नन्हे आरव की पहली दिवाली देखने की हसरत रह गई अधूरी, मां-दादी के साथ दुनिया से विदा

जिस घर में 20 दिन पहले गूंजी थी किलकारी, वहां दिवाली की सुबह मच गई चीख-पुकार; बच्चे को बचाने के लिए मां ने सीने से लगाया, लेकिन नहीं बचा सकी जान

कानपुर। दिवाली का त्योहार था। घरों में दीप जलाने और खुशियां मनाने की तैयारियां चल रही थीं। पनकी पड़ाव के शुक्ला परिवार के लिए इस बार की दिवाली बेहद खास थी। घर में 20 दिन पहले ही नन्हा मेहमान आया था। दादी विनोदनी पोते को गोद में खिलाने के सपने संजो रही थीं तो मां अंशिका अपने लाल की पहली दिवाली को यादगार बनाने की तैयारी में थी। लेकिन किसे पता था कि त्योहार की सुबह ही परिवार की खुशियां हमेशा के लिए उजड़ जाएंगी। रविवार सुबह अचानक मकान की छत भरभराकर गिर गई। मलबे में दबकर दादी, मां और 20 दिन के मासूम आरव की मौत हो गई, जबकि पिता हर्ष घायल हो गए।

मां की ममता ने आखिरी सांस तक नहीं छोड़ा साथ

हादसा रविवार सुबह करीब 8:30 से 9 बजे के बीच पनकी थाना क्षेत्र के पनकी पड़ाव में हुआ। उस वक्त हर्ष अपनी मां विनोदनी के साथ कमरे में कुर्सी पर बैठकर बातचीत कर रहा था। पत्नी अंशिका अपने 20 दिन के बेटे आरव को दूध पिला रही थी। परिवार के दूसरे सदस्य अवधेश और राजू दूसरे कमरे में थे।

इसी दौरान अचानक बांस-बल्लियों और मिट्टी से बनी कमरे की छत भरभराकर गिर पड़ी। छत का मलबा सीधे कमरे में मौजूद लोगों पर आ गिरा। विनोदनी के सिर में गंभीर चोट आई, जबकि अंशिका और उसका नवजात बेटा मलबे में दब गए। हर्ष किसी तरह बच गया और उसे मामूली चोटें आईं।

चीख-पुकार सुनकर दूसरे कमरे से अवधेश और राजू दौड़कर पहुंचे। आसपास के लोग भी मदद के लिए जुट गए। सभी ने मिलकर मलबा हटाया। जब अंशिका को बाहर निकाला गया तो वह पेट के बल पड़ी थी और उसका मासूम बेटा उसके नीचे दबा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अंशिका ने अपने बच्चे को बचाने के लिए उसे सीने से लगाकर कसकर पकड़ रखा था। मां ने आखिरी वक्त तक अपने लाल को बचाने की कोशिश की, लेकिन दोनों की जान नहीं बच सकी।

20 दिन पहले घर में आई थी खुशियां

अवधेश शुक्ला का करीब 35 साल पुराना पुश्तैनी मकान है। चार कमरों के इस एक मंजिला मकान की छत बांस-बल्लियों और मिट्टी से बनी हुई थी। परिवार में अवधेश की पत्नी विनोदनी और दो बेटे हर्ष (32) व राजू (29) हैं। हर्ष पनकी स्थित स्टील अथॉरिटी कंपनी में काम करता है। दो साल पहले उसकी शादी अंशिका से हुई थी। 20 दिन पहले ही अंशिका ने बेटे आरव को जन्म दिया था।

बच्चे के जन्म के बाद परिवार में खुशियों का माहौल था। घर के लोग नन्हे आरव के साथ पहली दिवाली मनाने को लेकर उत्साहित थे। दादी उसे गोद में खिलाती थीं तो मां उसकी देखभाल में लगी रहती थी। लेकिन एक पल में सबकुछ खत्म हो गया। जिस घर में बच्चे की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब अपनों को खोने का मातम पसरा है।

अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित किया

हर्ष के रिश्तेदार मनोज बाजपेयी ने बताया कि हादसे के बाद अवधेश, राजू और हर्ष ने आसपास के लोगों की मदद से मलबा हटाकर चारों को बाहर निकाला। इसके बाद सभी को कल्याणपुर सीएचसी ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने विनोदनी शुक्ला (60), अंशिका शुक्ला (28) और 20 दिन के आरव को मृत घोषित कर दिया। हर्ष को मामूली चोटें आई हैं।

तीनों की मौत की खबर घर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। जिस दिवाली पर घर में दीप जलने थे, उसी दिन तीन अपनों की मौत से पूरा परिवार टूट गया।

पोस्टमार्टम कराने से परिजनों ने किया इनकार

हादसे के बाद परिजन शवों को लेकर घर लौट आए। इस बीच पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस मौके पर पहुंची तो परिजनों ने शुरुआत में पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। पुलिस ने काफी समझाने-बुझाने के बाद उन्हें इसके लिए राजी किया।

पानी के रिसाव से छत कमजोर होने की आशंका

डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि मकान की छत गिरने से तीन लोगों की मौत की सूचना मिली थी। प्रथम दृष्टया आशंका है कि पानी के रिसाव के कारण छत पर भार बढ़ गया, जिससे वह ढह गई। मौके पर राजस्व विभाग की टीम भी मौजूद है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। घटना की जांच कराई जा रही है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।

*इस परिवार के लिए अब हर दिवाली उस सुबह की याद लेकर आएगी, जब रोशनी के त्योहार पर उनके घर के तीन दीप हमेशा के लिए बुझ गए। नन्हे आरव की पहली दिवाली की खुशियां अब कभी लौटकर नहीं आएंगी।*

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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