रिपोर्ट-एसआईआर पर 2 चुनाव आयुक्तों ने 14 बार आपत्ति जताई
राहुल ने कहा- वोट चोरी संविधान के खिलाफ, इसमें शामिल किसी को नहीं बख्शेंगे
नई दिल्ली। वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद की रिपोर्ट सामने आने के बाद अब आयोग के सूत्रों ने सफाई दी है।
सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयुक्त किसी मुद्दे पर विचार के दौरान सवाल उठा सकते हैं, स्पष्टीकरण मांग सकते हैं या अपनी टिप्पणी दे सकते हैं, लेकिन ऐसी टिप्पणी को औपचारिक असहमति यानी डिसेंट नहीं माना जा सकता। उधर, राहुल गांधी ने एक वीडियो जारी कर वोट चोरी को राजद्रोह बताया।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एसआईआर प्रक्रिया पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। इनमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और चुनावी प्रक्रियाओं में बदलाव को लेकर सवाल उठाए गए थे।
विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियएं…
राहुल गांधी- मैं इलेक्शन कमीशन और इलेक्शन ऑफिसर्स को साफ कह रहा हूं कि आप जो कर रहे हो गलत कर रहे हो। ये राजद्रोह है, देश के खिलाफ है। टाइम आएगा। हम आपको पकड़ेंगे। बचने वाले नहीं हो।
अखिलेश यादव- सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं। एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और खतरनाक हालात हैं। कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है। ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है। सुप्रीम कोर्ट स्वत: संज्ञान ले।
आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज- सभी विपक्षी दलों को पहले चुनाव आयोग से जुड़े इस मुद्दे को उठाना चाहिए और आयोग को व्यवस्थित करने पर ध्यान देना चाहिए।
ममता टीएमसी की राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष- एसआईआर की खामियों और अव्यवस्था’ की जिम्मेदारी मुख्य चुनाव आयुक्त की है। किसके निर्देश पर नागरिकों को कथित तौर पर मताधिकार से वंचित किया जा रहा है।
ज्ञानेश कुमार को हटाने का पुराना मामला
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पहले भी उठ चुकी है। अप्रैल 2026 में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया था कि विपक्ष के 73 राज्यसभा सांसदों ने उनके खिलाफ नोटिस दिया है। इसमें ‘साबित कदाचार’ का आरोप लगाया गया था।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की थी। उन्होंने एसआईआर के दौरान वास्तविक मतदाताओं के प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की थी।
इससे पहले लोकसभा में भी ऐसा प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने प्रस्ताव खारिज कर दिया था।
10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हुआ एसआईआर
एसआईआर के पहले और दूसरे फेज में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। एसआईआर के बाद बिहार, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और असम विधानसभा चुनाव में भाजपा जीती है। केरल में कांग्रेस गठबंधन और तमिलनाडु में टीवीके ने जीत हासिल की है। असम में स्पेशल रिवीजन (एसआर) हुआ। यहां भी भाजपा सरकार की वापसी हुई।
तीसरा फेज: दिल्ली, महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों में एसआईआर
चुनाव आयोग ने 14 मई को हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (एसआईआर) की घोषणा की थी। यह एसआईआर का तीसरा फेज है। पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन हो रहा है। जिन राज्यों में एसआईआर होगा, उनमें पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। अन्य 13 राज्यों में 2028 और 2029 में चुनाव होंगे।

