आधुनिकता की दौड़ में बदला शादी का अंदाज, जींस-टॉप में पहुंचीं दुल्हनें; किसी ने भरवाई मांग तो किसी ने लगवाया टीका
बिधनू में सामूहिक विवाह समारोह में दिखा बदलते दौर का रंग, पारंपरिक लाल जोड़े की जगह कैजुअल ड्रेस में पहुंचीं युवतियां
108 जोड़ों ने कराया था पंजीकरण, 93 का ही हुआ विवाह

कानपुर। वक्त के साथ समाज बदल रहा है और बदलते समाज के साथ शादी-ब्याह की परंपराएं भी नए रंग में ढल रही हैं। कभी दुल्हन का लाल जोड़ा, हाथों में मेहंदी और मांग में सिंदूर विवाह की पहचान हुआ करते थे, लेकिन अब आधुनिकता की दौड़ में शादी का अंदाज भी बदलने लगा है। इसकी झलक शुक्रवार को बिधनू के कठेरूवा स्थित एक गेस्ट हाउस में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह में देखने को मिली। यहां कोई दुल्हन पारंपरिक लाल जोड़े में सजी थी तो कोई सलवार-सूट में पहुंची। कुछ जींस-टॉप और जींस-कुर्ता पहनकर ही सात फेरे लेने पहुंच गईं। विवाह की रस्मों में भी नई सोच की अलग-अलग तस्वीरें नजर आईं। किसी ने दूल्हे से पूरी मांग भरवाई तो किसी ने सिर्फ माथे पर टीका लगवाकर रस्म पूरी कर ली।
समारोह में एक तरफ पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह हो रहे थे तो दूसरी तरफ नई पीढ़ी का बदलता नजरिया भी साफ दिखाई दे रहा था। कुछ जोड़ों के पहले से प्रेम विवाह कर लेने और सम्मेलन में दोबारा शादी की रस्म निभाने की बात भी सामने आई। ऐसे में यह आयोजन केवल सामूहिक विवाह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बदलते सामाजिक परिवेश और युवा पीढ़ी की पसंद की तस्वीर भी पेश करता नजर आया।
108 ने कराया पंजीकरण, 93 जोड़ों का ही हुआ विवाह
सामूहिक विवाह समारोह में भीतरगांव ब्लॉक के कुल 108 जोड़ों ने पंजीकरण कराया था, लेकिन आयोजन के दिन इनमें से 93 जोड़े ही विवाह के लिए पहुंचे। शेष 15 जोड़े समारोह में शामिल नहीं हुए। पंजीकृत जोड़ों में 10 मुस्लिम जोड़े भी शामिल थे, जिनमें से आठ का निकाह संपन्न कराया गया। इस तरह दो मुस्लिम जोड़े भी समारोह में नहीं पहुंचे।
एडीओ समाज कल्याण अभिषेक यादव ने बताया कि कुल 108 पंजीकरण के सापेक्ष 93 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया है। जो जोड़े आयोजन में शामिल नहीं हुए, उनका अब इस आयोजन में विवाह नहीं हो सकेगा। उन्हें योजना का लाभ लेने के लिए पहले विभाग से अपना डाटा रीसेट कराना होगा। इसके बाद दोबारा आवेदन करने पर ही उन्हें योजना का लाभ मिल सकेगा।
लाल जोड़े की जगह जींस-टॉप ने ली

भारतीय समाज में शादी को हमेशा से पारंपरिक परिधानों और रीति-रिवाजों से जोड़कर देखा जाता रहा है। दुल्हन के लाल जोड़े को सुहाग और नई जिंदगी की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। लेकिन अब नई पीढ़ी शादी के मौके पर भी अपनी पसंद और सहजता को प्राथमिकता देने लगी है। सामूहिक विवाह समारोह में कई युवतियां पारंपरिक दुल्हन के परिधान के बजाय सामान्य कपड़ों में पहुंचीं। किसी ने सलवार-सूट पहना तो कोई जींस-टॉप में ही विवाह के लिए तैयार थी।
सिंदूर की जगह टीका, रस्मों में भी दिखी नई सोच
शादी की रस्मों के दौरान भी बदलाव नजर आया। वरमाला और सात फेरों के बाद जब मांग भरने की बारी आई तो कुछ दुल्हनों ने पूरी मांग में सिंदूर भरवाया, जबकि कुछ ने केवल माथे पर टीका लगवाया। भीतरगांव के बरईगढ़ निवासी छंगू सोनकर की बेटी चांदनी जींस-टॉप पहनकर घाटमपुर के गुजेला निवासी शैलेंद्र कुमार के साथ विवाह करने पहुंची। रस्म के दौरान उसने मांग भरवाने के बजाय माथे पर टीका लगवाया। इसी तरह नौरंगा निवासी बालगोविंद की बेटी अंजलि ने दिल्ली निवासी फूलचंद्र के बेटे राहुल कुमार के साथ विवाह किया। इस जोड़े में भी मांग भरने की जगह माथे पर टीका लगाया गया। मोहम्मदपुर निवासी रामबली कुरील की बेटी लक्ष्मी और घाटमपुर के कंधौली निवासी मोहित के विवाह में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला।
प्रेम विवाह के बाद सम्मेलन में निभाईं रस्में
समारोह में आधुनिक प्रेम संबंधों और पारिवारिक-सामाजिक स्वीकृति की तस्वीर भी दिखाई दी। भीतरगांव की साधना देवी ने मुरादाबाद के रौनक के साथ विवाह किया। बताया गया कि दोनों पहले ही प्रेम विवाह कर चुके थे, लेकिन सामूहिक विवाह समारोह में उन्होंने दोबारा पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ शादी की। वहीं चतुरीखेड़ा निवासी छेदीलाल की बेटी राधिका का विवाह कराने के लिए तरुण पुत्र कैलाश चंद्र दिल्ली से पहुंचा था। राधिका भी जींस-कुर्ते में नजर आई।
10 मुस्लिम जोड़ों में आठ का हुआ निकाह
समारोह में मुस्लिम जोड़ों का निकाह मौलवी बिलाल काजी ने संपन्न कराया। कुल 10 मुस्लिम जोड़ों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से आठ जोड़े निकाह के लिए पहुंचे। अकबरपुर निवासी इजाज के बेटे नौशाद और भीतरगांव के भदवारा निवासी नेहा समेत अन्य जोड़े निकाह के बंधन में बंधे। फतेहपुर निवासी रमजान अली के बेटे मोहम्मद तस्लीम और भीतरगांव के मदनपुर निवासी रमजान की बेटी रेशमा का भी निकाह संपन्न हुआ।
बारिश में भीगते रहे जोड़े, पंडाल में संपन्न हुईं रस्में
आधुनिकता और बदलते पहनावे के बीच आयोजन की व्यवस्थाओं में चुनौतियां भी नजर आईं। बारिश के दौरान उपहार लेने के लिए कतार में खड़े दूल्हा-दुल्हन भीगते रहे। हालांकि मुख्य विवाह पंडाल वाटरप्रूफ होने के कारण उसके भीतर विवाह की रस्में बिना किसी व्यवधान के संपन्न होती रहीं।
आधुनिकता के साथ बदल रही शादी की परिभाषा
बिधनू के इस सामूहिक विवाह समारोह ने बदलते समाज की तस्वीर सामने रखी। पहनावे से लेकर विवाह की रस्मों तक नई पीढ़ी अपनी पसंद को तरजीह दे रही है। कपड़ों और रस्मों की पसंद व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विषय है, लेकिन सरकारी सामूहिक विवाह योजना में शामिल जोड़ों की पात्रता और वैवाहिक स्थिति का सत्यापन भी उतना ही जरूरी है। 108 पंजीकरण के सापेक्ष 93 जोड़ों का विवाह होना और 15 का अनुपस्थित रहना भी आयोजन का अहम पहलू रहा।
कानपुर के मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे जैन ने बताया कि ये वर वधु की मर्जी है कि कैसे कपड़े पहनकर वो शादी करना चाहती है लेकिन हिंदू रीति रिवाज के अनुसार आगे से उनको पारम्परिक वेशभूषा में आने को प्रेरित किया जाएगा।
शादी के लिए सरकार देती है एक लाख रुपये की सहायता

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रति पात्र जोड़े पर एक लाख रुपये की सहायता का प्रावधान बताया गया है। इसमें 64 हजार रुपये वधू के खाते में, 21 हजार रुपये गृहस्थी के उपहार और सामग्री के लिए तथा 15 हजार रुपये आयोजन की व्यवस्था पर खर्च किए जाते हैं।
भीतरगांव ब्लॉक के बरईगढ़ निवासी छंगू सोनकर की बेटी चांदनी घाटमपुर के गुजेला निवासी रामप्रसाद के बेटे शैलेंद्र कुमार के साथ विवाह करने पहुंची। चांदनी जींस-टॉप में थी। विवाह की रस्म के दौरान उसने मांग में सिंदूर भरवाने के बजाय माथे पर टीका लगवाया। इसी तरह नौरंगा निवासी बालगोविंद की बेटी अंजलि ने दिल्ली निवासी फूलचंद्र के बेटे राहुल कुमार के साथ विवाह किया। इस जोड़े में भी मांग भरने की रस्म के स्थान पर माथे पर टीका लगाया गया। मोहम्मदपुर निवासी रामबली कुरील की बेटी लक्ष्मी और घाटमपुर के कंधौली निवासी मोहित के विवाह में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला।
वहीं भीतरगांव के चतुरीखेड़ा निवासी छेदीलाल की बेटी राधिका का विवाह कराने के लिए तरुण पुत्र कैलाश चंद्र दिल्ली से पहुंचा था। राधिका भी जींस-टॉप में नजर आई। इन तस्वीरों ने समारोह की तैयारियों और विवाह की रस्मों को लेकर चर्चा छेड़ दी।


