फॉर्च्यूनर से ड्यूटी, हाथ में झाड़ू… कभी 50 रुपये थी दिहाड़ी, मेहनत से बदली जिंदगी
फॉर्च्यूनर से ड्यूटी, हाथ में झाड़ू… कभी 50 रुपये थी दिहाड़ी, मेहनत से बदली जिंदगी
बंटवाल (कर्नाटक)। आमतौर पर सफाईकर्मी को हाथ में झाड़ू और काम के दौरान साधारण वाहन के साथ देखा जाता है, लेकिन कर्नाटक के बंटवाल में एक सफाईकर्मी इन दिनों अपने अलग अंदाज के चलते सोशल मीडिया पर चर्चा में है। करीब तीन दशक से सफाई का काम कर रहे सेसप्पा रोजाना ड्यूटी पर टोयोटा फॉर्च्यूनर से पहुंचते हैं। गाड़ी से उतरते हैं, झाड़ू उठाते हैं और फिर सड़क की सफाई में जुट जाते हैं। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग उनकी कहानी जानने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
नवूर के रहने वाले सेसप्पा बंटवाल नगरपालिका में सफाईकर्मी के तौर पर काम करते हैं। बताया जाता है कि बीसी रोड इलाके में सड़क की सफाई उनकी नियमित ड्यूटी का हिस्सा है। सुबह वह अपनी फॉर्च्यूनर से ड्यूटी स्थल पर पहुंचते हैं। वाहन को एक तरफ खड़ा करने के बाद हाथ में झाड़ू लेकर सफाई शुरू कर देते हैं। करीब 30 साल से उनकी दिनचर्या में बहुत कुछ नहीं बदला है, बदला है तो सिर्फ ड्यूटी पर पहुंचने का वाहन।
कभी 50 रुपये थी दिहाड़ी
सेसप्पा की कहानी सिर्फ महंगी गाड़ी तक सीमित नहीं है। उनके संघर्ष का दौर काफी कठिन रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने अपने कामकाजी जीवन की शुरुआत महज 50 रुपये रोज की दिहाड़ी से की थी। आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि एक समय पिता के अंतिम संस्कार तक के लिए पैसे जुटाना मुश्किल हो गया था। लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने स्थायी नौकरी हासिल की और धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति मजबूत होती गई।
छोटी गाड़ियों से फॉर्च्यूनर तक का सफर
गाड़ियों के शौकीन सेसप्पा ने समय के साथ अपनी आर्थिक स्थिति के मुताबिक वाहन बदले। रिपोर्टों के अनुसार उनके पास पहले मारुति 800, ऑल्टो और स्कॉर्पियो जैसी गाड़ियां रही हैं। बाद में उन्होंने सेकंड हैंड टोयोटा फॉर्च्यूनर खरीदी। इसके लिए उन्होंने वर्षों की मेहनत, अतिरिक्त काम और कर्ज का भी सहारा लिया। उनके लिए यह वाहन सिर्फ शौक नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष के बाद हासिल की गई उपलब्धि का प्रतीक है।
गाड़ी देखकर लोग चौंकते हैं, झाड़ू देखकर कहानी समझ आती है
फॉर्च्यूनर से सफाईकर्मी के ड्यूटी पर पहुंचने का वीडियो सामने आने के बाद कई लोग हैरान रह गए। लोगों को सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाली बात यह रही कि महंगी एसयूवी से उतरने के बाद सेसप्पा किसी अधिकारी की तरह नहीं, बल्कि रोज की तरह झाड़ू लेकर सफाई में जुट जाते हैं।
उनकी कहानी इस बात की मिसाल बन गई है कि काम छोटा-बड़ा नहीं होता, मेहनत और ईमानदारी इंसान की पहचान बनाती है। बंटवाल नगरपालिका के अधिकारियों ने भी उनके समर्पण और मेहनत की सराहना की है।
करीब 30 साल से नहीं छोड़ा अपना काम
सेसप्पा की उम्र करीब 45 वर्ष बताई गई है और वह लंबे समय से सफाईकर्मी के रूप में काम कर रहे हैं। आर्थिक स्थिति बेहतर होने के बावजूद उन्होंने अपना काम नहीं छोड़ा। आज भी वह तय समय पर ड्यूटी पर पहुंचते हैं और सड़क की सफाई करते हैं। फॉर्च्यूनर उनके जीवन में आए बदलाव की तस्वीर जरूर दिखाती है, लेकिन हाथ में झाड़ू यह बताती है कि उन्होंने अपनी मेहनत और पेशे से दूरी नहीं बनाई।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही उनकी तस्वीर और वीडियो को लोग इसी वजह से प्रेरणादायक बता रहे हैं। कभी 50 रुपये की दिहाड़ी से जिंदगी शुरू करने वाले सेसप्पा का फॉर्च्यूनर तक पहुंचने का सफर मेहनत, संघर्ष और आत्मनिर्भरता की कहानी बन गया है।

