मौत से जूझती उम्मीद! शकील को बचाने के लिए 10 घंटे तक भटकता रहा परिवार
पंचर की दुकान पर सोते समय सांप ने डसा, हैलट में मृत घोषित होने के बाद भी अस्पतालों और ओझाओं के चक्कर लगाते रहे परिजन
कानपुर। अपनों को खोने का दर्द क्या होता है, यह सिकटिया गांव के शकील अहमद के परिवार से बेहतर शायद ही कोई समझ सके। जहरीले सांप के डसने के बाद डॉक्टरों ने शकील को मृत घोषित कर दिया, लेकिन परिजनों की उम्मीद नहीं टूटी। उसे बचाने की आस में परिवार करीब 10 घंटे तक कानपुर से फतेहपुर तक भटकता रहा। अस्पतालों में इलाज की गुहार लगाई तो कहीं झाड़-फूंक का सहारा लिया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद शकील की जान नहीं बच सकी।
घटना रविवार दोपहर की है। सिकटिया निवासी शकील अहमद पुत्र हबीब पुरवामीर पेट्रोल पंप के पास अख्तर की पंचर की दुकान में लेटा हुआ था। दोपहर करीब 12 बजे अचानक जहरीले सांप ने उसके सिर पर डस लिया। शकील की चीख सुनकर आसपास मौजूद लोग दौड़े और उसे आनन-फानन में सरसौल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचाया।
सीएचसी से हैलट रेफर, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
सरसौल सीएचसी में शकील की हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उसे हैलट अस्पताल रेफर कर दिया। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनकर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन परिजन उसकी मौत स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। उन्हें लग रहा था कि शायद किसी दूसरे अस्पताल में उपचार से उसकी जान बच जाए।
अस्पतालों से लेकर ओझाओं तक लगाते रहे दौड़
शकील को बचाने की उम्मीद में परिजन उसे लेकर कई निजी अस्पतालों में पहुंचे। डॉक्टरों के मृत घोषित करने के बावजूद वे एक जगह से दूसरी जगह जाते रहे। इसके बाद झाड़-फूंक कराने के लिए कानपुर से फतेहपुर तक भटकते रहे। रविवार रात करीब 10 बजे तक परिवार की यह जद्दोजहद जारी रही, लेकिन उनकी उम्मीद आखिरकार टूट गई।
पांच भाइयों में तीसरे नंबर पर था शकील
बताया गया कि शकील पांच भाइयों में तीसरे नंबर पर था। वह अविवाहित था और प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता था। उसके माता-पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। शकील की मौत से परिवार में मातम पसरा हुआ है। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। उन्होंने पुलिस को सूचना दिए बिना गांव के बाहर स्थित कब्रिस्तान में शव दफनाने की बात कही है।

