घर छोड़ने वाली किशोरियों और महिलाओं की होगी मॉनीटरिंग, IIT कानपुर के साथ पुलिस ने किया MOU
घर छोड़ने वाली किशोरियों और महिलाओं की होगी मॉनीटरिंग, IIT कानपुर के साथ पुलिस ने किया MOU
कानपुर देहात से अभियान की शुरुआत, काउंसलिंग में सामने आए घर छोड़ने के अलग-अलग कारण; एक साल तक पीड़िताओं के साथ काम करेगी पुलिस और IIT की टीम
कानपुर। बिना बताए घर छोड़ने वाली किशोरियों, युवतियों और महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों को कम करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कानपुर जोन पुलिस और IIT कानपुर ने गुरुवार को एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत घर से निकलने के बाद वापस लौटने वाली किशोरियों, युवतियों और महिलाओं की मॉनीटरिंग के साथ उनकी काउंसलिंग की जाएगी। पुलिस की ओर से जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। अभियान की शुरुआत कानपुर देहात से की गई है।
297 किशोरियों और महिलाओं की हुई काउंसलिंग
एडीजी जोन अनुपम कुलश्रेष्ठ ने बताया कि मुख्यमंत्री ने घर छोड़ने वाली किशोरियों, युवतियों और महिलाओं के मूल कारणों का पता लगाने और उन कारणों पर काम करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में IIT कानपुर के डिप्टी डायरेक्टर ब्रिज भूषण से संपर्क किया गया।
उनकी मदद से कानपुर देहात में ऐसी 297 किशोरियों, युवतियों और महिलाओं की काउंसलिंग की गई, जो बिना बताए घर से निकल गई थीं। काउंसलिंग के दौरान घर छोड़ने के पीछे अलग-अलग उम्र वर्ग के अलग-अलग कारण सामने आए।
किशोरियों में गुस्सा और खतरे का अंदाजा न होना प्रमुख कारण
काउंसलिंग में सामने आया कि 13 से 15 वर्ष की किशोरियों के घर से निकलने के पीछे मुख्य रूप से गुस्सा और खतरे का अनुमान न लगा पाना कारण रहा। वहीं 15 से 25 वर्ष की युवतियों में बेहतर जीवन जीने की चाह और फैसले के परिणामों का सही आकलन न कर पाना प्रमुख कारण सामने आया।
इसके अलावा 25 वर्ष से अधिक उम्र की युवतियों और महिलाओं के घर छोड़ने के पीछे घरेलू हिंसा और डांट जैसे कारण सामने आए। कई मामलों में तलाश किए जाने तक उनके साथ अपराध भी हो चुका था।
एक साल तक साथ काम करेगी पुलिस और IIT की टीम
एडीजी ने बताया कि IIT कानपुर के रिसर्च एंड डेवलपमेंट के डीन प्रोफेसर जयनधरन जी राव और उनकी टीम के साथ पुलिस एक साल तक पीड़िताओं के साथ काम करेगी। इसमें IIT के स्टार्टअप क्यूट ब्रेन प्राइवेट लिमिटेड का भी सहयोग लिया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य केवल घटना के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि घर छोड़ने के पीछे छिपे कारणों को समझकर उन्हें दूर करना है। इसके साथ ही पुलिस के प्रति जनता के नजरिये में भी सकारात्मक बदलाव लाने पर काम किया जाएगा।
अलग-अलग आयु वर्ग के लिए अलग रणनीति
गुस्से या प्रेम प्रसंग के कारण घर छोड़ने वाली किशोरियों और युवतियों के लिए हल्के-फुल्के संदेशों के साथ व्यवहारिक और सोचने-समझने की क्षमता बढ़ाने वाली कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
वहीं झगड़े या विवाहोत्तर संबंधों के चलते घर छोड़ने वाली महिलाओं के लिए गोपनीय कार्यशालाएं आयोजित कर उन्हें परिस्थितियों से निपटने और जिम्मेदार निर्णय लेने के लिए तैयार किया जाएगा। पुलिस और IIT की टीम काउंसलिंग के जरिए यह समझने का प्रयास करेगी कि ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से कैसे रोका जा सकता है।

