कानपुर की कथक साधिका डॉ. संगीता श्रीवास्तव को दूरदर्शन का टॉप ग्रेड सम्मान
प्रसार भारती ने कथक नृत्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए दी मान्यता, 25 शोधार्थी उनके निर्देशन में हासिल कर चुके हैं पीएचडी
कानपुर। शहर की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना, गुरु और शिक्षाविद प्रो. डॉ. संगीता श्रीवास्तव ने अपनी कला साधना से एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रसार भारती के अंतर्गत दूरदर्शन ने उन्हें कथक नृत्य के क्षेत्र में ‘टॉप ग्रेड आर्टिस्ट’ के रूप में मान्यता प्रदान की है। यह विशिष्ट उपलब्धि उनकी दीर्घकालीन कलात्मक साधना, उत्कृष्ट प्रस्तुतियों, कथक की गहरी समझ और विशिष्ट कलात्मक क्षमता के मूल्यांकन के आधार पर मिली है।
डॉ. संगीता श्रीवास्तव की इस उपलब्धि को कानपुर की सांस्कृतिक पहचान और कथक की समृद्ध परंपरा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनकी साधना न केवल शास्त्रीय नृत्य के प्रति समर्पण को दर्शाती है, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में उनके योगदान को भी रेखांकित करती है।
दिग्गज गुरुओं से सीखा कथक का हुनर
प्रो. डॉ. संगीता श्रीवास्तव ने कथक की प्रारंभिक शिक्षा के.डी. श्रीवास्तव और पंडित राम बाबू भट्ट से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने डॉ. पुरु दाधीच से प्रशिक्षण लिया और पंडित दुर्गालाल के सान्निध्य में अपनी कला को और निखारा।
उन्हें भारतीय शास्त्रीय नृत्य के महान कलाकार पंडित बिरजू महाराज से कथक की तकनीकी बारीकियां सीखने का भी विशेष अवसर मिला। इन प्रतिष्ठित गुरुओं से प्राप्त प्रशिक्षण ने उनकी नृत्य शैली, भावाभिव्यक्ति और तकनीकी दक्षता को समृद्ध किया।
शिक्षण और शोध के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान
डॉ. संगीता श्रीवास्तव डीजी कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत रही हैं। इसके साथ ही वह छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में कथक नृत्य के शिक्षण से भी गहराई से जुड़ी रही हैं।
नृत्य की व्यावहारिक शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने शोध और अकादमिक क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके कुशल निर्देशन में अब तक लगभग 25 शोधार्थी पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं। यह उपलब्धि कथक के अध्ययन, शोध और भावी पीढ़ी के कलाकारों को तैयार करने में उनकी भूमिका को दर्शाती है।
कानपुर की सांस्कृतिक पहचान को मिली नई पहचान
कथक भारतीय शास्त्रीय नृत्य की ऐसी विधा है, जिसमें लय, ताल, भाव, पद संचालन और अभिनय का अनूठा समन्वय देखने को मिलता है। इस परंपरा को आगे बढ़ाने में गुरु और साधकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
प्रो. डॉ. संगीता श्रीवास्तव को दूरदर्शन की ओर से ‘टॉप ग्रेड आर्टिस्ट’ की मान्यता मिलना उनकी वर्षों की साधना और कलात्मक योगदान का महत्वपूर्ण पड़ाव है। उनकी यह उपलब्धि कानपुर के कला जगत के लिए गौरव का विषय है और शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में आगे बढ़ने की आकांक्षा रखने वाले युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।

