“नितिन, प्लीज कम बैक सून… अब बस आप सुरक्षित घर लौट आइए”

“नितिन, प्लीज कम बैक सून… अब बस आप सुरक्षित घर लौट आइए”

शारजाह के पास ड्रोन हमले में तबाह हुए तेल टैंकर से लाइफबोट के सहारे बचाई जान, कानपुर के चीफ इंजीनियर नितिन शुक्ला दुबई के होटल में सुरक्षित; पत्नी अंकिता को अब घर वापसी का इंतजार

कानपुर। “नितिन, प्लीज कम बैक सून… अब बस आप सुरक्षित घर लौट आइए।” यह गुहार है कानपुर के श्याम नगर निवासी नितिन शुक्ला की पत्नी अंकिता की। शारजाह के पास ड्रोन हमले में जहाज तबाह होने के बाद लाइफबोट के सहारे जान बचाकर निकले नितिन के सुरक्षित होने की खबर ने परिवार को राहत तो दी है, लेकिन उनकी घर वापसी होने तक चिंता बरकरार है। छह साल की बेटी और दो साल के बेटे को संभाल रहीं अंकिता के लिए पति की सलामती किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। अब उनकी बस यही ख्वाहिश है कि नितिन जल्द घर लौट आएं और परिवार फिर एक साथ हो सके।

नौ अक्टूबर को पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर एमटी जेम नंबर-2 पर ड्रोन हमला हुआ था। जहाज पर तैनात कानपुर निवासी चीफ इंजीनियर नितिन शुक्ला ने अपने 21 साथियों के साथ लाइफबोट के सहारे किसी तरह जान बचाई। हमले में जहाज तबाह हो गया। नितिन और उनके साथी सुरक्षित बच गए, लेकिन जहाज में पासपोर्ट, वीजा, लैपटॉप और दूसरे जरूरी दस्तावेज छूट जाने से अब भारत लौटने के लिए कागजी औपचारिकताएं पूरी करने की चुनौती है।

रात 12 बजे कंपनी का फोन आया, तो रो पड़ीं अंकिता

प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका अंकिता शुक्ला ने बताया कि 10 अक्टूबर की रात करीब 12 बजे उनके मोबाइल पर नितिन की कंपनी फ्लीटिंग शिपिंग के चंडीगढ़ स्थित ब्रांच ऑफिस से फोन आया। उन्हें बताया गया कि जिस जहाज पर नितिन तैनात हैं, उस पर ड्रोन हमला हुआ है। साथ ही यह जानकारी दी गई कि नितिन और उनके सभी 21 साथी सुरक्षित हैं।

अंकिता के लिए यह खबर किसी बड़े सदमे से कम नहीं थी। पति के सुरक्षित होने की बात सुनकर कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन जब तक नितिन से खुद बात नहीं हुई, मन में डर बना रहा। उन्होंने बताया, “यह सुनते ही मेरा रो-रोकर बुरा हाल हो गया। समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं। परिवार के लोगों को घटना की जानकारी दी, लेकिन नितिन से बात नहीं हो पा रही थी। इस वजह से चिंता और बढ़ती जा रही थी।”

एक तरफ पति की सलामती की चिंता थी, तो दूसरी तरफ घर में दो छोटे बच्चे थे। अंकिता ने किसी तरह खुद को संभाला और बच्चों को भी हिम्मत देने की कोशिश की।

 लाइफबोट के सहारे बचाई जान, दुबई के होटल में रखा गया

अंकिता ने बताया कि 11 अक्टूबर की रात करीब 10:30 बजे नितिन का मैसेज आया। उन्होंने बताया कि वह ठीक हैं और उन्हें दुबई के एक होटल में सुरक्षित रखा गया है। इसके बाद फोन पर नितिन ने बताया कि किस तरह उन्होंने अपने साथियों के साथ लाइफबोट के सहारे जान बचाई। अंकिता के मुताबिक, आखिरी बार 12 अक्टूबर की शाम करीब पांच बजे नितिन से बात हुई थी। उन्होंने बताया कि उनकी पूरी टीम सुरक्षित है। हालांकि, हमले के दौरान पासपोर्ट, वीजा, लैपटॉप और अन्य जरूरी कागजात जहाज में ही छूट गए। अब भारत लौटने के लिए जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। नितिन की सलामती की खबर मिलने के बाद अंकिता को कुछ सुकून जरूर मिला है, लेकिन पति के घर लौटने तक उनकी बेचैनी खत्म नहीं हुई। फोन पर कुछ मिनट की बातचीत उन्हें हिम्मत देती है, मगर अगली कॉल का इंतजार फिर उन्हें परेशान कर देता है।

8 अक्टूबर को ही जताई थी अनहोनी की आशंका

अंकिता ने बताया कि नितिन मार्च में जहाज पर गए थे। तभी से उनका जहाज होर्मुज क्षेत्र के पास फंसा हुआ था। वहां के हालात को लेकर नितिन अक्सर चिंता जताते थे। आसपास मिसाइलें गिरने और जहाजों पर हमलों की खबरें मिलती रहती थीं। अंकिता के अनुसार, आठ अक्टूबर को नितिन ने फोन पर बताया था कि जहाज के पास एक ड्रोन दिखाई दे रहा है। उस समय उन्होंने किसी अनहोनी की आशंका भी जताई थी। अगले ही दिन जहाज पर हमला हो गया। नितिन ने यह भी बताया था कि पिछले दो-तीन दिनों से जहाज को वहां से हटाने की धमकियां मिल रही थीं। अंकिता कहती हैं कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि जिस खतरे की बात पति फोन पर बता रहे हैं, वह इतनी बड़ी मुसीबत बन जाएगा। अब जहाज तबाह हो चुका है और परिवार की निगाहें नितिन की सुरक्षित वापसी पर टिकी हैं।

20 साल से समुद्र में काम कर रहे बेटे की चिंता में पिता

नितिन के पिता राजेश कुमार शुक्ला नगर निगम में राजस्व निरीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने बताया कि उनका बड़ा बेटा पिछले 20 साल से मर्चेंट नेवी में काम कर रहा है। नौकरी के सिलसिले में वह लंबे समय तक घर से दूर रहता है, लेकिन इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं। जहाज पर हमले की खबर ने पूरे परिवार को परेशान कर दिया। जिस बेटे को बेहतर भविष्य के लिए समुद्र की नौकरी पर भेजा था, उसी की सलामती की खबर पाने के लिए परिवार बेचैन रहा। लाइफबोट के सहारे जान बचाने की बात सुनकर राहत मिली, लेकिन बेटे के घर लौटने तक पिता की चिंता बरकरार है।

 सांसद से लगाई गुहार, सुरक्षित वापसी की उम्मीद

अंकिता ने बताया कि परिवार के लोगों ने सांसद रमेश अवस्थी से मुलाकात कर नितिन की सुरक्षित वापसी के लिए मदद मांगी है। परिवार को उम्मीद है कि भारत सरकार वहां फंसे भारतीयों की मदद करेगी और उन्हें जल्द स्वदेश लाने की व्यवस्था की जाएगी। अंकिता का कहना है कि नितिन ने इस हादसे में अपनी जान तो बचा ली, लेकिन अब उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाना सबसे जरूरी है। परिवार चाहता है कि कागजी औपचारिकताएं जल्द पूरी हों और नितिन अपने बच्चों के पास लौट आएं। अंकिता के लिए अब सबसे बड़ी खुशी किसी फोन कॉल या मैसेज से नहीं, बल्कि उस पल से मिलेगी, जब घर का दरवाजा खुलेगा और सामने नितिन खड़े होंगे। छह साल की बेटी और दो साल के बेटे को फिर अपने पिता का साथ मिल जाएगा। फिलहाल परिवार की हर दुआ और हर इंतजार इसी एक उम्मीद से जुड़ा है—नितिन जल्द सुरक्षित घर लौट आएं।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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