कार्यकारिणी चुनाव के दौरान बवाल, पार्षद ने महापौर के बेटों पर लगाया मारपीट का आरोप

कार्यकारिणी चुनाव के दौरान बवाल, पार्षद ने महापौर के बेटों पर लगाया मारपीट का आरोप

मतदान की अनुमति का पत्र रिसीव कराने पहुंचे भाजपा मंडल मंत्री को बंधक बनाने का भी आरोप, डीसीपी ने जांच शुरू कराई

कानपुर। नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव के दौरान मतदान की अनुमति संबंधी पत्र रिसीव कराने पहुंचे भाजपा मंडल मंत्री को कथित रूप से समिति कक्ष में बैठाए जाने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। अशोक नगर के वार्ड-37 से भाजपा पार्षद पवन गुप्ता ने महापौर प्रमिला पांडेय के दोनों बेटों अमित पांडेय और अनुराग पांडेय पर मारपीट और धमकाने का आरोप लगाया है। पार्षद ने डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव को तहरीर देकर मामले में कानूनी कार्रवाई के साथ सुरक्षा की मांग की है। डीसीपी ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए जांच कराने की बात कही है।

मंडल मंत्री को पत्र रिसीव कराने भेजा था

पवन गुप्ता के मुताबिक, 26 सितंबर को नगर निगम सदन में कार्यकारिणी चुनाव होना था। इसमें मतदान करने के लिए उन्होंने नगर आयुक्त और महापौर कार्यालय में अनुमति संबंधी पत्र दिया था। दोपहर करीब 1:50 बजे उन्होंने अपने साथी और भाजपा कौशलपुरी मंडल मंत्री मनीष बाजपेई को पत्र रिसीव कराने के लिए महापौर के व्यक्तिगत सहायक कार्यालय भेजा। काफी देर तक मनीष के वापस नहीं लौटने पर पवन खुद उन्हें तलाशते हुए महापौर कार्यालय पहुंचे। वहां मनीष के नहीं मिलने पर उन्होंने पास स्थित समिति कक्ष में जाकर देखा।

समिति कक्ष में मनीष को बैठाने का आरोप

पवन का आरोप है कि समिति कक्ष में मनीष बाजपेई महापौर के बेटे अमित पांडेय उर्फ बंटी और दो अन्य लोगों के साथ मौजूद थे। पवन के मुताबिक, मनीष को आवाज देने पर अमित पांडेय ने गाली-गलौज की और उन्हें कमरे के अंदर खींच लिया। आरोप है कि इसके बाद उनकी गर्दन दबाकर जमीन पर गिरा दिया गया। पवन का कहना है कि इसी दौरान महापौर के दूसरे बेटे अनुराग पांडेय भी वहां पहुंच गए और उनके साथ मारपीट करने लगे। शोर सुनकर पार्षद हरि स्वरूप तिवारी मौके पर पहुंचे और बीच-बचाव किया। बाद में पार्षद लक्ष्मी कोरी, आलोक पांडेय समेत अन्य पार्षदों और बाहर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें कमरे से बाहर निकाला।

संगठन स्तर पर भी चल रहा विवाद

इस घटना को लेकर भाजपा के अंदर भी दोनों पक्षों के बीच शिकायतें सामने आई हैं। भाजपा क्षेत्रीय संगठन ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को भेजी है। मामले की जांच के लिए संगठन स्तर पर भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

फाइलें गायब होने के मुद्दे पर भी आमने-सामने

विवाद के बीच महापौर प्रमिला पांडेय ने अपने कार्यालय से जरूरी फाइलें गायब होने का दावा किया है। उनका कहना है कि कमरों और अलमारियों की जांच में दो-तीन महत्वपूर्ण फाइलें नहीं मिलीं। महापौर ने कहा कि फाइलें तलाश कराई जा रही हैं और नहीं मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पवन गुप्ता ने फाइलें गायब होने के आरोप को खारिज किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा संगठन के कार्यकर्ताओं को झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की जा रही है। पवन ने महापौर के बेटे अमित पांडेय पर ही विकास कार्यों से जुड़ी फाइलें चोरी करने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

महापौर बोलीं- पहले से था हंगामे का अंदेशा

महापौर प्रमिला पांडेय ने अपने बेटे अमित पांडेय के कार्यालय में मौजूद होने को लेकर कहा कि उन्हें पहले से अंदेशा था कि सदन में हंगामा हो सकता है। इसी वजह से उन्होंने अमित को अपने कार्यालय के रेस्ट रूम में बैठने के लिए कहा था। महापौर का आरोप है कि जब वह सदन की कार्यवाही में मौजूद थीं, तब कुछ लोग उनके कार्यालय के कमरों में गए। उन्होंने सवाल उठाया कि उनकी अनुपस्थिति में पार्षदों को कार्यालय जाने की जरूरत क्यों पड़ी। उनका कहना है कि यह उन्हें और उनके बेटे को फंसाने की कोशिश हो सकती है।

डीसीपी बोले- जांच के बाद होगी कार्रवाई

डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पार्षद पवन गुप्ता की ओर से तहरीर प्राप्त हुई है। मामले की जांच कराई जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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