सामूहिक विवाह या सरकारी योजना की रस्म अदायगी? जींस-टॉप में पहुंचीं दुल्हनें, किसी ने भरवाई मांग तो किसी ने लगवाया टीका
बिधनू में सामूहिक विवाह समारोह की तस्वीरों ने खड़े किए सवाल, कहीं पहले से हो चुकी थी शादी तो कहीं दोबारा ब्याह रचाने की तैयारी
चार दिवसीय आयोजन के पहले दिन 108 जोड़ों का विवाह, 10 मुस्लिम जोड़ों का हुआ निकाह; बारिश में उपहार लेने के लिए भीगते रहे दूल्हा-दुल्हन

कानपुर। गरीब परिवारों की बेटियों के हाथ पीले करने और उन्हें आर्थिक संबल देने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का बिधनू में आयोजित समारोह कई सवाल छोड़ गया। जिस आयोजन का मकसद गरीब परिवारों की बेटियों का सम्मान के साथ घर बसाना है, वहां विवाह की रस्मों के दौरान ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने सरकारी योजना की पारदर्शिता और आयोजन की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए। कहीं दुल्हन जींस-टॉप पहनकर सात फेरे लेने पहुंची तो कहीं मांग में सिंदूर भरने की जगह माथे पर टीका लगाकर विवाह की रस्म पूरी कर ली गई। कुछ जोड़ों के पहले से प्रेम विवाह करने की बात भी सामने आई। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह आयोजन वास्तव में जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए था या सरकारी योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं के लिए विवाह की औपचारिकता निभाई जा रही थी?
बिधनू के कठेरूवा स्थित एक गेस्ट हाउस में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत चार दिवसीय आयोजन का शुभारंभ हुआ। पहले दिन भीतरगांव ब्लॉक के 108 जोड़ों को विवाह के लिए बुलाया गया था। इनमें 10 मुस्लिम जोड़े भी शामिल थे। समारोह में वरमाला, सात फेरे और निकाह की रस्में संपन्न कराई गईं। लेकिन आयोजन के बीच कुछ ऐसे दृश्य सामने आए, जो सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को उजागर करते नजर आए।
किसी ने नहीं पहना दुल्हन का जोड़ा, किसी ने मांग में नहीं भरवाया सिंदूर
आमतौर पर विवाह समारोह में दुल्हन लाल जोड़े, आभूषण और पारंपरिक साज-सज्जा में नजर आती है, लेकिन यहां कई दुल्हनें सलवार-सूट में पहुंचीं तो कुछ जींस-टॉप और जींस-कुर्ता पहनकर ही विवाह की रस्मों में शामिल हो गईं। सात फेरे और वरमाला के बाद जब मांग भरने की रस्म आई तो किसी ने पूरी मांग भरवाई तो किसी ने केवल माथे पर टीका लगवाकर रस्म पूरी कर ली। सवाल यह नहीं कि कोई दुल्हन किस तरह के कपड़े पहनकर शादी करे, बल्कि सवाल यह है कि विवाह की वास्तविक स्थिति और योजना के पात्रता संबंधी मानकों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया।
पहले प्रेम विवाह, फिर सम्मेलन में शादी की रस्म
समारोह में ऐसे जोड़े भी पहुंचे, जिनके पहले से प्रेम संबंध होने और विवाह कर लेने की जानकारी सामने आई। भीतरगांव के शाहपुर निवासी राम दिनेश की बेटी साधना देवी ने मुरादाबाद के रौनक पुत्र चंद्रशेखर के साथ विवाह किया। बताया गया कि दोनों पहले ही प्रेम विवाह कर चुके थे। इसके बाद सामूहिक विवाह सम्मेलन में उन्होंने फिर से पारंपरिक रस्मों के साथ विवाह किया। ऐसे मामलों में यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या आयोजन से पहले जोड़ों के वैवाहिक स्थिति और पात्रता की जांच की गई थी?
जींस-टॉप में आई चांदनी, मांग भरने के बजाय लगवाया टीका

भीतरगांव ब्लॉक के बरईगढ़ निवासी छंगू सोनकर की बेटी चांदनी घाटमपुर के गुजेला निवासी रामप्रसाद के बेटे शैलेंद्र कुमार के साथ विवाह करने पहुंची। चांदनी जींस-टॉप में थी। विवाह की रस्म के दौरान उसने मांग में सिंदूर भरवाने के बजाय माथे पर टीका लगवाया। इसी तरह नौरंगा निवासी बालगोविंद की बेटी अंजलि ने दिल्ली निवासी फूलचंद्र के बेटे राहुल कुमार के साथ विवाह किया। इस जोड़े में भी मांग भरने की रस्म के स्थान पर माथे पर टीका लगाया गया। मोहम्मदपुर निवासी रामबली कुरील की बेटी लक्ष्मी और घाटमपुर के कंधौली निवासी मोहित के विवाह में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला।
वहीं भीतरगांव के चतुरीखेड़ा निवासी छेदीलाल की बेटी राधिका का विवाह कराने के लिए तरुण पुत्र कैलाश चंद्र दिल्ली से पहुंचा था। राधिका भी जींस-टॉप में नजर आई। इन तस्वीरों ने समारोह की तैयारियों और विवाह की रस्मों को लेकर चर्चा छेड़ दी।
10 मुस्लिम जोड़ों का कराया गया निकाह
समारोह में शामिल 10 मुस्लिम जोड़ों का मौलवी बिलाल काजी ने निकाह कराया। इनमें अकबरपुर निवासी इजाज के बेटे नौशाद और भीतरगांव के भदवारा निवासी नेहा समेत अन्य जोड़े शामिल रहे। फतेहपुर निवासी रमजान अली के बेटे मोहम्मद तस्लीम और भीतरगांव के मदनपुर निवासी रेशमा का भी निकाह संपन्न कराया गया।
उपहार के लिए बारिश में भीगते रहे दूल्हा-दुल्हन
आयोजन में व्यवस्थाओं की एक और तस्वीर सामने आई। विवाह की रस्में मुख्य वाटरप्रूफ पंडाल में तो संपन्न हो गईं, लेकिन उपहार वितरण के लिए लगी कतार में दूल्हा-दुल्हन बारिश में भीगते रहे। जिन बेटियों को सम्मान के साथ विदा करने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है, उनके लिए उपहार वितरण की व्यवस्था भी बारिश से बचाव के लिहाज से पर्याप्त नहीं दिखाई दी।
64 हजार नकद, 21 हजार के उपहार और 15 हजार आयोजन पर खर्च

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रति जोड़े पर कुल एक लाख रुपये की सहायता का प्रावधान बताया गया है। इसमें 64 हजार रुपये वधू के खाते में, 21 हजार रुपये गृहस्थी के सामान और उपहार के लिए तथा 15 हजार रुपये आयोजन की व्यवस्थाओं पर खर्च किए जाने का प्रावधान है।
सबसे बड़ा सवाल: जांच किसने की और जवाबदेही किसकी?
सरकारी योजना का उद्देश्य केवल विवाह के नाम पर रस्में पूरी कराना नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को सम्मानजनक ढंग से विवाह का अवसर देना है। ऐसे में आयोजन में शामिल प्रत्येक जोड़े की पात्रता, वैवाहिक स्थिति और दस्तावेजों का सत्यापन बेहद जरूरी है। पहले से विवाहित जोड़ों के दोबारा सम्मेलन में शामिल होने की जानकारी और विवाह की रस्मों में सामने आई अलग-अलग तस्वीरों के बाद प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि लाभार्थियों का चयन किस आधार पर हुआ? क्या सभी जोड़ों का नियमानुसार सत्यापन किया गया था? क्या किसी अपात्र को सरकारी सहायता का लाभ तो नहीं दिया जा रहा?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही मिल सकता है। लेकिन समारोह की तस्वीरें इतना जरूर बताती हैं कि सरकारी योजनाओं में केवल लाभार्थियों की संख्या गिन लेना पर्याप्त नहीं है। असली कसौटी यह है कि योजना का लाभ सही पात्र तक पहुंचे और सरकारी धन का इस्तेमाल अपने घोषित उद्देश्य के अनुरूप हो।
वहीं मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे जैन ने बताया कि जांच के बाद आवश्यक कार्यवाही की जाएगी ।
कानपुर के मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे जैन ने बताया कि ये वर वधु की मर्जी है कि कैसे कपड़े पहनकर वो शादी करना चाहती है लेकिन हिंदू रीति रिवाज के अनुसार आगे से उनको पारम्परिक वेशभूषा में आने को प्रेरित किया जाएगा ।


