नगर निगम में ग्रीन बेल्ट के सौंदर्यीकरण में लाखों की गड़बड़ी
जांच में 2.89 लाख की कटौती की संस्तुति; सात महीने से कार्रवाई का इंतजार

कानपुर। नगर निगम में विकास कार्यों के नाम पर खर्च की जा रही रकम और उनकी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जोन-2 में दो ग्रीन बेल्ट के सौंदर्यीकरण कार्यों की जांच में काम की मात्रा और गुणवत्ता से जुड़ी कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट नगर आयुक्त को सौंपते हुए दोनों कार्यों में कुल 2.89 लाख रुपये की कटौती की संस्तुति की है। इसके बावजूद जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के करीब सात महीने बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इससे नगर निगम की कार्यप्रणाली और जांच रिपोर्टों पर अमल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जांच में मिट्टी भराई, खरपतवार हटाने, गड्ढे खोदने और लोहे की रेलिंग के वजन समेत कई मदों में माप पुस्तिका में दर्ज काम और मौके पर मिली स्थिति के बीच अंतर पाया गया। इसके अलावा पौधों की देखभाल और सिंचाई के इंतजामों पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच कमेटी ने दोनों स्थलों का निरीक्षण कर दर्ज मात्रा का मौके पर उपलब्ध काम से मिलान किया था। रिपोर्ट में गड़बड़ियां दर्ज होने के बाद भुगतान में कटौती की सिफारिश की गई, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं होने से मामला चर्चा में है।
करीब 19.44 लाख रुपये से कराए गए थे दोनों काम
जोन-2 के अधिशासी अभियंता दिवाकर भास्कर की देखरेख में कृष्णा नगर में एक्सिस बैंक के सामने स्थित ग्रीन बेल्ट का सौंदर्यीकरण करीब 9.66 लाख रुपये से कराया गया था। वहीं, सज्जू इंक्लेव के सामने स्थित ग्रीन बेल्ट के सौंदर्यीकरण पर लगभग 9.78 लाख रुपये खर्च किए गए थे। दोनों कार्यों की कुल लागत करीब 19.44 लाख रुपये बताई गई है।
कामों में गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद नगर निगम ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। इसमें सहायक अभियंता राजेश कुमार, मॉनिटरिंग सेल के प्रभारी अधिकारी मानक चंद्र और अपर नगर आयुक्त संतोष कुमार यादव शामिल थे। कमेटी ने दोनों स्थलों का निरीक्षण कर माप पुस्तिका में दर्ज विवरण और मौके पर मिली स्थिति का मिलान किया।
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों ग्रीन बेल्ट का स्थलीय निरीक्षण 19 मार्च 2026 को किया गया था और जांच रिपोर्ट 23 मार्च 2026 की है। रिपोर्ट में अलग-अलग मदों में अंतर दर्ज करते हुए भुगतान से कटौती की संस्तुति की गई।
700 वर्गमीटर की जगह 500 वर्गमीटर मिला खरपतवार हटाने का काम
सज्जू इंक्लेव के सामने स्थित ग्रीन बेल्ट के सौंदर्यीकरण कार्य में कई मदों में अंतर सामने आया। जांच रिपोर्ट के अनुसार, माप पुस्तिका में खरपतवार हटाने का काम 700 वर्गमीटर दर्ज था, जबकि मौके पर केवल 500 वर्गमीटर काम मिला। इस तरह 200 वर्गमीटर का अंतर पाया गया।
मिट्टी भराई के मामले में भी दर्ज मात्रा और मौके की स्थिति में अंतर मिला। माप पुस्तिका में 175 घनमीटर मिट्टी भराई दर्ज थी, जबकि जांच में मौके पर 110 घनमीटर ही पाई गई। यानी इस मद में 65 घनमीटर का अंतर सामने आया।
इसी तरह पौधरोपण के लिए गड्ढे खोदने के काम में माप पुस्तिका में 1,700 गड्ढे दर्ज थे, जबकि मौके पर 1,200 गड्ढे ही मिले। इस तरह 500 गड्ढों का अंतर पाया गया। जांच कमेटी ने सज्जू इंक्लेव के सामने ग्रीन बेल्ट के कार्य में कुल 1,61,282 रुपये की कटौती की संस्तुति की।
लोहे की रेलिंग के वजन पर भी उठे सवाल
जांच में लोहे की रेलिंग के वजन को लेकर भी अंतर दर्ज किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, माप पुस्तिका में रेलिंग का वजन 12 किलोग्राम प्रति वर्गमीटर दर्ज किया गया था, जबकि मौके पर अलग-अलग हिस्सों में करीब आठ किलोग्राम प्रति वर्गमीटर वजन पाया गया।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि 12 किलोग्राम प्रति वर्गमीटर वजन दर्ज करने के आधार का पर्याप्त विवरण उपलब्ध नहीं था। ऐसे में रेलिंग के निर्धारित मानक, वास्तविक वजन और भुगतान के आधार को लेकर सवाल खड़े हुए। जांच कमेटी ने इन तथ्यों को भी अपनी रिपोर्ट में शामिल किया।
कृष्णा नगर की ग्रीन बेल्ट में भी मिलीं कमियां
दूसरा मामला कृष्णा नगर में एक्सिस बैंक के सामने स्थित ग्रीन बेल्ट के सौंदर्यीकरण का है। यहां भी मिट्टी भराई और अन्य मदों में दर्ज काम तथा मौके पर मिली स्थिति के बीच अंतर पाया गया।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, माप पुस्तिका में मिट्टी भराई की मात्रा 175 घनमीटर दर्ज थी, जबकि मौके पर 150 घनमीटर ही मिली। इसी तरह मिट्टी में स्लज या खाद मिलाने का काम 700 वर्गमीटर दर्ज था, जबकि जांच में यह 615 वर्गमीटर पाया गया।
इसके अलावा क्यारियां तैयार करने, लोहे की रेलिंग और सबमर्सिबल बोरवेल से संबंधित कार्यों में भी कमियां दर्ज की गईं। जांच कमेटी ने इस ग्रीन बेल्ट के काम में 1,27,796 रुपये की कटौती की संस्तुति की।
दोनों कार्यों में प्रस्तावित कटौती का जोड़ 2,89,078 रुपये होता है, जबकि रिपोर्ट में कुल राशि 2,89,079 रुपये दर्ज बताई गई है। दोनों आंकड़ों में एक रुपये का अंतर है, जिसकी पुष्टि किया जाना जरूरी है।
पौधों की देखभाल और सिंचाई व्यवस्था पर भी सवाल
जांच कमेटी ने केवल निर्माण कार्यों की मात्रा ही नहीं, बल्कि ग्रीन बेल्ट में लगाए गए पौधों की सिंचाई, सुरक्षा और देखभाल के इंतजामों पर भी सवाल उठाए। रिपोर्ट में पौधों की उचित देखभाल के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की आशंका जताई गई।
मौके पर लगाया गया सबमर्सिबल पंप भी तय मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बाद पौधों की नियमित सिंचाई, उनकी सुरक्षा और रखरखाव के लिए क्या व्यवस्था की गई थी। यदि शुरुआती स्तर पर ही इन व्यवस्थाओं की निगरानी की गई होती, तो कमियों को समय रहते दूर किया जा सकता था।
जांच रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
दोनों ग्रीन बेल्ट के कार्यों में गड़बड़ियां सामने आने के बाद जांच कमेटी ने भुगतान से करीब 2.89 लाख रुपये की कटौती की संस्तुति की। रिपोर्ट में काम की मात्रा और गुणवत्ता से जुड़े अंतर दर्ज किए गए हैं। इसके बावजूद रिपोर्ट सौंपे जाने के करीब सात महीने बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि जांच में प्रस्तावित कटौती और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही दो अलग-अलग विषय हैं। भुगतान में कटौती की संस्तुति अपने आप में किसी व्यक्ति के खिलाफ दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। इसके लिए विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी तय करना और संबंधित पक्षों का जवाब लेना जरूरी है।
अब सवाल यह है कि जांच रिपोर्ट पर नगर निगम प्रशासन ने क्या कार्रवाई की, प्रस्तावित कटौती लागू हुई या नहीं और कार्यों की निगरानी में सामने आई कमियों के लिए जिम्मेदारी किसकी तय की गई। इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि नगर निगम ने जांच में मिली गड़बड़ियों को दूर करने और भविष्य में ऐसी स्थितियों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं।


