डिजिटल आंकड़ों से पकड़ी जाएगी कर चोरी
लखनऊ। त्योहारी सीजन में जीएसटी चोरी और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के जरिए सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाली फर्मों के खिलाफ राज्य कर विभाग ने निगरानी तेज कर दी है। विशेष कार्यबल (एसटीएफ) और विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) की टीमें सक्रिय कर दी गई हैं। इस बार छापेमारी के साथ डेटा एनालिटिक्स, जोखिम आकलन और डिजिटल लेनदेन की पड़ताल के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, नई फर्मों के कारोबार, खरीद-बिक्री, कर भुगतान और आईटीसी दावों में होने वाले असामान्य उतार-चढ़ाव पर विशेष नजर रखी जा रही है। कम समय में करोड़ों रुपये की बिक्री दिखाना, खरीद के मुकाबले कई गुना आईटीसी का दावा करना, माल की वास्तविक आवाजाही के बिना बिल जारी करना और कारोबार के अनुपात में कम कर जमा करना संदेह के प्रमुख संकेत माने जा रहे हैं। लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और मुरादाबाद में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। निगरानी के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर उपलब्ध डिजिटल प्रणालियों तथा विश्लेषणात्मक टूल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। जीएसटी प्राइम एनालिटिकल टूल के माध्यम से जोखिम आधारित जांच, संदिग्ध आईटीसी दावों की पहचान, विभिन्न प्रणालियों के आंकड़ों का मिलान और आपूर्ति शृंखला में सर्कुलर ट्रेडिंग का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत 80 से अधिक रिपोर्ट पर काम चल रहा है। फर्जी फर्मों की पहचान के लिए बिजनेस इंटेलिजेंस एंड फ्रॉड एनालिटिक्स (बीआईएफए) के जरिए पंजीकरण और कारोबार संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। ई-वे बिल एनालिटिक्स से माल की आवाजाही और संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, नए कारोबारियों के संदिग्ध व्यवहार की जांच रिटर्न दाखिल होने से पहले भी की जा सकती है। इसके अलावा एडवैट और जीएआईएन से मिलने वाली खुफिया जानकारी तथा जोखिम संकेतों के आधार पर भी पड़ताल की जा रही है। जोखिम वाले आवेदकों के मामले में आधार बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, फोटो और मूल दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा सकता है। पंजीकरण के दौरान कारोबारी परिसर की जियो-टैगिंग की जा रही है और जरूरत पडऩे पर अधिकारी मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कर रहे हैं। त्योहारी मांग को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन, सोना-चांदी, कपड़े, रेडीमेड गारमेंट, खाद्य तेल, ड्राई फ्रूट और पैकेज्ड सामान के कारोबार में बिलिंग तथा माल की वास्तविक आवाजाही पर भी नजर रखी जा रही है। जीएसटी विभाग संदिग्ध कारोबार की पहचान के लिए विभिन्न डिजिटल प्रणालियों से मिलने वाले आंकड़ों का मिलान कर रहा है। जीएसटी प्राइम एनालिटिकल टूल के जरिए जोखिम वाले मामलों, संदिग्ध आईटीसी दावों और आपूर्ति शृंखला में सर्कुलर ट्रेडिंग की पहचान की जा रही है। बीआईएफए और ई-वे बिल एनालिटिक्स के माध्यम से फर्मों के पंजीकरण, कारोबार और माल की आवाजाही से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है। इन प्रणालियों से वास्तविक कारोबार और दर्ज किए गए लेनदेन के बीच अंतर सामने लाने में मदद मिलेगी।
इन कारोबारों पर रहेगी विशेष नजर
त्योहारी सीजन में इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन, सोना-चांदी, कपड़े, रेडीमेड गारमेंट, खाद्य तेल, ड्राई फ्रूट और पैकेज्ड सामान की मांग बढऩे के कारण इन क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है। अधिकारी बिलों, ई-वे बिल और माल की वास्तविक आवाजाही का मिलान करेंगे। संदिग्ध फर्मों के पते, दस्तावेजों और कारोबारी परिसर का सत्यापन भी किया जा सकता है। घोषित बिक्री, कर देनदारी और आईटीसी दावों में अंतर मिलने पर जांच की जाएगी, ताकि बिना वास्तविक खरीद-बिक्री के कर क्रेडिट लेने वाले नेटवर्क का पता लगाया जा सके।


