केंद्र सरकार का सख्त एक्शन: अस्पतालों में सिंगल-यूज मेडिकल उपकरणों के दोबारा इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध

केंद्र सरकार का सख्त एक्शन: अस्पतालों में सिंगल-यूज मेडिकल उपकरणों के दोबारा इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध

नई दिल्ली। मरीजों की जान और उनकी सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए केंद्र सरकार ने देश भर के सरकारी, निजी और कॉर्पोरेट अस्पतालों के लिए एक बेहद सख्त और महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ‘सिंगल-यूज’ (एक बार इस्तेमाल होने वाले) मेडिकल उपकरणों और डिस्पोजेबल सर्जिकल सामानों का दोबारा इस्तेमाल (Reuse) पूरी तरह से गैरकानूनी है और इसे तत्काल प्रभाव से बंद किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) द्वारा 16 अक्टूबर को जारी किए गए एक कड़े पत्र में चेतावनी दी गई है कि इस तरह की प्रथाओं से विशेषकर क्रिटिकल केयर (गंभीर इलाज) वाले मरीजों की जान को भारी खतरा हो सकता है।

सरकार ने यह कदम क्यों उठाया है और इसके क्या मायने हैं

किन उपकरणों का हो रहा था दोबारा इस्तेमाल और क्या है खतरा?
सरकार के संज्ञान में यह बात आई थी कि कई नामी निजी और कॉर्पोरेट अस्पताल मुनाफे के चक्कर में सिंगल-यूज उपकरणों को स्टरलाइज (कीटाणुरहित) करके उनका दोबारा इस्तेमाल कर रहे थे।

प्रमुख विभाग: यह खतरनाक चलन मुख्य रूप से कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) और न्यूरोसर्जरी जैसी गंभीर क्लिनिकल सेवाओं में देखा जा रहा था।

प्रमुख उपकरण: भारत में कथित तौर पर एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी में इस्तेमाल होने वाले कार्डियक कैथेटर और गाइडवायर, डायलिसिस के उपकरण, कई तरह के सर्जिकल टूल और यहां तक कि डिस्पोजेबल सिरिंज और सुई का भी दोबारा इस्तेमाल किया जा रहा था।

खतरा: डीजीएचएस ने साफ किया है कि इन उपकरणों के दोबारा इस्तेमाल से मरीजों में क्रॉस-इंफेक्शन (संक्रमण फैलने), डिवाइस के अचानक खराब होने, उसकी कार्यक्षमता और सटीकता कम होने जैसी जानलेवा जटिलताओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

कानूनों और नियमों का खुला उल्लंघन
महानिदेशालय ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि सिंगल-यूज लेबल वाले उपकरणों का इस्तेमाल सिर्फ उन्हें बनाने वाली मूल कंपनी के निर्देशों के अनुसार ही एक बार किया जाना चाहिए। इन्हें दोबारा इस्तेमाल करना निम्नलिखित कानूनों का सीधा उल्लंघन है:

  1. ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940
  2. मेडिकल डिवाइसेस रूल्स, 2017
  3. क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट, 2010

संक्रमण नियंत्रण तथा बायोमेडिकल कचरा प्रबंधन नियम

मरीजों के साथ आर्थिक धोखाधड़ी का भी खुलासा
राज्यों के स्वास्थ्य अधिकारियों, ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) और सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) को भेजे गए पत्र में एक बड़ा खुलासा यह भी हुआ है कि यह सिर्फ स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं, बल्कि एक आर्थिक धोखाधड़ी भी है। कई मामलों में यह देखा गया है कि अस्पतालों ने मरीजों या फिर बिल का भुगतान करने वाले सरकारी विभागों (जैसे CGHS) से उन उपकरणों की ‘पूरी (नई) कीमत’ वसूल की, जिनका वास्तव में दोबारा इस्तेमाल किया गया था। मरीजों को इस बात की भनक तक नहीं लगने दी गई कि उनके शरीर में इस्तेमाल किया गया उपकरण पहले भी किसी अन्य मरीज पर इस्तेमाल हो चुका है। (ज्ञात हो कि CGHS ने नवंबर 2016 में भी इस मुद्दे पर अपने सूचीबद्ध अस्पतालों के लिए एक मेमोरेंडम जारी किया था।)

स्वास्थ्य विभागों और ड्रग कंट्रोलर को सख्त निर्देश
केंद्र सरकार ने इस निर्देश को लागू कराने की पूरी जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य प्राधिकरणों पर डाल दी है। सभी राज्य स्वास्थ्य विभागों और ड्रग कंट्रोलरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों के स्वास्थ्य संस्थानों पर कड़ी निगरानी रखें। अस्पतालों का औचक और नियमित निरीक्षण करें। नियमों का उल्लंघन करते पाए जाने वाले अस्पतालों और क्लीनिकों के खिलाफ लागू कानूनों के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई करें।

मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (AiMeD) ने किया फैसले का स्वागत
सरकार के इस निर्देश का एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (AiMeD) ने पुरजोर स्वागत किया है। संस्था का मानना है कि जो उपकरण सिर्फ एक बार के इस्तेमाल के लिए डिजाइन और प्रमाणित किए गए हैं, उन्हें दोबारा इस्तेमाल करना सीधे तौर पर मरीजों की जान से खेलना है।

जिम्मेदारी तय करने की मांग: AiMeD के फोरम कोऑर्डिनेटर राजीव नाथ ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी उपकरण का इस्तेमाल निर्माता के निर्देशों के खिलाफ जाकर दोबारा किया जाता है, तो उस स्थिति में मरीज को नुकसान पहुंचने पर किसकी जिम्मेदारी होगी (निर्माता की या अस्पताल की), यह भी सरकार को स्पष्ट करना चाहिए।

अन्य मांगें : संस्था ने मांग की है कि नियमित निरीक्षण हो, इस्तेमाल किए गए डिवाइस के निपटान (डिस्पोजल) का पता लगाने योग्य पुख्ता रिकॉर्ड रखा जाए और अस्पताल के कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण दिया जाए।

लागत का मुद्दा : इसके साथ ही AiMeD ने सरकार से यह भी सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि महंगे उपकरणों की लागत, अस्पतालों के लिए डिस्पोजेबल डिवाइस को दोबारा इस्तेमाल करने का बहाना न बन जाए। इसके लिए मूल्य नियंत्रण या अन्य विकल्प तलाशे जाने चाहिए।

आगे की चुनौती : हालांकि सरकार का यह कदम मरीजों के हित में एक बहुत बड़ा फैसला है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि पत्र में निरीक्षण के किसी नए ‘शेड्यूल’ या ऐसे उपकरणों का दोबारा इस्तेमाल करते पाए जाने वाले अस्पतालों के लिए किसी ‘अलग और त्वरित दंड’ का जिक्र नहीं है। ऐसे में यह पूरी तरह से राज्य सरकारों की इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा कि वे इस निर्देश को जमीनी स्तर पर कितनी सख्ती से लागू करा पाती हैं।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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