यूआईईटी में बायोइंफार्मेटिक्स कोर्स बंद, दो शिक्षकों की सेवा समाप्त करने का फैसला

यूआईईटी में बायोइंफार्मेटिक्स कोर्स बंद, दो शिक्षकों की सेवा समाप्त करने का फैसला

तीन साल से लगातार घट रही थी छात्र संख्या, इस सत्र में एक भी दाखिला नहीं; अन्य पाठ्यक्रम में समायोजन के विकल्प पर भी हुआ विचार
कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (यूआईईटी) में संचालित बायोइंफार्मेटिक्स पाठ्यक्रम को बंद करने का फैसला लिया गया है। पाठ्यक्रम में इस सत्र में एक भी प्रवेश नहीं होने के बाद विश्वविद्यालय की कार्य परिषद (एग्जीक्यूटिव काउंसिल) ने यहां स्ववित्तपोषित योजना के तहत कार्यरत दो शिक्षकों की सेवा समाप्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। दोनों शिक्षकों की सेवा समाप्ति का आदेश जल्द जारी किए जाने की बात कही गई है।
बायोइंफार्मेटिक्स पाठ्यक्रम में दो वर्षीय एमएससी और एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स संचालित किया जा रहा था। इन पाठ्यक्रमों में सहायक प्रोफेसर के पद पर डॉ. ममता सागर और बजेंद्र सिंह कार्यरत थे। विश्वविद्यालय के अनुसार, पिछले करीब तीन वर्षों से पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों की संख्या लगातार कम हो रही थी। स्थिति यह रही कि चालू सत्र में पाठ्यक्रम में एक भी विद्यार्थी ने प्रवेश नहीं लिया।
दूसरे पाठ्यक्रम में समायोजन पर भी हुआ विचार
छात्र संख्या शून्य होने के बाद विश्वविद्यालय स्तर पर दोनों शिक्षकों को किसी दूसरे पाठ्यक्रम में उनकी योग्यता के अनुसार समायोजित करने के विकल्प पर भी विचार किया गया। इसके लिए उनकी शैक्षणिक योग्यता और अन्य पाठ्यक्रमों की आवश्यकताओं की समीक्षा की गई। हालांकि, विश्वविद्यालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक एआईसीटीई के निर्धारित मानकों के अनुसार दोनों शिक्षकों की योग्यता किसी अन्य संचालित पाठ्यक्रम में समायोजन के लिए उपयुक्त नहीं पाई गई।
इसके बाद दोनों शिक्षकों की सेवा समाप्त करने का प्रस्ताव कार्य परिषद की बैठक में रखा गया।
कार्य परिषद में रिपोर्ट पर हुई विस्तृत चर्चा
वीसी प्रो. विनय कुमार पाठक की अध्यक्षता में हुई कार्य परिषद की बैठक में संबंधित कमेटी की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में पाठ्यक्रम में लगातार कम हो रही छात्र संख्या और इस सत्र में प्रवेश शून्य रहने के साथ ही शिक्षकों के समायोजन से जुड़े विकल्पों पर भी विचार किया गया।
बैठक के अंत में शासनादेश में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पर्याप्त छात्र संख्या नहीं होने के कारण पाठ्यक्रम को बंद करने और स्ववित्तपोषित योजना के तहत कार्यरत दोनों शिक्षकों की सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया गया। कुलपति की ओर से कहा गया कि जल्द ही दोनों शिक्षकों की सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया जाएगा।
दलित छात्रा के उत्पीड़न के आरोप का मामला भी चर्चा में
वहीं, विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ टीचर एजुकेशन से जुड़ा दलित छात्रा के उत्पीड़न का मामला भी एक बार फिर चर्चा में है। जुलाई में एक छात्रा ने विभाग की एचओडी और अन्य शिक्षकों पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। छात्रा ने मामले की शिकायत कुलपति के साथ ही यूजीसी पोर्टल पर भी की थी।
विश्वविद्यालय स्तर पर गठित आंतरिक समिति ने मामले की जांच की थी। विश्वविद्यालय के अनुसार, जांच में छात्रा की ओर से लगाए गए आरोपों को निराधार पाया गया था।
अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट के अनुसार, छात्रा की शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने मामले का संज्ञान लेते हुए पुलिस कमिश्नर और विश्वविद्यालय के कुलसचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग की ओर से मामले में संबंधित पक्षों से जवाब मांगे जाने की बात सामने आई है। हालांकि, नोटिस में लगाए गए आरोपों और विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच के निष्कर्षों के बीच अंतर को देखते हुए मामले में आगे की कार्रवाई और संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण होगा।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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