचा है और अदालत की कार्यवाही के संबंध में विभिन्न रिपोर्टें सामने आई हैं।
रविवार के प्रदर्शन के बाद आगरा के संवेदनशील चौराहों और प्रमुख मार्गों पर पुलिस-पीएसी की तैनाती जारी रही। प्रशासन के सामने प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ प्रमुख मार्गों पर यातायात सुचारु रखने की चुनौती बनी रही।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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