वीडियोकॉन के पूर्व प्रमोटर वेणुगोपाल धूत बैंकरप्ट घोषित:NCLT ने SBI की याचिका पर जारी किया आदेश

12,668 करोड़ के लोन डिफॉल्ट पर कार्रवाई

वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर और डायरेक्टर वेणुगोपाल नंदलाल धूत। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर और डायरेक्टर वेणुगोपाल नंदलाल धूत। (फाइल फोटो)

पर्सनल गारंटी और बकाए की डिटेल्स

NCLT ने नोट किया कि SBI ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड (VIL) की बैंक से ली गई क्रेडिट सुविधाओं के लिए धूत के पर्सनल गारंटर होने के नाते उनके खिलाफ बैंक्रप्सी कार्यवाही शुरू की थी। धूत ने कंपनी को दी गई कई क्रेडिट सुविधाओं जैसे- रुपया टर्म लोन, वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस लिमिटेड से जुड़ी सुविधाएं और वर्किंग कैपिटल लोन के लिए पर्सनल गारंटी दी थी। बैंक ने फरवरी 2018 में इन गारंटियों को इनवोक किया गया था।

वीडियोकॉन का इनसोल्वेंसी बैकग्राउंड

वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज को जून 2018 में कॉर्पोरेट इनसोल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस में शामिल किया गया था। बाद में इस कार्यवाही को वीडियोकॉन ग्रुप की अन्य कंपनियों के साथ जोड़ दिया गया था। इसके बाद जून 2021 में NCLT ने ट्विन स्टार टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के जमा किए गए रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी।

रीपेमेंट प्लान क्यों खारिज हुआ?

वेणुगोपाल धूत की पर्सनल इनसोल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस अप्रैल 2026 में शुरू की गई थी। हालांकि, उनका प्रस्तावित रीपेमेंट प्लान लेनदारों (क्रेडिटर्स) को मंजूर नहीं था। धूत ने सिलीगुड़ी में एक प्रस्तावित डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के जरिए 36 महीनों की अवधि में ₹600 करोड़ देने का रीपेमेंट प्रस्ताव रखा था।

ट्रिब्यूनल ने पाया कि यह प्रस्ताव भविष्य के विकास, मंजूरियों और कैश फ्लो पर निर्भर था और इसमें कोई शुरुआती पेमेंट शामिल नहीं था। इसके अलावा, रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने बताया कि यह रीपेमेंट प्लान IBC के नियमों के अनुसार उनसे सलाह लेकर तैयार नहीं किया गया था।

इसके बाद क्रेडिटर्स ने पर्सनल इनसोल्वेंसी प्रोसेस को बंद करके बैंक्रप्सी प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया। इससे पहले 17 जुलाई को NCLT ने रीपेमेंट प्लान को खारिज करते हुए पर्सनल इनसोल्वेंसी प्रोसेस खत्म कर दी थी और क्रेडिटर्स व देनदार को IBC के नियमों के तहत बैंक्रप्सी कार्यवाही शुरू करने का अधिकार दिया था।

कुल डिफॉल्ट रकम 12,668 करोड़ पहुंची

इसके बाद SBI ने बैंक्रप्सी याचिका दायर की। बैंक ने बताया कि 30 सितंबर 2026 तक ब्याज और पेनल्टी मिलाकर कुल डिफॉल्ट रकम 12,668 करोड़ हो गई है। दस्तावेजों की जांच के बाद ट्रिब्यूनल ने माना कि यह याचिका IBC की धारा 123 की सभी आवश्यकताओं का पालन करती है और इसे स्वीकार कर लिया।

ट्रस्टी की नियुक्ति और आगे की प्रोसेस

  • NCLT ने धूत को बैंकक्रिप्ट घोषित करते हुए आशीष नारायण को बैंक्रप्सी ट्रस्टी नियुक्त किया है।
  • धूत की संपत्ति तुरंत बैंक्रप्सी ट्रस्टी के अधीन हो जाएगी और IBC के तहत क्रेडिटर्स में बांटी जाएगी।
  • धूत को 7 दिनों के भीतर अपनी फाइनेंशियल डीटेल्स ट्रस्टी को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

90 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का आदेश

बैंक्रप्सी ट्रस्टी को क्रेडिटर्स को सूचित करने, पब्लिक नोटिस जारी कर दावे आमंत्रित करने और 90 दिनों के भीतर NCLT व कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स को शुरुआती रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है। यह आदेश IBC की धारा 138 के तहत धूत के डिस्चार्ज होने तक प्रभावी रहेगा।

क्या होती है बैंक्रप्सी और पर्सनल गारंटी?

पर्सनल गारंटी: जब कोई व्यक्ति कंपनी के लोन के बदले अपनी पर्सनल संपत्ति की गारंटी देता है, तो लोन न चुकाने पर बैंक उस व्यक्ति से सीधे बकाया वसूल सकते हैं।

बैंक्रप्सी: इंसोल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड (IBC) के तहत जब कोई देनदार अपना कर्ज चुकाने में असमर्थ होता है, तो कोर्ट उसे बैंकरप्ट घोषित कर देती है। इसके बाद उसकी सभी संपत्तियां कोर्ट से नियुक्त ट्रस्टी के पास चली जाती हैं, जो उन्हें बेचकर कर्जदाताओं का पैसा लौटाता है।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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