कानपुर में सुबह धुंध, दोपहर में धूप से गर्मी का अहसास, सुबह-शाम बढ़ने लगी ठंड
अधिकतम तापमान 31 और न्यूनतम 18 डिग्री रहने का अनुमान, अगले 24 घंटे बारिश के आसार नहीं; मौसम विशेषज्ञ ने किसानों को रबी की बुवाई की तैयारी की दी सलाह
कानपुर। शहर में शुक्रवार सुबह धुंध छाई रही। सुबह और शाम के समय ठंड का असर धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। मौसम में बदलाव के साथ लोगों को सर्दी-जुकाम की शिकायतें भी होने लगी हैं। हालांकि, दिन में तेज धूप निकलने से तापमान में बढ़ोतरी होगी और दोपहर के समय गर्मी का अहसास बना रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार को शहर का अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। अगले 24 घंटे में बारिश की कोई संभावना नहीं है।
पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा से 6 से 7 मील प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। शाम के समय आर्द्रता बढ़कर 75 से 80 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
दिन में धूप, सुबह-शाम बढ़ेगी ठंड
मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि फिलहाल मौसम शुष्क बना हुआ है। हवाओं की दिशा में बदलाव हो रहा है, लेकिन उत्तर-पश्चिम से आने वाली शुष्क हवाओं का प्रभाव लगातार नहीं बन पा रहा है। पहाड़ों से आने वाली ठंडी हवाओं का असर कमजोर रहने के कारण दिन के तापमान में गिरावट नहीं हो रही है। यही वजह है कि दोपहर में धूप के चलते गर्मी महसूस हो रही है, जबकि सुबह और शाम हल्की ठंडक बनी हुई है।
अगले 24 घंटे बारिश के आसार नहीं
डॉ. पांडेय के मुताबिक, मौसम का यही मिजाज फिलहाल आगे भी बना रहेगा। दिन में धूप निकलने से गर्मी का अहसास होगा, जबकि सुबह और रात के समय ठंड महसूस होगी। हवाओं की दिशा में बदलाव के बावजूद तापमान में अचानक गिरावट की संभावना नहीं है। फिलहाल बारिश के भी कोई आसार नहीं हैं।
किसानों को रबी की बुवाई की तैयारी की सलाह
मौसम विशेषज्ञ ने किसानों को रबी की फसलों की बुवाई की तैयारी शुरू करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि किसान खेतों में पलेवा करके जमीन तैयार कर लें, ताकि मौसम अनुकूल होते ही बुवाई शुरू की जा सके।
कम पानी में तैयार होने वाली किस्में चुनें
डॉ. पांडेय ने किसानों को फसलों की किस्मों का चयन सावधानी से करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि किसान ऐसी किस्में चुनें, जो कम पानी में भी अच्छी तरह विकसित हो सकें और नमी की कमी सहन करने में सक्षम हों। इससे आगे चलकर सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में भी फसल को नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी।


