आरटीई सीट पर दाखिला न देना निजी स्कूल को पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने 7 दिन में प्रवेश का दिया आदेश
छह वर्षीय बच्ची को प्रथम कक्षा में प्रवेश से किया था इनकार, अभिभावक की शिकायतों के बाद भी नहीं हुआ समाधान
कानपुर। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई एक्ट-2009) के तहत सीट आवंटित होने के बावजूद बच्चे को दाखिला न देना कानपुर के मैनावती मार्ग स्थित जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल को भारी पड़ गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट, प्रयागराज में न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने मामले की सुनवाई करते हुए स्कूल के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसके तहत छह वर्षीय बच्ची को प्रथम कक्षा में प्रवेश देने से इनकार किया गया था। अदालत ने स्कूल को आदेश दिया कि बच्ची को सात दिन के भीतर प्रथम कक्षा में प्रवेश दिया जाए।
मामला कानपुर के ख्योरा निवासी अरविंद कुमार की छह वर्षीय बेटी अनविका से जुड़ा है। आरटीई के तहत 18 फरवरी 2026 को हुए आधिकारिक ड्रॉ में अनविका का चयन प्रथम कक्षा में प्रवेश के लिए जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल, मैनावती मार्ग में हुआ था। सीट आवंटित होने के बाद अभिभावकों ने अप्रैल 2026 में स्कूल पहुंचकर सभी मूल दस्तावेज भी जमा कर दिए थे।
अभिभावक के मुताबिक, दस्तावेज जमा करने के बाद स्कूल प्रशासन ने उन्हें प्रवेश के लिए अलग-अलग तारीखों में बुलाया, लेकिन कई बार चक्कर लगाने के बावजूद जुलाई तक बच्ची का प्रवेश नहीं किया गया। बाद में स्कूल प्रशासन ने प्रवेश देने से साफ इनकार कर दिया।
बेटी का दाखिला न होने पर अरविंद कुमार ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय और जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत की। उनका कहना है कि अधिकारियों के स्तर से शिकायत के बावजूद जब बच्ची का प्रवेश नहीं हो सका तो उन्होंने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने आरटीई के तहत आवंटित सीट पर प्रवेश से इनकार करने के स्कूल के फैसले को निरस्त करते हुए सात दिनों के भीतर बच्ची को प्रथम कक्षा में दाखिला देने का आदेश दिया। अदालत के आदेश के बाद अभिभावक को स्कूल प्रशासन और बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से फोन किया गया। इसके बाद अनविका का प्रवेश सुनिश्चित होने की जानकारी दी गई।
अभिभावक ने अदालत के आदेश पर जताई खुशी
अरविंद कुमार ने कहा कि आरटीई के तहत सीट आवंटित होने के बाद भी बच्ची को प्रवेश के लिए कई महीनों तक इंतजार करना पड़ा। अधिकारियों से शिकायत के बाद भी समाधान नहीं हुआ, जिसके चलते उन्हें अदालत की शरण लेनी पड़ी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब बेटी का दाखिला सुनिश्चित होने पर उन्होंने राहत की बात कही।

