ड्यूटी पर लौट रहे दरोगा की कार डंपर में घुसी, मौत
सुबह छह बजे घर से निकले थे सतेंद्र सिंह, एक घंटे बाद सरोजनीनगर में हुआ हादसा; 1995 बैच के थे दरोगा
कानपुर। कोयलानगर निवासी दरोगा सतेंद्र सिंह (51) की सोमवार सुबह लखनऊ के सरोजनीनगर में सड़क हादसे में मौत हो गई। वह छुट्टी के बाद कार से ड्यूटी पर लौट रहे थे। सड़क किनारे खड़े डंपर में उनकी कार पीछे से जा घुसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे में सतेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गए। राहगीरों ने उन्हें पास के स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने उनकी जेब से मिले आईडी कार्ड के आधार पर पहचान की और परिजनों को घटना की सूचना दी। पोस्टमार्टम के बाद सोमवार शाम शव को कोयलानगर स्थित घर लाया गया। शव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी, बेटे और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। शाम करीब 5:15 बजे अंतिम संस्कार के लिए शव को ड्योढ़ी घाट ले जाया गया।
सुबह छह बजे घर से निकले थे
पिता सुरेंद्र सिंह ने बताया कि सतेंद्र रविवार को छुट्टी लेकर घर आए थे। सोमवार सुबह करीब छह बजे वह कार से लखनऊ स्थित ड्यूटी के लिए निकले थे। करीब सात बजे सरोजनीनगर पहुंचते ही उनकी कार सड़क किनारे खड़े डंपर में जा घुसी। हादसे की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। राहगीरों ने कार में फंसे सतेंद्र को बाहर निकालकर पास के स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
1995 बैच के थे सतेंद्र, 10 साल से 112 मुख्यालय में तैनात
सतेंद्र सिंह वर्ष 1995 बैच के दरोगा थे। वह पिछले करीब 10 वर्षों से लखनऊ स्थित 112 मुख्यालय में तैनात थे। लंबे समय से लखनऊ में ड्यूटी करने के बाद वह छुट्टी पर परिवार से मिलने कानपुर आए थे। छुट्टी पूरी होने के बाद सोमवार को वापस ड्यूटी पर जाते समय हादसे का शिकार हो गए।
पत्नी और बेटे का रो-रोकर बुरा हाल
सतेंद्र सिंह के परिवार में पत्नी मनीषी सिंह (45) और बेटा राज सिंह (24) हैं। राज प्रयागराज में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रहा है। सतेंद्र मूलरूप से मझावन क्षेत्र के पसे का पुरवा गांव के रहने वाले थे। उनके पिता सुरेंद्र सिंह उर्फ मुन्ना हैं। परिवार में मां जनक कुमारी और दो भाई शैलेंद्र सिंह व मंझिल सिंह हैं। मंझिल सिंह रायबरेली एसपी कार्यालय में सिपाही हैं, जबकि छोटे भाई कोयलानगर में कबाड़ की दुकान चलाते हैं। सतेंद्र की मौत की खबर से परिवार के साथ गांव और कोयलानगर के लोगों में भी शोक की लहर दौड़ गई।

