‘आजकल तेरे-मेरे प्यार के चर्चे.. पर झूमे विद्यार्थी, तालियों से गूंजा एम्फिथिएटर
कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के यूआईईटी स्थित ओपन एम्फिथिएटर में गुरुवार रात रेट्रो दौर की यादें संगीत और नृत्य के साथ जीवंत हो उठीं। विश्वविद्यालय के म्यूजिक विभाग की ओर से Retroverse ’26 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने 1970, 1980 और 1990 के दशक के भारतीय सिनेमा और लोकप्रिय संगीत को अपनी प्रस्तुतियों के जरिए मंच पर उतारा।
कार्यक्रम में पुराने फिल्मी गीतों की धुनों पर विद्यार्थियों ने गायन और नृत्य की शानदार प्रस्तुतियां दीं। खासकर ‘आजकल तेरे-मेरे प्यार के चर्चे हर जुबान पर’ गीत पर विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। प्रस्तुति के दौरान पूरा एम्फिथिएटर तालियों से गूंज उठा।
कार्यक्रम में कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक और उनकी पत्नी डॉ. वंदना पाठक मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। पुराने दौर के गीतों और लाइव संगीत ने कार्यक्रम में रेट्रो सिनेमा की यादों को ताजा कर दिया।
एकल और युगल प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम की शुरुआत ग्रुप सॉन्ग और ग्रुप डांस से हुई। इसके बाद म्यूजिक विभाग के विद्यार्थियों ने एकल और युगल प्रस्तुतियों के जरिए रेट्रो दौर के लोकप्रिय गीतों को अपनी आवाज में पेश किया।
वैष्णवी सक्सेना ने ‘पिया तोसे नैना लागे रे’, आदर्श शुक्ला ने ‘लिखे जो खत तुझे’, सरस्वती ने ‘ये दिल तुम बिन’ और लक्ष्मी ने ‘चलते-चलते यहीं कोई मिल गया था’ गीत प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों में विद्यार्थियों ने पुराने दौर के गीतों की भावनात्मक गहराई और गायकी की शैली को मंच पर जीवंत करने का प्रयास किया।
इसके बाद मैविश ने ‘तड़पते तड़पाते’ और रुद्राक्ष ने ‘क्या हुआ तेरा वादा’ पेश किया। कृतिका जायसवाल ने ‘तूने ओ रंगीले’, तनिष्का ने ‘तू इस तरह से’ और गुरप्रीत ने ‘मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा’ गीत सुनाकर दर्शकों की वाहवाही बटोरी।
पुलकित और कृतिका की युगल प्रस्तुति ‘एक हसीना थी’ भी कार्यक्रम के आकर्षण का केंद्र रही। गीतों के साथ विद्यार्थियों के भाव और मंचीय प्रस्तुति ने दर्शकों को पुराने फिल्मी दौर की याद दिला दी।
गायन के साथ वाद्ययंत्रों की लाइव संगत
कार्यक्रम की खासियत यह रही कि प्रस्तुतियां केवल गायन तक सीमित नहीं रहीं। विद्यार्थियों ने कीबोर्ड, तबला, गिटार, ड्रम, कोंगो और अन्य वाद्ययंत्रों के साथ लाइव संगीत संगत दी। इससे प्रस्तुतियों में जीवंतता बढ़ गई और दर्शकों को रेट्रो गीतों का संगीतात्मक अनुभव मंच पर ही मिला।
लाइव वादन के दौरान विद्यार्थियों ने गीतों की धुन, लय और ताल के साथ बेहतरीन सामंजस्य बनाया। एक के बाद एक प्रस्तुति के साथ विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ता गया और दर्शक भी तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन करते रहे।
कार्यक्रम के दौरान 70 से 90 के दशक के गीतों और संगीत को नई पीढ़ी के विद्यार्थियों ने अपनी शैली में प्रस्तुत किया। इससे रेट्रो संगीत और वर्तमान पीढ़ी के बीच एक खूबसूरत सेतु भी देखने को मिला।

