कानपुर में डेंगू का डंक तेज, एक महीने में 123 नए मरीज मिले; आंकड़ा 114 से बढ़कर 237 पहुंचा
ग्वालटोली और बिल्हौर में सबसे ज्यादा केस, मलेरिया के भी 6 मरीज मिले; हैलट-उर्सला की ओपीडी में रोज 500 से अधिक मरीज बुखार-जुकाम की शिकायत लेकर पहुंच रहे
कानपुर। मौसम में बदलाव के साथ शहर में डेंगू के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बीते एक महीने में डेंगू के मरीजों का आंकड़ा 114 से बढ़कर 237 पहुंच गया है। यानी 30 दिनों में 123 नए मरीज सामने आए हैं। सबसे ज्यादा मामले ग्वालटोली और बिल्हौर क्षेत्र में मिले हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। विभाग ने प्रभावित इलाकों में जांच और मच्छरों के लार्वा को नष्ट कराने का अभियान शुरू किया है। इस दौरान मलेरिया के भी छह मरीज मिले हैं।
वहीं, मौसम बदलने के बीच बुखार और जुकाम के मरीजों की संख्या भी लगातार बनी हुई है। हैलट और उर्सला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 500 से अधिक मरीज इन शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों ने लोगों को सावधानी बरतने और घरों के आसपास पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दी है।
ग्वालटोली और बिल्हौर में सबसे ज्यादा मरीज
डिप्टी सीएमओ डॉ. राजेश्वर सिंह के मुताबिक, ग्वालटोली और बिल्हौर क्षेत्र में डेंगू के सबसे ज्यादा मरीज मिले हैं। इन इलाकों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों को भेजकर जांच कराई गई है। साथ ही घरों और आसपास जमा पानी में मच्छरों के लार्वा की जांच कर उन्हें नष्ट कराया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने के साथ साफ-सफाई पर ध्यान देने की अपील की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि डेंगू के प्रसार को रोकने के लिए मच्छरों के पनपने वाले स्थानों को खत्म करना जरूरी है।
कूलर और गमलों में जमा पानी बन सकता है खतरा
हैलट अस्पताल के एसआईसी डॉ. सौरभ अग्रवाल ने बताया कि मौसम में बदलाव के दौरान मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए घरों में जमा पानी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। गर्मी कम होने पर लोग अक्सर कूलर बंद कर देते हैं, लेकिन उसमें भरा पानी साफ नहीं करते। ऐसे में कूलर के भीतर जमा पानी मच्छरों के पनपने की वजह बन सकता है।
उन्होंने बताया कि पुराने टायरों, गमलों, छतों पर रखे खाली बर्तनों और घर के आसपास जमा पानी में भी मच्छर पनप सकते हैं। लोगों को चाहिए कि कूलर का पानी नियमित रूप से निकालकर उसकी सफाई करें। गमलों और छतों पर पानी जमा न होने दें। पुराने टायरों और खाली बर्तनों को भी ऐसी जगह रखें, जहां उनमें बारिश या अन्य स्रोतों से पानी जमा न हो सके।
हैलट-उर्सला की ओपीडी में रोज 500 से ज्यादा मरीज
मौसम में उतार-चढ़ाव के बीच बुखार और जुकाम की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। हैलट और उर्सला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 500 से अधिक मरीज इन लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर लोगों को लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दे रहे हैं। डॉ. सौरभ अग्रवाल ने कहा कि लगातार बुखार आने पर इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेने से बचें और जरूरत पड़ने पर सरकारी अस्पताल में जांच कराएं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही उपचार कराएं।
डेंगू से बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान
- घरों और आसपास पानी जमा न होने दें।
- कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें और टंकी की सफाई करें।
- गमलों, पुराने टायरों और खाली बर्तनों में पानी न भरने दें।
- मच्छरों से बचने के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनें और मच्छरदानी या मच्छररोधी साधनों का इस्तेमाल करें।
- लगातार बुखार, तेज सिरदर्द, शरीर में दर्द या अन्य असामान्य लक्षण होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
- बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं न लें। डेंगू की आशंका होने पर समय पर जांच कराएं।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि साफ-सफाई के साथ मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने में सहयोग करें। समय पर जांच, उचित उपचार और बचाव के उपाय अपनाकर डेंगू के खतरे को कम किया जा सकता है।


