चुनाव से पहले भाजपा का संगठन पर फोकस, पुराने नेताओं की नाराजगी दूर करने और युवाओं को साधने की तैयारी

गोरखपुर। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा ने संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर सामने आई कमियों को दूर करने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी का विशेष जोर पुराने नेताओं की नाराजगी दूर करने, लंबे समय से उपेक्षित चेहरों को फिर सक्रिय करने और युवाओं का भरोसा बनाए रखने पर है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े के दौरे के दौरान गोरखपुर क्षेत्र की 62 विधानसभा सीटों पर चुनावी तैयारियों के साथ संगठन की जमीनी स्थिति का आकलन किया गया था। इस दौरान पुराने और नए नेताओं से संवाद कर असंतोष के कारणों, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और संगठन में आपसी तालमेल की स्थिति को समझने का प्रयास किया गया। अब मिले फीडबैक के आधार पर पार्टी उन कमियों को दूर करने में जुटी है, जो चुनावी तैयारियों में बाधा बन सकती हैं। भाजपा की रणनीति परंपरागत मतदाताओं का भरोसा बनाए रखने के साथ नए चेहरों को भी संगठन में उचित स्थान देने की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव से पहले पुराने और नए नेताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना पार्टी के लिए बेहद जरूरी है। इसके लिए केवल संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी सक्रिय करना होगा, जो किसी कारण से मुख्यधारा से दूर हो गए हैं। गोरखपुर विश्वविद्यालय के राजनीति विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अमित कुमार उपाध्याय के अनुसार, सरकार में नौकरशाही का प्रभाव बढ़ने से कार्यकर्ताओं में उपेक्षा की भावना पैदा हो सकती है। इससे राजनीतिक नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच दूरी बढ़ने का खतरा रहता है। दूसरी ओर, युवा वर्ग भी विभिन्न मुद्दों पर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहा है। ऐसे में युवाओं की अपेक्षाओं को समझना और उनकी समस्याओं का समाधान करना जरूरी है। संघ प्रमुख मोहन भागवत भी युवाओं के विचारों और अपेक्षाओं को सुनने पर जोर दे चुके हैं। वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि भाजपा के सामने अपने परंपरागत समर्थक वर्गों का विश्वास बनाए रखना बड़ी चुनौती है। यूजीसी के नए नियमों को लेकर सामने आई नाराजगी भी पार्टी के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। ऐसे में संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर संवाद बढ़ाकर असंतोष दूर करने की कोशिश की जा रही है। माना जा रहा है कि फीडबैक के आधार पर आने वाले दिनों में पार्टी संगठनात्मक और राजनीतिक स्तर पर कई और महत्वपूर्ण कदम उठा सकती है।
उपेक्षित नेताओं को फिर मुख्यधारा में लाने की तैयारी
भाजपा संगठन में लंबे समय से उपेक्षित नेताओं और कार्यकर्ताओं को फिर सक्रिय करने की योजना बना रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि पुराने नेताओं के अनुभव और नए चेहरों की ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल चुनावी तैयारियों को मजबूती दे सकता है। इसके लिए असंतोष के कारणों की पहचान कर जिम्मेदारियां सौंपने और संगठन में समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
युवाओं और परंपरागत मतदाताओं पर विशेष नजर
आगामी विधानसभा चुनाव में युवा मतदाताओं का भरोसा बनाए रखना भाजपा की प्राथमिकताओं में शामिल है। विभिन्न मुद्दों पर युवाओं की नाराजगी को देखते हुए उनकी अपेक्षाएं सुनने और समस्याओं का समाधान करने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसके साथ ही यूजीसी के नए नियमों को लेकर उठे विरोध के बीच परंपरागत समर्थक वर्गों का विश्वास बनाए रखना भी पार्टी के लिए अहम चुनौती है।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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