आजाद समाज पार्टी की रैली के बाद बसपा की तैयारी

आजाद समाज पार्टी की रैली के बाद बसपा की तैयारी

छह दिसंबर को लखनऊ में शक्ति प्रदर्शन कर सकती है बसपा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) छह दिसंबर को राजधानी में बड़ी रैली आयोजित कर सकती है। डॉ. भीमराव आंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर प्रस्तावित इस रैली के जरिए पार्टी अपनी ताकत दिखाने के साथ चुनावी अभियान का औपचारिक आगाज भी कर सकती है। पार्टी के भीतर रैली को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, हालांकि आयोजन के संबंध में अंतिम फैसला बसपा अध्यक्ष मायावती ही लेंगी। सूत्रों के मुताबिक, रैली को मायावती के साथ पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद भी संबोधित कर सकते हैं। विधानसभा चुनाव से पहले बसपा संगठन को मजबूत करने और समर्थकों को एकजुट करने में जुटी है। पार्टी अब तक 100 से अधिक प्रत्याशियों के नाम तय कर चुकी है। ऐसे में प्रस्तावित रैली को आगामी चुनाव की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चर्चा है कि बसपा इस आयोजन में 20 लाख से अधिक समर्थकों को जुटाने की तैयारी कर सकती है। हालांकि, रैली में शामिल होने वाले लोगों की संख्या और आयोजन की रूपरेखा पर अभी आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। राजनीतिक हलकों में इसे प्रदेश में पार्टी की चुनावी सक्रियता बढ़ाने और अपने जनाधार का संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
आजाद समाज पार्टी की रैली के बाद बसपा की तैयारी
राजधानी के रमाबाई आंबेडकर मैदान में 26 नवंबर को आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की रैली प्रस्तावित है। इसमें देशभर से समर्थकों के पहुंचने की संभावना है। इसी आयोजन के बाद बसपा भी अपनी ताकत दिखाने के लिए बड़ी रैली कर सकती है। राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, बसपा का उद्देश्य अपने समर्थकों को संगठित करना और विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की सक्रियता को सामने लाना है। हालांकि, छह दिसंबर की रैली को लेकर अभी अंतिम घोषणा नहीं हुई है। पार्टी नेतृत्व की ओर से तारीख, स्थान और कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी जारी होने के बाद ही आयोजन की स्थिति स्पष्ट होगी।
कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर भी थी रैली की चर्चा
इससे पहले नौ अक्टूबर को बसपा के संस्थापक कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर भी बड़ी रैली आयोजित किए जाने की संभावना जताई जा रही थी। हालांकि, उस दिन मायावती ने केंद्रीय कैंप कार्यालय में कांशीराम को श्रद्धांजलि अर्पित की थी और बड़ी रैली नहीं हुई थी। अब छह दिसंबर को डॉ. भीमराव आंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर संभावित आयोजन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। पार्टी के लिए यह अवसर संगठनात्मक ताकत दिखाने और चुनावी तैयारियों को गति देने का माध्यम बन सकता है। अंतिम निर्णय मायावती के स्तर पर होने के बाद ही रैली की आधिकारिक तस्वीर साफ होगी।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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