जालौन की मेफेड्रोन फैक्ट्री के तार कानपुर से जुड़े, केमिकल सप्लायरों की जांच शुरू
गुलाब जल की आड़ में तैयार हो रहा था नशीला पदार्थ, पनकी, फजलगंज और दादानगर औद्योगिक क्षेत्र में पुलिस करेगी छानबीन
कानपुर। जालौन के रामपुरा में मेफेड्रोन ड्रग्स बनाने की फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद इसके तार कानपुर से जुड़ने पर कमिश्नरेट पुलिस सक्रिय हो गई है। पुलिस अब उन केमिकल सप्लायरों की तलाश में जुट गई है, जिनके माध्यम से नशीला पदार्थ बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायन जालौन पहुंचाए जा रहे थे। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने औद्योगिक क्षेत्रों में केमिकल कारोबारियों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत सभी केमिकल सप्लायरों के लाइसेंस और स्टॉक का मिलान किया जाएगा। जांच की जिम्मेदारी एडिशनल पुलिस कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर डॉ. विपिन ताडा को सौंपी गई है।
गुलाब जल की आड़ में बन रही थी मेफेड्रोन
दो दिन पहले जालौन जिले के रामपुरा में पुलिस ने मेफेड्रोन बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया था। जांच में सामने आया कि खेत में झोपड़ी बनाकर गुलाब जल बनाने की आड़ में खतरनाक नशीला पदार्थ तैयार किया जा रहा था। पुलिस की पड़ताल में यह भी जानकारी सामने आई कि कानपुर से किसी प्रभावशाली व्यक्ति के माध्यम से केमिकल की सप्लाई जालौन स्थित फैक्ट्री तक पहुंच रही थी। इसी कड़ी को जोड़ने के लिए अब कानपुर में जांच शुरू कराई जा रही है।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के मुताबिक, मेफेड्रोन बनाने में सल्फ्यूरिक एसिड, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड, टोल्यून और सोडियम समेत कई तरह के केमिकल इस्तेमाल किए जाने की जानकारी मिली है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ये रसायन कानपुर में कहां से खरीदे गए और किन लोगों के माध्यम से जालौन पहुंचाए गए।
तीन औद्योगिक क्षेत्रों में होगी जांच
पुलिस पनकी, फजलगंज और दादानगर औद्योगिक क्षेत्रों में केमिकल कारोबारियों और फैक्ट्री संचालकों की जांच करेगी। केमिकल सप्लायरों के लाइसेंस, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और उपलब्ध स्टॉक का मिलान किया जाएगा। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि किस कारोबारी ने कितना केमिकल खरीदा, किसे बेचा और उसकी आपूर्ति कहां की गई।
एडिशनल पुलिस कमिश्नर डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि जांच के दौरान फैक्ट्री संचालकों से उनके पास उपलब्ध केमिकल के स्टॉक और अब तक की गई बिक्री के संबंध में जानकारी ली जाएगी। रिकॉर्ड का मिलान कर यह पता लगाने की कोशिश होगी कि कहीं रसायनों की आपूर्ति अवैध रूप से तो नहीं की गई।
कई उद्योगों में होता है केमिकल का इस्तेमाल
दूसरी ओर यूपी डाइज एंड केमिकल मर्चेंट एसोसिएशन के सचिव आरके सफ्फड़ के मुताबिक, बताए गए रसायनों के अलावा गन्ने के शीरे से बनने वाले कुछ केमिकल का इस्तेमाल भी ड्रग्स के निर्माण में किया जाता है। उन्होंने बताया कि इन रसायनों का इस्तेमाल विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में होता है। इनमें टेनरी, बैटरी निर्माण, कपड़ा उद्योग, तेजाब और पेंट बनाने वाली फैक्ट्रियां शामिल हैं।
ऐसे में पुलिस के सामने चुनौती यह पता लगाने की है कि औद्योगिक इस्तेमाल के लिए खरीदे और बेचे गए रसायनों में से किसी की आपूर्ति नशीले पदार्थ बनाने के लिए तो नहीं की गई। जांच के बाद ही केमिकल सप्लाई नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।


