डिजिटल अरेस्ट गैंग के सरगना मुकुल चौबे की तलाश तेज, दो दिन से फोन बंद
कानपुर। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के सरगना मुकुल चौबे की तलाश में पुलिस ने छानबीन तेज कर दी है। साइबर थाना पुलिस के मुताबिक, मुकुल का मोबाइल पिछले दो दिनों से बंद है, जिसके चलते उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है। कानपुर के अलावा पुलिस की टीमें उसकी तलाश में प्रतापगढ़ और झांसी भी भेजी गई हैं।
जांच के दौरान मुकुल चौबे के पुराने मामलों की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस को उसके तार वर्ष 2021 में सामने आए केस्को के पीएफ घोटाले से भी जुड़े होने की जानकारी मिली है। इस मामले में मुकुल और उसके सहयोगियों के खिलाफ पहले भी मुकदमा दर्ज कराया गया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि साइबर ठगी के मौजूदा नेटवर्क में पुराने संपर्कों की क्या भूमिका रही है।
डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट कर 48 लाख ठगे
बुधवार को स्वरूप नगर निवासी डॉक्टर योगेश चंद्र मिश्रा को डिजिटल अरेस्ट कर 48 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों वासर, आतिश और कंचन प्रजापति को गिरफ्तार किया था। पूछताछ और जांच में सामने आया कि इस गिरोह का कथित सरगना मूल रूप से झांसी निवासी मुकुल चौबे है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने प्रतापगढ़ में कार्यालय बनाकर साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित किया था। ठगी से हासिल रकम अलग-अलग बैंक खातों और फर्जी फर्मों के खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी। पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे मुकुल चौबे के कहने पर यह सिंडिकेट चला रहे थे।
आरोपियों के अनुसार, मुकुल ने उन्हें करीब 10 हजार रुपये महीने की नौकरी पर रखा था और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्म खुलवाई थी। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी की रकम के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
2021 के पीएफ घोटाले में भी आया था नाम
पुलिस के मुताबिक, मुकुल चौबे का नाम वर्ष 2021 में केस्को के पीएफ घोटाले की जांच के दौरान भी सामने आया था। 30 अगस्त 2021 को रानीघाट, पुराना कानपुर निवासी केस्को संविदाकर्मी अजय सिंह ने कर्नलगंज थाने में गांधी नगर निवासी मुकुल चौबे और उसके सहयोगियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मुकुल ने कर्मचारियों को ईपीएफ की रकम निकलवाने का लालच देकर उनके पीएफ खातों से जुड़े मूल बैंक खातों में बदलाव कराया और लाखों रुपये के गबन में भूमिका निभाई। अब साइबर ठगी के मामले की जांच के दौरान पुलिस उस पुराने प्रकरण से जुड़े लोगों और संपर्कों की भी जानकारी जुटा रही है।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के मुताबिक, साइबर ठगी के तार उन लोगों से भी जोड़कर देखे जा रहे हैं, जिनके नाम मुकुल चौबे के साथ पीएफ घोटाले में सामने आए थे।
27 बैंक खातों में पहुंची ठगी की रकम
एडीसीपी अरीबा नोमान ने बताया कि साइबर ठगी की रकम कई स्तरों पर अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। शुरुआती जांच में रकम बिहार के सहरसा स्थित बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते में पहुंचने की जानकारी मिली है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के 27 बैंक खातों में भी रकम ट्रांसफर हुई।
जांच में प्रतापगढ़ की बोकॉयो कांट्रेक्टर प्राइवेट लिमिटेड फर्म का खाता भी सामने आया। पुलिस के अनुसार, इस खाते में 15 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए करीब 25.98 लाख रुपये पहुंचे थे।
जांच के दौरान खाते से जुड़े मोबाइल नंबर की पड़ताल की गई तो वह रायबरेली निवासी आतिश का निकला। मोबाइल की लोकेशन कानपुर के घंटाघर स्थित सिद्धार्थ होटल के आसपास मिली। इसके बाद पुलिस ने होटल में छापेमारी कर आतिश समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
फर्जी फर्म और खातों के जरिए रकम ठिकाने लगाने का आरोप
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि मुकुल चौबे के निर्देश पर फर्जी दस्तावेजों से फर्म तैयार कराई गई थी। इसी नेटवर्क के जरिए डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी गई रकम अलग-अलग खातों में पहुंचाई जाती थी। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर मुकुल चौबे के ठिकानों और उसके अन्य सहयोगियों की जानकारी जुटा रही है।
मुकुल का मोबाइल बंद होने के कारण फिलहाल उसकी लोकेशन नहीं मिल पा रही है। पुलिस की टीमें कानपुर के साथ प्रतापगढ़ और झांसी में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। साथ ही बैंक खातों के लेनदेन और पुराने मामलों से जुड़े संपर्कों की जांच कर साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

