कानपुर जू में 15 दिन में चार काले हिरणों की मौत, IVRI की टीम ने संभाली जांच
हीमोप्रोटोजोआ संक्रमण की आशंका, एक मृत हिरण का पोस्टमार्टम कर विसरा व सैंपल बरेली भेजे गए

कानपुर। कानपुर चिड़ियाघर में काले हिरणों की लगातार हो रही मौतों ने जू प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। पिछले 15 दिनों में चार काले हिरणों की मौत हो चुकी है। लगातार मौतों के बाद भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), इज्जतनगर-बरेली के वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम मंगलवार को कानपुर जू पहुंची। टीम ने काले हिरणों के बाड़े का निरीक्षण किया और एक मृत हिरण का पोस्टमार्टम कराया। मृत हिरण का विसरा समेत अन्य सैंपल जांच के लिए बरेली भेजे गए हैं।
विशेषज्ञों ने शुरुआती जांच के आधार पर काले हिरणों में हीमोप्रोटोजोआ संक्रमण की आशंका जताई है। हालांकि, हिरणों की मौत की वास्तविक वजह जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मक्खी के काटने से फैल सकता है संक्रमण
कानपुर जू के डॉक्टर मोहम्मद नासिर ने बताया कि टैबनिड फ्लाई (Tabanid fly) के जरिए यह संक्रमण एक हिरण से दूसरे हिरण में फैल सकता है। यदि मक्खी किसी संक्रमित हिरण को काटती है और इसके बाद दूसरे हिरण को काटती है तो संक्रमण उसके शरीर में भी पहुंच सकता है।
संक्रमण के बाद हिरणों में खाना कम करना, मूवमेंट घट जाना और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालत गंभीर होने पर हिरण चलते-चलते अचानक गिर सकता है और कुछ ही समय में उसकी मौत भी हो सकती है।
रायपुर की घटना से मिलते-जुलते लक्षण
डॉ. नासिर के मुताबिक, वर्ष 2015 में रायपुर के नंदन वन में भी काले हिरणों में इसी तरह के लक्षण देखने को मिले थे। उस समय भी अक्टूबर के आसपास हिरणों की मौत हुई थी। बीमारी की वास्तविक पहचान कई महीने बाद फरवरी में हो सकी थी।
कानपुर जू में जांच के लिए पहुंची IVRI की टीम ने भी यहां काले हिरणों में दिखाई दे रहे लक्षणों को रायपुर की घटना से मिलता-जुलता बताया है। इसके बाद जू प्रशासन ने एहतियाती कदम और तेज कर दिए हैं।
87 में से 26 हिरणों को लगाया गया वैक्सीन
कानपुर चिड़ियाघर में वर्तमान में कुल 87 काले हिरण हैं। संक्रमण की आशंका को देखते हुए बुधवार को 26 हिरणों को वैक्सीन लगाई गई। बाकी हिरणों की भी लगातार निगरानी की जा रही है।
जू प्रशासन ने हिरणों के बाड़े में साफ-सफाई भी कराई है। संक्रमण फैलने की आशंका और मक्खियों की रोकथाम के लिए बाड़े में चूने और दवाओं का छिड़काव कराया गया है।
चलते-चलते गिर रहे थे हिरण, कुछ देर में मौत
डॉ. नासिर ने बताया कि पिछले दिनों कुछ हिरण चलते-चलते अचानक गिर रहे थे और कुछ ही देर में उनकी मौत हो जा रही थी। चिड़ियाघर के डॉक्टर नासिर और कटियार लगातार हिरणों का इलाज और निगरानी कर रहे थे, लेकिन मौतों का सिलसिला नहीं रुकने पर जू प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए IVRI बरेली के विशेषज्ञों से जांच कराने का फैसला लिया।
जू निदेशक की ओर से IVRI को पत्र भेजा गया था। इसके बाद मंगलवार को विशेषज्ञों की टीम कानपुर चिड़ियाघर पहुंची। टीम में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एम. करीकलन, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश कुमार और तकनीशियन आदर्श कुमार शामिल रहे।
विशेषज्ञों ने सबसे पहले काले हिरणों के बाड़े का निरीक्षण किया। इसके बाद एक मृत हिरण का पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम के दौरान लिए गए विसरा समेत अन्य सैंपल जांच के लिए बरेली भेजे गए हैं।
डेढ़ साल से स्थायी पशु चिकित्सा अधिकारी नहीं
कानपुर चिड़ियाघर में करीब डेढ़ साल से स्थायी पशु चिकित्सा अधिकारी नहीं है। फिलहाल संविदा डॉक्टरों के भरोसे वन्यजीवों की देखभाल की जा रही है। ऐसे में वन्यजीवों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, समय पर उपचार, वैक्सीनेशन और बाड़ों की साफ-सफाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, जू प्रशासन का कहना है कि काले हिरणों की मौत की वास्तविक वजह IVRI की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

