बर्रा-6 में कब्रिस्तान के कथित अतिक्रमण पर चला KDA का बुलडोजर
भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई, बाउंड्री और चबूतरे ध्वस्त; मुस्लिम पक्ष ने नोटिस को लेकर उठाए सवाल
कानपुर। बर्रा-6 क्षेत्र में शनिवार सुबह कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) की टीम ने सरकारी जमीन पर बने कब्रिस्तान के कथित अतिक्रमण के खिलाफ ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। भारी पुलिस बल और पीएसी की मौजूदगी में बुलडोजर से कब्रिस्तान की बाउंड्री और कब्रों के ऊपर बनाए गए चबूतरे समेत अन्य निर्माण ढहा दिए गए। कार्रवाई के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विरोध और हंगामा किया, लेकिन पुलिस बल की मौजूदगी में अभियान जारी रहा।
KDA अधिकारियों के मुताबिक, ग्राम बरी की आराजी संख्या-314 से जुड़ी करीब तीन हजार वर्गमीटर सरकारी जमीन पर लंबे समय से कब्जा कर कब्रिस्तान का निर्माण किया गया था। अधिकारियों का दावा है कि करीब 30 से 35 वर्षों से जमीन पर कब्जा था। मेट्रो लाइन के निर्माण के दौरान मामला सामने आने के बाद जमीन के दस्तावेजों की जांच कराई गई।
दो से तीन घंटे में जमीन कराई कब्जामुक्त
शनिवार सुबह KDA की टीम पुलिस और पीएसी के साथ मौके पर पहुंची। बुलडोजर से बाउंड्री वॉल और कब्रों के ऊपर बने चबूतरों को हटाया गया। KDA का कहना है कि कार्रवाई के दौरान किसी कब्र को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। करीब दो से तीन घंटे तक चले अभियान के बाद जमीन को कब्जामुक्त कराने का दावा किया गया।
यह जमीन नेशनल हाईवे से जुड़ी है और हाईवे से शास्त्री चौक जाने वाले मार्ग पर स्थित है। कार्रवाई से पहले KDA ने पुलिस विभाग से पर्याप्त सुरक्षा बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।
विरोध के बीच चलता रहा बुलडोजर
कार्रवाई शुरू होते ही मुस्लिम कब्रिस्तान कमेटी से जुड़े लोगों समेत बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। लोगों ने KDA की कार्रवाई का विरोध किया और इसे गलत बताया। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने उन्हें बताया कि जमीन KDA की है और नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
इसके बाद पुलिस और पीएसी की मौजूदगी में बुलडोजर से निर्माण हटाने का काम जारी रहा। भारी सुरक्षा व्यवस्था के कारण विरोध के बावजूद अभियान को रोका नहीं गया।
नोटिस जारी करने का KDA का दावा
KDA के ओएसडी सत शुक्ला के मुताबिक, जोन-3 के भूमि बैंक अनुभाग की ओर से संबंधित पक्ष को उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973 की धारा 26(क)(4) के तहत नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में जमीन और निर्माण के संबंध में पक्ष रखने को कहा गया था।
KDA अधिकारियों के अनुसार, जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की गई।
मुस्लिम पक्ष बोला- पर्याप्त समय नहीं मिला
मुस्लिम पक्ष से जुड़े मोहम्मद इकराम ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पुराना कब्रिस्तान है और वहां कब्रें मौजूद हैं। उनका कहना है कि मेट्रो लाइन के निर्माण के दौरान उन्होंने अधिकारियों का सहयोग किया था।
इकराम का आरोप है कि उन्हें कार्रवाई से पहले पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उनका दावा है कि नोटिस मिलने के तुरंत बाद ही ध्वस्तीकरण कर दिया गया और उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर नहीं मिला। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर हाईकोर्ट और कानपुर सिविल कोर्ट में मामला विचाराधीन है।
उन्होंने कहा कि आगे की कार्रवाई के लिए वे कानूनी और संवैधानिक रास्ता अपनाएंगे।

