इटावा की हॉकी स्टार इशिका ने एशियन गेम्स में खेलकर रचा इतिहास
एशियन गेम्स 2026 में हॉकी टीम की उपकप्तान इशिका चौधरी ने डिफेंडर के रूप में अहम भूमिका निभाई
इटावा। एशियाई खेलों (एशियन गेम्स 2026) में भारतीय महिला हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रचा है। जापान में खेले गए एशियाई खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम ने 44 साल बाद गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। इस ऐतिहासिक जीत के बाद पूरे देश में खुशी की लहर है. वहीं उत्तर प्रदेश के इटावा के पृथ्वीपुरा गांव में भी जश्न का माहौल है। यहां की रहने वाली इशिका चौधरी ने अपने शानदार खेल से देश और जिले का नाम रोशन किया है। इशिका की उपलब्धि से परिवार, गांव और इटावा जिले के साथ पूरे देश लोग गर्व महसूस कर रहे हैं।
हॉकी स्टार इशिका चौधरी के परिजनों बोले…भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा रहीं इशिका चौधरी ने महज 11 साल की उम्र में हॉकी स्टिक थाम ली थी। उन्होंने अपनी हॉकी की बुनियादी बारीकियों को मध्य प्रदेश महिला हॉकी अकादमी से सीखा। साल 2017 में जूनियर महिला ऑस्ट्रेलियाई हॉकी लीग से अपने अंतरराष्ट्रीय जूनियर कॅरियर की शुरुआत की। 2018 में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में आयोजित तीसरे यूथ ओलंपिक खेलों में भारतीय टीम को रजत पदक दिलाने में अहम योगदान दिया। साल 2022 में साउथ अफ्रीका में आयोजित एफआईएच (FIH) हॉकी महिला जूनियर वर्ल्ड कप में वह भारतीय टीम का हिस्सा थीं, जहां भारत चौथे स्थान पर रहा। साल 2022 में ही सीनियर भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए डेब्यू किया (FIH प्रो लीग के दौरान)। इसके बाद से भारतीय डिफेंस लाइन की एक मजबूत रीढ़ बनकर उभरी हैं।
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला हॉकी टीम ने फाइनल में चीन को 1-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही भारतीय टीम ने लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए क्वालीफाई भी कर लिया है। इशिका की इस सफलता पर पूरे देश और उनके गृहनगर ग्वालियर में भव्य स्वागत हुआ। हालांकि इटावा के पृथ्वीपुरा से जुड़ाव के कारण यहां भी खुशी का ठिकाना नहीं है। परिवार से जुड़े लोग एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत का जश्न मना रहे हैं।
इशिका चौधरी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उनके पैतृक गांव पृथ्वीपुरा में जबरदस्त उत्साह है। बाबा विजय चौधरी और चाचा संतोष चौधरी भी इशिका की मेहनत और लगन की जमकर सराहना कर रहे हैं। दोनों का कहना है कि इशिका ने भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा बनकर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे गांव-देश का नाम रोशन किया है। इशिका की कामयाबी से दूसरी बेटियों को भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा मिलेगी।

