हाईकोर्ट ने कानपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर जताई नाराजगी
हाईकोर्ट ने कानपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर जताई नाराजगी
कानपुर। अग्रिम जमानत से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला की अदालत में योगेश कुमार सिंह और रविकांत बाजपेई की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। इस दौरान कानपुर नगर के पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल अदालत में पेश हुए और हलफनामा दाखिल किया।
पुलिस आयुक्त ने अदालत को बताया कि मामले की विवेचना उनकी व्यक्तिगत निगरानी में की जा रही है। उन्होंने केस डायरी में दर्ज सीसीटीवी फुटेज को लेकर उठाई गई आपत्तियों की जांच कराने का भरोसा दिया। पुलिस की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि सीसीटीवी फुटेज में कथित तौर पर कुछ पुलिसकर्मी तोड़फोड़ जैसी गतिविधियों में शामिल दिखाई दे रहे हैं।
पेन ड्राइव भी रिकॉर्ड पर ली
मामले की पूरी विवेचना और उससे जुड़ी जानकारी रिकॉर्ड पर लाने के लिए हाईकोर्ट ने पुलिस आयुक्त को कुछ और समय दिया है। विवेचना के दौरान एकत्र की गई सीसीटीवी फुटेज वाली पेन ड्राइव भी जांच अधिकारी ने बुधवार को अदालत में पेश की, जिसे कोर्ट ने रिकॉर्ड पर ले लिया।
हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर विवेचना अधिकारी धर्मा कुशवाहा को केस डायरी के साथ व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। वहीं, याचियों को पहले दी गई अंतरिम राहत को 14 सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई भी 14 सितंबर को होगी।
क्या है मामला?
मामला कानपुर नगर की एक संपत्ति से जुड़ा है। आरोप है कि पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में शिकायतकर्ता के पति की संपत्ति में अवैध रूप से तोड़फोड़ कर उसे ध्वस्त करने और उस पर कब्जा करने का प्रयास किया गया।
मामले की जांच के दौरान सामने आए सीसीटीवी फुटेज और केस डायरी के आधार पर हाईकोर्ट ने प्रथमदृष्टया पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। इसी मामले में आरोपी योगेश कुमार सिंह ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था।

