स्क्रैप कारोबार पर जीएसटी का शिकंजा, पांच तरह के कबाड़ पर लगेगा टैक्स
एक नवंबर से नई व्यवस्था लागू, खरीद पर दो प्रतिशत टीडीएस कटौती अनिवार्य; अपंजीकृत व्यापारियों से खरीद पर खरीदार को जमा करना होगा जीएसटी
कानपुर। स्क्रैप (कबाड़) कारोबार में कर चोरी रोकने के लिए जीएसटी विभाग ने नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब केवल मेटल स्क्रैप ही नहीं, बल्कि खाद्य तेल, प्लास्टिक, इलेक्ट्रिकल-इलेक्ट्रॉनिक और पुराने टायर के कचरे की खरीद-बिक्री भी टैक्स निगरानी के दायरे में आ गई है। एक नवंबर से लागू व्यवस्था के तहत इन वस्तुओं की खरीद पर दो प्रतिशत जीएसटी टीडीएस काटना अनिवार्य होगा। वहीं, अपंजीकृत कारोबारियों से कबाड़ खरीदने वाले पंजीकृत व्यापारियों को रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (आरसीएम) के तहत अपनी ओर से जीएसटी जमा करना होगा।
नई व्यवस्था से कबाड़ कारोबार में टैक्स संबंधी नियम और सख्त हो जाएंगे। खासकर छोटे कारोबारियों को अब खरीद-बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखने के साथ टैक्स कटौती और रिटर्न संबंधी औपचारिकताएं भी पूरी करनी होंगी।
टैक्स मामलों के अधिवक्ता एवं सलाहकार संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि जीएसटी अधिनियम की धारा 51 के तहत पहले नौ अक्टूबर 2024 की अधिसूचना संख्या 25/2024 के जरिए मेटल स्क्रैप की खरीद पर टीडीएस कटौती का प्रावधान लागू किया गया था। अब केंद्रीय कर की अधिसूचना संख्या 07/2026, दिनांक 27 अक्टूबर 2026 के माध्यम से इसका दायरा बढ़ा दिया गया है।
नई व्यवस्था में इस्तेमाल किया हुआ खाद्य तेल, प्लास्टिक वेस्ट, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट और टायर वेस्ट स्क्रैप को भी शामिल किया गया है। इन वस्तुओं की खरीद पर निर्धारित करयोग्य धनराशि का दो प्रतिशत टीडीएस काटना होगा।
अपंजीकृत विक्रेता से खरीद पर खरीदार की जिम्मेदारी
इस व्यवस्था में रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (आरसीएम) भी महत्वपूर्ण है। यदि कोई पंजीकृत कारोबारी इन वस्तुओं की खरीद किसी अपंजीकृत व्यापारी से करता है तो जीएसटी जमा करने की जिम्मेदारी खरीदार की होगी। उसे अपनी ओर से निर्धारित टैक्स सरकार के खाते में जमा करना पड़ेगा। हालांकि, नियमों के तहत टैक्स भुगतान के बाद वह इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेने का दावा कर सकता है।
जीएसटी सलाहकार एडवोकेट दीपक द्विवेदी का कहना है कि एक जुलाई 2017 को जीएसटी लागू करते समय कारोबार को सरल बनाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन समय के साथ टैक्स संबंधी प्रक्रियाएं और अनुपालन की जिम्मेदारियां बढ़ती गई हैं।
सरकार का मकसद स्क्रैप कारोबार में अपंजीकृत व्यापारियों को टैक्स के दायरे में लाना और राजस्व की चोरी पर अंकुश लगाना है। हालांकि, नई व्यवस्था से छोटे कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्हें अब खरीद-बिक्री का हिसाब रखने, टैक्स जमा करने, रिटर्न दाखिल करने और जरूरी दस्तावेजों को व्यवस्थित रखने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी होगी।


