मोदी 50 मिनट में 19 बार बोले-वी विल डू इट
कहा- भारत के विकसित होने तक न थकूंगा, न रुकूंगा, बतौर पीएम-सीएम 25 साल पूरे, रिकॉर्ड बनाया
नई दिल्ली/वडनगर। ‘वी विल डू इट… हम करके दिखाएंगे।’ पीएम मोदी ने बुधवार को अपने सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में इस नारे का 19 बार जिक्र किया। उन्होंने एक घंटे की स्पीच में कहा, ‘जब तक भारत विकसित नहीं होता, तब तक न थकूंगा, न रुकूंगा।’
उन्होंने कहा, ‘मैं महत्वाकांक्षा नहीं, मिशन के लिए जीता हूं। जिसने मुझे गिराया, उसी ने खड़ा होना सिखाया। जिसने मेरा विरोध किया, उसने लोकतंत्र की शक्ति समझाई।’
उन्होंने कहा कि 25 साल पीछे मुड़कर देखने पर उपलब्धियों से ज्यादा कृतज्ञता का भाव आता है। हर घटना ने कुछ सिखाया और नम्र होना सिखाया। उन्होंने ईश्वर से यही मांगा कि सीखने की इच्छा कभी कम न हो।
पीएम ने 6 लक्ष्यों के लिए कहा- वी विल डू इट को
मोदी ने “वी विल डू इट” को देश के भविष्य के बड़े लक्ष्यों और संकल्पों से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत के सामने आने वाले वर्षों में कई बड़े लक्ष्य हैं और इन्हें हासिल करने के लिए आत्मविश्वास, सामूहिक प्रयास और लगातार मेहनत जरूरी है।
मोदी बोले- ये समय आराम का नहीं है
पीएम ने कहा, “हर चीज में भारत सिरमौर है। टेक्नोलॉजी, खेल, उद्योग में भारत का तिरंगा लहराए। आज पूरे विश्व में भारत के पायलट की चर्चा है। एक दिन वो भी आएगा, जब दुनिया मेड इन इंडिया प्लेन की चर्चा करेगी। ये लक्ष्य तभी पूरे होंगे, जब हम दूरदर्शी नीतियां बनाएं और परिश्रम की पराकाष्ठा करें।”
उन्होंने कहा, ” अब ये समय आराम का नहीं है। ये समय सोच के साथ आगे बढ़ने का है। देश के लिए खुद को खपा देने का है। आज भारत में जितने युवा हैं, वो इतिहास से मिला बहुत बड़ा मौका है, जिसे हमें गंवाना नहीं है।”
मोदी बोले- कई विभीषिकाएं, लेकिन कभी साहस नहीं टूटा
पीएम ने कहा, “हमारे दिल की हर धड़कन में क्या एक ही संकल्प नहीं गूंजना चाहिए कि हमें प्राचीन भारत के गौरव को पुनर्जीवित करना है। कभी भारत विश्व की अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करता था। समय का चक्र बदला, गुलामी का कालखंड आया, भारत को लूटकर तबाह कर दिया गया। जो भारत दुनिया को दिशा दिखाता था, उसके पुस्तकालय जला दिए गए। छोटे-छोटे संकट विकराल होने लगे। अकाल, कई विभीषिकाएं, लेकिन तब भी मां भारती की संतानों का साहस नहीं टूटा।”
मोदी बोले- 2015-25 के दशक में खेती की वृद्धि दर सबसे ज्यादा
पीएम मोदी ने कहा, “आज मेड इन इंडिया फोन का जलवा है। कभी भारत में ब्लैकआउट हेडलाइन बनती थी, आज सोलर पावर के चर्चे होते हैं। आज खेती का उदाहरण भी है। आजादी के बाद खेती के बढ़ने की दर किसी दशक में रही तो 2015-25 के दशक में सबसे ज्यादा रही।”
मोदी बोले- 2014 में देश निराशा में डूबा था, कई चुनौतियां थी
पीएम मोदी ने कहा, “जब गुजरात पहुंचा तो प्रशासनिक व्यवस्था का ज्यादा ज्ञान नहीं था, तब सिर्फ जनशक्ति का भरोसा था। इसी विश्वास को मैंने अपना सामर्थ्य बनाया। मैंने जनता को साथ लेकर निर्णय लिए, नीतियां बनाई और इन्हें लागू किया। यही मंत्र- वी विल डू इट…जब जनता साथ हो तो परिणाम ही आते हैं। गुजरात ने करके दिखाया।”
पीएम मोदी ने कहा, “तब विकराल चुनौतियां मुंह बाए खड़ी थीं। देश का हर नागरिक नया रास्ता खोज रहा था। भारत की इकोनॉमी को लेकर दुनिया कहने लगी थी- इट्स अ गॉन केस। तब कोई ज्योत दिखती नहीं थी। निराशा में डूबे देश को आशा की जरूरत थी।
उन्होंने कहा, “मैंने वही काम किया, जो मुझे आता था। मैंने लोगों के साथ मिलकर काम किया और उनके साथ मिलकर फिर दोहराया- वी विल डू इट। अब तस्वीर बदल गई है।”
मोदी बोले- 25 साल में देश कहां पहुंचा, ये अहम
पीएम मोदी ने कहा, “हमने इस राष्ट्र में जन्म लिया है, ये एहसास ही अमृत है। इसके सामने सत्ता सुख कुछ नहीं है। पद-प्रतिष्ठा तो कहीं भी मिल सकता है, लेकिन भारत जैसी पुण्यभूमि नहीं मिलेगी। वो भारत, जिसने अंधकार के युग में भी मानवता को ज्ञान दिया, मूल्यों का प्रकाश दिया, उसकी सेवा का मौका अमूल्य है। 25 सालों का आकलन इससे नहीं होगा कि मैं कहां पहुंचा, बल्कि इससे होगा कि मेरा देश कहां पहुंचा।”
मोदी बोले- कर्म देश के लिए साधना है
पीएम ने कहा, “जीवन का एक ही ध्येय था, देश के लिए निस्वार्थ कर्म। मेरे लिए कर्म ही सबकुछ है। कर्म ही मेरा धर्म है। गीता ने हमें सिखाया है कर्मण्ये वाधिकारस्ते, मैं कर्म को अपना धर्म मानता हूं। हर कर्म पूरी क्षमता से करता रहूं।”
मोदी बोले- मैं मिशन के लिए जीने वाला इंसान
मोदी ने नारा लगवाया, “विकसित भारत बाय 2047, वी विल डू इट। तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी- वी विल डू इट। आत्मनिर्भर भारत- वी विल डू इट, ओलिंपिक्स का आयोजन- वी विल डू इट, अंतरिक्ष में कदम- वी विल डू इट। ये ऊर्जा, ये आत्मविश्वास अद्भुत है। जहां ये बातें लहू बनकर दौड़ती हैं, उन्हें कोई रोक नहीं सकता। 25 वर्षों की ये यात्रा, लोग इसे उपलब्धि मानते हैं।”
उन्होंने कहा, “मेरे काम संगठन का काम करने वाले का ही था। मैंने चुनाव लड़ाए थे, लेकिन एक भी चुनाव लड़ा नहीं था। चुनावी राजनीति में चमकने की चाहत होती तो बहुत पहले ही मैदान में उतर सकता था, लेकिन ये मेरा मिजाज नहीं था। मेरा क्या होगा, ये सोचा ही नहीं। बाल्यकाल से जो शिक्षा मिली, मैं एंबीशन नहीं, मिशन के लिए जीने वाला इंसान रहा हूं।”

