कठारा पशु सेवा केंद्र पर ताला, बाहर ताश खेलते मिले लोग
एक साल से कर्मचारी के नहीं आने का ग्रामीणों का दावा, बीमार मवेशियों के इलाज के लिए निजी डॉक्टरों का सहारा
कानपुर। बरसात के मौसम में पशुओं में कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार पशुपालन और पशुओं से जुड़े कारोबार पर निर्भर हैं। ऐसे में गांवों में पशुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए खोले गए पशु सेवा केंद्रों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इसके बावजूद बिधनू ब्लॉक की कठारा ग्राम पंचायत में संचालित पशु सेवा केंद्र की व्यवस्था सवालों के घेरे में है।
कठारा स्थित पशु सेवा केंद्र के निरीक्षण के दौरान केंद्र के मुख्य गेट पर ताला लटका मिला। केंद्र के बाहर कुछ लोग ताश खेलते नजर आए। ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र नियमित रूप से नहीं खुलता, जिसके कारण पशुपालकों को अपने बीमार मवेशियों के उपचार के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है।
एक साल से नहीं आते कर्मचारी
ग्रामीण नंदराम और राजेश ने बताया कि करीब एक साल से पशु सेवा केंद्र पर कोई कर्मचारी नियमित रूप से नहीं आता है। उनका कहना है कि गांव में किसी मवेशी के बीमार होने पर निजी पशु चिकित्सक को बुलाना पड़ता है। इससे ग्रामीणों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
ग्रामीणों के मुताबिक कठारा से पशुओं के उपचार के लिए मुख्य पशु स्वास्थ्य केंद्र बिधनू करीब आठ किलोमीटर दूर है। ऐसे में बीमार पशु को लेकर वहां पहुंचना भी आसान नहीं होता। ग्रामीणों ने मांग की कि कठारा के पशु सेवा केंद्र को नियमित रूप से खोला जाए, ताकि गांव के पशुपालकों को समय पर उपचार मिल सके।
अतिरिक्त प्रभार में है केंद्र
मामले में पशुधन प्रसार अधिकारी बेबी नगमा ने बताया कि कठारा पशु सेवा केंद्र का उन्हें अतिरिक्त प्रभार मिला हुआ है। उन्होंने कहा कि समय मिलने पर वह केंद्र पर जाती हैं। वहीं पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष अवस्थी ने बताया कि विभाग में स्टाफ की कमी के चलते केंद्र नियमित रूप से नहीं खुल पा रहा है। उन्होंने कहा कि पशुपालकों को पशु चिकित्सा संबंधी सेवाएं एंबुलेंस के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में पशुओं के बीमार होने की आशंका अधिक रहती है। ऐसे में गांव में ही पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध न होने से पशुपालकों की परेशानी बढ़ रही है।

