डिजिटल अरेस्ट कर 72 वर्षीय बुजुर्ग से 48.20 लाख की ठगी, साइबर ठगों ने CBI-इंटरपोल अधिकारी बनकर डराया
कानपुर। स्वरूप नगर में साइबर ठगों ने 72 वर्षीय बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर 48.20 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने खुद को टेलीकॉम अथॉरिटी ऑफ इंडिया, सीबीआई, मुंबई क्राइम ब्रांच और इंटरपोल का अधिकारी बताकर बुजुर्ग को गंभीर अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी दी। फर्जी दस्तावेज भेजकर उन्हें गिरफ्तारी और जेल जाने का डर दिखाया गया। जांच के नाम पर रकम बताए गए बैंक खाते में आरटीजीएस करा ली गई। पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
10 सितंबर को आया था फोन
शयनिका अपार्टमेंट निवासी योगेश चंद्र मिश्रा के मोबाइल पर 10 सितंबर को एक कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को टेलीकॉम अथॉरिटी का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार से लिंक मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मुंबई के तिलक नगर में धमकी भरी कॉल करने, अश्लील सामग्री भेजने और अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया गया है।
इसके बाद रवि शर्मा नाम के व्यक्ति ने व्हाट्सऐप पर इंटरपोल और सीबीआई से जुड़े बताए गए दस्तावेज भेजे। कुछ देर बाद कॉल को अलग-अलग लोगों को ट्रांसफर कर दिया गया। इससे बुजुर्ग को लगा कि वह वास्तव में किसी बड़ी जांच में फंस गए हैं।
घर में ही पूछताछ का झांसा
ठगों ने योगेश की उम्र अधिक होने का हवाला देते हुए कहा कि उनसे घर पर ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूछताछ की जाएगी। इसके बाद उन्हें डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया गया। ठगों ने नरेश गोयल के खिलाफ हुई कार्रवाई से जुड़े बताए गए दस्तावेज भी दिखाए। इनमें योगेश का आधार नंबर और उनके बैंक खाते में करीब 40 लाख रुपये होने की जानकारी दर्ज होने का दावा किया गया।
लगातार धमकियों और फर्जी दस्तावेजों के जरिए ठगों ने उन्हें विश्वास दिला दिया कि उनका बैंक खाता किसी गंभीर अपराध से जुड़ी जांच के दायरे में है।
24 से 72 घंटे में रकम लौटाने का दिया भरोसा
ठगों ने कहा कि बैंक खाते की जांच के लिए रकम उनके बताए बैंक खाते में आरटीजीएस करनी होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद 24 से 72 घंटे के भीतर पूरी रकम वापस कर दी जाएगी।
ठगों के झांसे में आकर योगेश चंद्र मिश्रा ने स्वरूप नगर स्थित स्टेट बैंक के अपने खाते से 48.20 लाख रुपये बैंक ऑफ इंडिया के बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। रकम भेजने के बाद भी ठगों की गतिविधियां जारी रहीं, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ।
साइबर थाने में एफआईआर
मामले की शिकायत साइबर थाने में की गई है। साइबर थाना प्रभारी अभय सिंह ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। रकम जिन खातों में ट्रांसफर की गई, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही आरोपियों की पहचान और उनसे जुड़े साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी सरकारी एजेंसी का अधिकारी फोन या वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट करने, बैंक खाते में रकम ट्रांसफर कराने या जांच के नाम पर पैसे जमा कराने का अधिकार नहीं रखता। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय तत्काल कॉल काटकर संबंधित विभाग और साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।

