नवरात्र में खिले गौरी-ककरा के किसानों के चेहरे, गेंदा-गुलाब की बढ़ी मांग से मिल रहा अच्छा भाव
भीतरगांव के 70 फीसदी किसान कर रहे फूलों की खेती, रात में खेतों से तुड़ाई और सुबह होने से पहले कानपुर की मंडियों में पहुंचा रहे फूल

कानपुर। नवरात्र का पर्व शुरू होते ही फूलों की मांग बढ़ गई है। इसका सीधा फायदा भीतरगांव ब्लॉक के गौरी-ककरा गांव के किसानों को मिल रहा है। रिंद नदी के किनारे बसे इस गांव में फूलों की खेती किसानों की आजीविका का प्रमुख साधन बन गई है। गांव के करीब 70 फीसदी किसान गेंदा, गुलाब समेत विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक फूलों की खेती कर रहे हैं। नवरात्र में मांग बढ़ने से किसानों को फूलों का अच्छा भाव मिल रहा है।
रात में खेतों से तुड़ाई, सुबह मंडियों में बिक्री
नवरात्र और अन्य प्रमुख त्योहारों पर फूलों की मांग को देखते हुए किसानों की दिनचर्या भी बदल जाती है। बाजार में ताजे फूल पहुंचाने के लिए किसान एक दिन पहले शाम से ही खेतों में फूलों की तुड़ाई शुरू कर देते हैं। इस काम में परिवार की महिलाएं और बच्चे भी सहयोग करते हैं। इसके बाद सूरज निकलने से पहले ही फूलों को वाहनों में लादकर कानपुर और आसपास के शहरों की मंडियों में पहुंचाया जाता है, जहां किसान इन्हें बेचते हैं।
गेंदा, गुलाब और जाफरी की खेती पर जोर
गांव के किसान सोनू यादव, गोविंद कुमार, महेंद्र शर्मा, नोखे पाल, कमल निषाद, रामबाबू, अखिलेश पाल और ब्रह्म प्रकाश यादव बताते हैं कि वे फूलों की खेती को प्राथमिकता देते हैं। गेहूं, सरसों, धान और अरहर जैसी पारंपरिक फसलों की खेती वे अपनी जरूरत के मुताबिक ही करते हैं।
किसानों के मुताबिक, यहां गेंदा, गुलाब, जाफरी और नौरंग समेत कई प्रकार के व्यावसायिक फूलों की खेती की जाती है। बाजार में मांग के हिसाब से फूलों के दाम घटते-बढ़ते रहते हैं। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से बिक्री की अच्छी उम्मीद रहती है।
त्योहारों से लेकर शादी-ब्याह तक रहती है मांग
फूलों की मांग केवल नवरात्र तक सीमित नहीं रहती। सालभर शादी-ब्याह, धार्मिक आयोजनों, चुनाव और विभिन्न समारोहों में फूलों की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि गौरी-ककरा के किसानों ने फूलों की खेती को अपनी आमदनी का अहम जरिया बना लिया है।
फिलहाल नवरात्र के चलते बाजार में फूलों की बढ़ी मांग से किसानों को बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है। खेतों में खिलते फूल और सुबह-सुबह मंडियों की ओर जाते वाहन गांव की खेती-किसानी की एक अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।

