फॉलोअप: 30 कैमरों वाले फार्म हाउस में सिर्फ एंट्री पॉइंट का कैमरा खराब, पूर्व कर्मचारी भी शक के घेरे में

फॉलोअप: 30 कैमरों वाले फार्म हाउस में सिर्फ एंट्री पॉइंट का कैमरा खराब, पूर्व कर्मचारी भी शक के घेरे में

रमेश यादव लूटकांड में पुलिस को अब तक नहीं मिला ठोस सुराग, दो पूर्व कर्मचारियों से पूछताछ; बीटीएस डंप में 35 हजार नंबरों की पड़ताल

कानपुर। भाजपा पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश मंत्री और पीतांबरा ग्रुप के निदेशक रमेश यादव के फार्म हाउस में हुई लूट की वारदात पुलिस के लिए पहेली बनती जा रही है। करीब 30 सीसीटीवी कैमरों से लैस फार्म हाउस में बदमाशों के प्रवेश वाले स्थान पर ही कैमरा खराब मिलने से पुलिस को अंदरूनी जानकारी के आधार पर वारदात किए जाने का शक है। जांच में पूर्व कर्मचारियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। हालांकि, अब तक पुलिस को ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे वारदात का खुलासा हो सके।

पुलिस के मुताबिक, नकाबपोश बदमाश जिस दीवार को फांदकर फार्म हाउस में दाखिल हुए, वहां लगा कैमरा काम नहीं कर रहा था। परिसर के बाकी कैमरों की फुटेज उपलब्ध हुई है। ऐसे में जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि बदमाशों को कैमरों की स्थिति की जानकारी कैसे मिली। क्या किसी अंदरूनी व्यक्ति ने उन्हें जानकारी दी थी या फार्म हाउस में पहले काम कर चुका कोई कर्मचारी वारदात में शामिल है, पुलिस इन बिंदुओं पर जांच कर रही है।

डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी के मुताबिक, प्रवेश वाले स्थान पर लगा कैमरा खराब था, जबकि अन्य कैमरों की फुटेज मिली है। पुलिस फुटेज और दूसरे साक्ष्यों को जोड़कर बदमाशों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

कर्मचारियों से पूछताछ पर विवाद

जांच के दौरान पुलिस और रमेश यादव के बीच कर्मचारियों से पूछताछ को लेकर मतभेद की बात भी सामने आई। डीसीपी साउथ ने बुधवार को कहा कि पुलिस जब सुरक्षा कर्मियों और स्टाफ से पूछताछ करना चाहती थी, तब रमेश यादव ने कर्मचारियों को परेशान किए जाने और जेल भेजे जाने की आशंका जताई थी। पुलिस के अनुसार, इसी वजह से पूछताछ में बाधा आई।

हालांकि, रमेश यादव ने पुलिस के इस दावे का खंडन किया है। उनका कहना है कि जांच में सहयोग करने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। घटना हुई है तो पुलिस पूछताछ भी करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।

रमेश यादव की सुरक्षा में छह निजी सुरक्षाकर्मी और छह स्टाफ सदस्य तैनात बताए गए हैं। पुलिस इन सभी से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल कर रही है। जांच अधिकारियों का मानना है कि फार्म हाउस की गतिविधियों और वहां आने-जाने वालों की जानकारी रखने वाले लोगों से पूछताछ महत्वपूर्ण हो सकती है।

दो पूर्व कर्मचारियों को पूछताछ के लिए उठाया

पुलिस ने मामले में नौबस्ता निवासी प्रियांशु तिवारी और ग्वालटोली निवासी हिमांशु दुबे को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों वर्ष 2023 में रमेश यादव के यहां काम करते थे। बाद में दोनों को नौकरी से हटा दिया गया था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि नौकरी छोड़ने के बाद भी उनका फार्म हाउस या वहां के कर्मचारियों से संपर्क बना हुआ था या नहीं।

पुलिस जांच में सामने आया है कि घटना से करीब एक सप्ताह पहले दोनों की लोकेशन गांव में मिली थी। वारदात वाले दिन उनके मोबाइल फोन बंद होने की जानकारी भी सामने आई है। इन परिस्थितियों के आधार पर पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है। हालांकि, अभी तक लूट में उनकी संलिप्तता साबित नहीं हुई है।

रमेश यादव ने बताया कि वह दोनों को पहचानते हैं और उनके यहां काम कर चुके हैं। उनके अनुसार, प्रियांशु समय पर काम पर नहीं आता था, इसलिए उसे हटा दिया गया था। वहीं, हिमांशु पर उन्होंने दीपावली के दौरान लॉकर से डेढ़ लाख रुपये चोरी करने का आरोप लगाया था। रमेश यादव के मुताबिक, बाद में हिमांशु की मां ने धीरे-धीरे रकम लौटा दी थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि वारदात के दौरान आए दोनों नकाबपोशों में से कोई भी प्रियांशु या हिमांशु नहीं था और वह उनकी आवाज पहचानते हैं।

हिमांशु के बैंक खाते के लेनदेन की जांच

पुलिस हिमांशु दुबे के बैंक खाते में हुए लेनदेन की भी जांच कर रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उसके खाते में प्रतिदिन 20 से 25 हजार रुपये के लेनदेन मिले हैं। पुलिस को उसके जुआ खेलने और कर्ज में होने की जानकारी भी मिली है। अब जांच की जा रही है कि इन लेनदेन का किसी तरह से लूट की घटना से संबंध है या नहीं। केवल बैंक खाते में लेनदेन या कर्ज होने से किसी की वारदात में संलिप्तता साबित नहीं होती।

35 हजार मोबाइल नंबरों की छंटनी

पुलिस ने बदमाशों तक पहुंचने के लिए घटनास्थल के आसपास के मोबाइल टावरों का बीटीएस डंप जुटाया है। इसमें 35 हजार से अधिक मोबाइल नंबर सामने आए हैं। पुलिस इन नंबरों में ऐसे लोगों की पहचान कर रही है, जिनकी गतिविधियां घटनास्थल के आसपास संदिग्ध पाई गईं या जो उस क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहने वाले बाहरी नंबर हैं।

इसके साथ ही आसपास के गांवों के दो दर्जन से अधिक संदिग्ध अपराधियों का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है। पुलिस उन लोगों की गतिविधियों, पुराने आपराधिक मामलों और घटना के समय उनकी संभावित मौजूदगी की जानकारी जुटा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, नंबरों की छंटनी के बाद कुछ और लोगों से पूछताछ की जा सकती है।

डीसीपी साउथ ने बताया कि अब तक सात संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। निजी सुरक्षाकर्मियों और सेवादारों से जुड़े तथ्यों की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि सभी संभावित पहलुओं पर काम किया जा रहा है और साक्ष्य मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने लिया घटना का संज्ञान

भाजपा नेता के फार्म हाउस में तमंचे के बल पर बंधक बनाकर लूट की घटना की जानकारी लखनऊ तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री ने पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल से पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेकर जल्द खुलासा करने के निर्देश दिए हैं। उधर, घटना के बाद पुलिस विभाग में भी कार्रवाई हुई है। पुलिस आयुक्त के आदेश पर सेन पश्चिम पारा थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि बदमाशों को फार्म हाउस की सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी कैसे मिली और करीब 30 कैमरों में से प्रवेश वाले स्थान का कैमरा ही खराब क्यों था। पूर्व कर्मचारियों से पूछताछ, मोबाइल नंबरों की छंटनी और सीसीटीवी फुटेज की जांच के जरिए पुलिस कड़ियां जोड़ने में जुटी है। लेकिन जब तक ठोस साक्ष्य सामने नहीं आते, तब तक किसी संदिग्ध की भूमिका को अपराध साबित नहीं माना जा सकता।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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