अब ऑनलाइन मिलेगा बालिका गृह की बेटियों के हाथों बना खाना

अब ऑनलाइन मिलेगा बालिका गृह की बेटियों के हाथों बना खाना

15 किशोरियां चलाएंगी क्लाउड किचन, अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होगी डिलीवरी; कमाई बराबर बांटी जाएगी
कानपुर। राजकीय बालिका गृह स्वरूप नगर में पुनर्वास के लिए रह रही अपराध पीड़ित बेटियां अब आत्मनिर्भरता की नई राह पर कदम बढ़ाने जा रही हैं। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से इन बेटियों के हाथों तैयार किया गया खाना ऑनलाइन ऑर्डर कर घर या कार्यालय में मंगाया जा सकेगा। इसके लिए क्लाउड किचन लगभग तैयार हो चुका है। करीब पांच लाख रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे किचन में फिलहाल फिनिशिंग का काम बाकी है।
इस क्लाउड किचन में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त 15 किशोरियां खाना तैयार करेंगी। ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियों के माध्यम से लोग यहां से खाना मंगा सकेंगे। निर्धारित समय में ऑर्डर की डिलीवरी की जाएगी। खाने की गुणवत्ता और स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।
कमाई किशोरियों में बराबर बांटी जाएगी
क्लाउड किचन से होने वाली आय को प्रशिक्षित किशोरियों के बीच बराबर-बराबर बांटा जाएगा। इसका उद्देश्य उन्हें हुनर के साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
राजकीय बालिका गृह में अपराध पीड़ित किशोरियों को रखा जाता है। यहां उनकी पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें भविष्य के लिए आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी प्रशिक्षण दिया जाता है। स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से उन्हें सिलाई, कढ़ाई सहित विभिन्न हुनर सिखाए जाते हैं।
न्याय समिति के निर्देश पर शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट
किशोर न्याय समिति के अध्यक्ष जस्टिस अजय भनोट ने प्रोबेशन विभाग को इन किशोरियों को प्रशिक्षित रसोइया बनाने और क्लाउड किचन के माध्यम से भोजन बिक्री का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के निर्देश दिए थे। इसी के तहत प्रोबेशन विभाग ने यह पहल शुरू की है।
क्लाउड किचन को आचिन्तय चैरिटेबल फाउंडेशन की ओर से तैयार कराया जा रहा है। फाउंडेशन ही इसके संचालन में भी सहयोग करेगा।
होटल मैनेजमेंट संस्थान ने दिया प्रशिक्षण
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट के शिक्षकों ने 15 किशोरियों को खाना बनाने और रसोई संचालन का प्रशिक्षण दिया है। प्रशिक्षण के दौरान भोजन तैयार करने, स्वच्छता और रसोई से जुड़े जरूरी पहलुओं की जानकारी दी गई।
फाउंडेशन की निदेशक दिशा अरोड़ा ने बताया कि बालिका गृह में पहले से अतिरिक्त किचन था। इसे मौजूदा जरूरतों के अनुसार क्लाउड किचन के रूप में तैयार किया गया है। किचन के लिए बर्तन और अन्य आवश्यक सामान उपलब्ध कराने के लिए भी धनराशि दी जाएगी।
यह पहल किशोरियों को केवल प्रशिक्षण देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनके हुनर को रोजगार और आय के अवसर से जोड़ने का प्रयास भी होगी।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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