तारिकाओं के घटते स्टारडम का पेच, पारिश्रमिक पर असर

तारिकाओं के घटते स्टारडम का पेच, पारिश्रमिक पर असर

बॉलीवुड में एक जमाने में अभिनेत्रियों का स्टारडम हीरो के बराबर होता था लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। दीपिका पादुकोण समेत कई बड़ी अभिनेत्रियों की पकड़ कमजोर हुई है। कंगना, कैटरीना और अनुष्का ने अपने समय में मजबूत पहचान बनाई, लेकिन नई पीढ़ी की एक्ट्रेस वैसा ठहराव हासिल नहीं कर सकी। दरअसल जोर इंडोर्समेंट की कमाई पर है।
बॉलीवुड में हीरोइनों का वह दौर अब कल्पनातीत है, जब हीरो के समानांतर उनका स्टारडम होता था। कुछ साल पहले तक नंबर एक हीरोइन रह चुकी दीपिका पादुकोण अरसे तक कई बड़े हीरो को चैलेंज देती रहीं, मगर पिछले कुछ सालों से उनकी घटती मार्केट वैल्यू को देखते हुए कई निर्माताओं ने नई हीरोइन को लेकर फिल्म बनाना सेफ साइड गेम समझा है। असल में इन दिनों हीरोइन छोटी हो या बड़ी किसी का भी क्रेज नहीं है।
दीपिका दौड़ नहीं पा रहीं
दीपिका का प्रचार तंत्र कुछ भी कहे, पिछले काफी सालों से उनकी रफ्तार काफी धीमी हो चुकी है। कभी फिल्म ‘छपाक’ के बाद दीपिका ने ऑफबीट फिल्मों की राह पर जाने की सोची। लेकिन यह फिल्म उनके लिए भाग्यशाली नहीं रही। फिर से कॉमर्शियल फिल्मों की तरफ ध्यान केंद्रित किया। ‘काल्की 2898 एडी’, ‘सिंघम अगेन’ जैसी मसाला फिल्मों में वह दिखाई पड़ीं। मगर इसके पश्चात ‘फाइटर’ की विफलता हुई। फिर उन्होंने कई बड़े इंडोर्समेंट व फिल्मों को रिटर्न कर दिया। फिल्म ‘काल्की 2898’ के दूसरे भाग में काम करने से इंकार कर दिया। इस सूची में साउथ की दो-तीन और फिल्में हैं। इस समय वह शाहरुख के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘किंग’ में काम कर रही हैं।
पहले भी आई हैं महंगी हीरोइन
शुरुआती दौर में अभिनेत्री रूबी मेयर्स सुलोचना ने प्रति फिल्म ज्यादा पारिश्रमिक लेना शुरू किया। 30 के दशक में उन्हें प्रति माह पांच हजार रुपये मिलते थे। बाद के दौर में मीना कुमारी, नरगिस, वहीदा रहमान, माला सिन्हा जैसी हीरोइन का पारिश्रमिक कम नहीं था। रेखा, हेमा, राखी आदि भी पारिश्रमिक के मामले में कम नहीं थीं। ट्रेड विश्लेषक आमोद मेहरा कहते हैं, ‘ इनमें से ज्यादातर हीरोइनें नायिका प्रधान फिल्मों को संभालने का माद्दा रखती थीं। इसलिए इन्हें मनचाही फीस मिलती थी।’
कंगना ने बाजी उलट दी थी
ट्रेड पंडित मानते हैं कि यदि कंगना रनौत अपने कैरियर को लेकर थोड़ा भी संजीदा हो जातीं, तो नंबर एक अभिनेत्री का ताज पहन सकती थीं। ‘क्वीन’ और ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ के बाद उनकी स्थिति बेहद मजबूत हो गई थी। उन्हें फिल्म ‘रंगून’ के लिए 14 करोड़ की भारी फीस मिली थी।
कैटरीना भी कम नहीं थीं
भाव-प्रवणता के मामले में कैटरीना कैफ, प्रियंका, दीपिका, अनुष्का और कंगना से बहुत पीछे थीं, पर उनकी ज्यादातर फिल्में बॉक्स ऑफिस में अच्छी गईं। पर फिल्म ‘फितूर’ से उनका ग्राफ कम होना शुरू हुआ।
अनुष्का : कम फिल्मों से स्टारडम
अनुष्का की साल 2008 में पहली फिल्म ‘रब ने बना दी जोड़ी’ आई थी। सारे बड़े हीरो की बड़ी-बड़ी फिल्में करने वाली अनुष्का को कभी प्रति फिल्म सात-आठ करोड़ का पारिश्रमिक मिलता था। पर शादी के बाद तो वे केवल अपने होम प्रोडक्शन में बिजी हैं।
याद नहीं रहतीं नई तारिकाएं
हाल के वर्षों में आई नवोदित तारिकाओं वाणी कपूर, कियारा आडवाणी, कृति सैनन, सारा अली खान, रश्मिका मंदाना, जाह्नवी कपूर आदि की बात जाने दें, तो अनन्या पांडे, अनीत पड्ढा, तृप्ति डिमरी आदि भी बॉलीवुड के आने-जाने के खेल में शामिल हैं। इनके स्टारडम हासिल करने पर संशय हैं। वे चंद लाख की फीस पाकर ही संतुष्ट हो हैं। दरअसल तारिकाओं में यह बेफिक्री इंडोर्समेंट की शक्ति से आती है।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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