पटाखे की एक चिंगारी भी खतरनाक

पटाखे की एक चिंगारी भी खतरनाक

सुरक्षा के नियम जानें, जलने पर करें ये काम

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, 2014 से 2023 के बीच भारत में पटाखों से जुड़े करीब 1,489 हादसे हुए। इनमें 1,469 लोगों की मौत हुई, जबकि 571 लोग घायल हुए। सिर्फ 2023 में ही पटाखों से जुड़ी दुर्घटनाओं में 169 लोगों की जान गई।साल 2025 में दिवाली के दौरान अकेले दिल्ली में पटाखों से जलने के करीब 270 मामले सामने आए। फायर सर्विसेज के फोन की घंटी 281 बार बजी क्योंकि शहर में 281 जगहों पर पटाखों, दीयों और शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगने की घटनाएं हुईं।इसलिए आज पटाखों से जुड़ी सेफ्टी टिप्स बताएंगे। सबसे पहले ये समझते हैं कि पटाखे कितने प्रकार के होते हैं। फिर उनके प्रमुख जोखिम और उनसे जुड़ी सावधानियों की बात करेंगे।

पटाखों को उनके आकार, आवाज, रोशनी, जलने के तरीके और पैदा होने वाले प्रभाव के आधार पर कई प्रकार में बांटा जा सकता है। दिवाली पर पटाखों की पहचान और उनसे जुड़े जोखिम समझने के लिए यह क्लासिफिकेशन जरूरी है।

1. आवाज करने वाले पटाखे

इन पटाखों की खासियत है, इनकी तेज आवाज। जलते ही ये तेज धमाका करते हैं, जैसेकि

  • हाइड्रो बम: एक तेज आवाज करने वाला पटाखा, जो फूटने पर धमाका करता है।
  • सुतली बम: कागज और सुतली से बने पटाखे। इनके फूटने पर तेज धमाका होता है।
  • लड़ी: कई छोटे पटाखों को एक लंबी लड़ी में जोड़ा जाता है। एक के बाद एक फूटने से लगातार तेज आवाज होती है।
  • कैप पटाखे: छोटे पटाखे, जो दबाव या टक्कर से आवाज करते हैं।

आवाज वाले पटाखों के मुख्य जोखिम

  • तेज आवाज से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
  • बच्चों, बुजुर्गों और पालतू जानवरों को विशेष परेशानी हो सकती है।

2. रोशनी और चमक पैदा करने वाले पटाखे

इनका मुख्य उद्देश्य रोशनी, चमक और रंगीन प्रभाव पैदा करना होता है, जैसेकि

  • फुलझड़ी: इसे हाथ में पकड़कर जलाया जाता है। इससे चमकदार चिंगारियां निकलती हैं।
  • अनार: इसे जमीन पर रखकर जलाया जाता है। इससे ऊपर की ओर फव्वारे की तरह चिंगारियां निकलती हैं।
  • पेंसिल पटाखा: यह अनार की तरह जलने पर ऊपर की ओर रोशनी और चिंगारियां छोड़ता है।
  • रंगीन फव्वारे: इनमें अलग-अलग रंगों की रोशनी और चिंगारियां दिखाई देती हैं।

रोशनी वाले पटाखों के मुख्य जोखिम

  • इनसे निकलने वाली गर्म चिंगारियां स्किन और आंखों को जला सकती हैं।
  • इन पटाखों से कपड़ों में आग लगने का खतरा भी रहता है।

3. हवा में फूटने वाले पटाखे (एरियल फायरवर्क्स)

इन पटाखों को जलाने के बाद इनका प्रभाव आसमान में दिखाई देता है, जैसेकि-

  • रॉकेट: जलाने के बाद तेजी से ऊपर की ओर जाता है और फिर आवाज या रोशनी पैदा करता है।
  • स्काई शॉट: आसमान में जाकर रंगीन रोशनी या चमकदार प्रभाव पैदा करता है।
  • एरियल शेल: यह आसमान में जाकर फटता है। ऊंचाई पर पहुंचकर यह बड़े आकार में रंगीन रोशनी फैलाता है।
  • मल्टी-शॉट केक: एक ही बॉक्स से कई बार आसमान में रोशनी या धमाके जैसा प्रभाव पैदा होता है।

हवा में फूटने वाले पटाखों के मुख्य जोखिम

गलत दिशा में जाने, छत या पेड़ों पर गिरने और आसपास की इमारतों में आग लगने का खतरा रहता है।

4. जमीन पर घूमने वाले पटाखे (ग्राउंड स्पिनर्स)

ये पटाखे जमीन पर घूमते हुए रोशनी और चिंगारियां पैदा करते हैं, जैसेकि-

चकरी: जमीन पर रखकर जलाई जाती है। जलने पर तेजी से गोल-गोल घूमती है और चारों तरफ चिंगारियां छोड़ती है।

बटरफ्लाई: घूमने या उड़ने जैसा प्रभाव पैदा करने वाला पटाखा।

व्हील: चकरी की तरह घूमने वाला पटाखा, जो घूमते हुए रोशनी पैदा करता है।

जमीन पर घूमने वाले पटाखों के मुख्य जोखिम

इनके घूमने की दिशा बदल सकती है। आसपास मौजूद लोगों को जलने या चोट लगने का खतरा रहता है।

5. धुआं और रंगीन प्रभाव पैदा करने वाले पटाखे (स्मोक फायरवर्क्स)

इन पटाखों का उद्देश्य धमाके की बजाय धुआं, रंग या कुछ खास विजुअल इफेक्ट पैदा करना होता है, जैसेकि-

स्मोक बम: जलने पर रंगीन या सफेद धुआं पैदा करता है।

स्नेक टैबलेट: जलने पर काले रंग की सांप जैसी लंबी आकृति बनाता है।

स्नेक पेलेट्स: छोटे आकार के पटाखे, जिनसे जलने के बाद राख या फोम जैसी आकृति निकलती है।

व्हिसल पटाखे: जलने पर सीटी जैसी आवाज निकालते हैं।

स्मोक फायरवर्क्स के मुख्य जोखिम

  • धुआं सांस के जरिए शरीर में जा सकता है।
  • अस्थमा और सांस संबंधी समस्याओं वाले लोगों के लिए यह ज्यादा नुकसानदेह हो सकता है।

6. डिस्प्ले फायरवर्क्स (विजुअल इफेक्ट पैदा करने वाले पटाखे)

इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से सजावटी फायरवर्क और बड़े विजुअल इफेक्ट पैदा करने के लिए किया जाता है, जैसेकि-

  • रोमन कैंडल: एक ट्यूब से एक के बाद एक रोशनी वाले गोले या चिंगारियां निकलती हैं।
  • मल्टी-शॉट: एक बॉक्स से कई बार आसमान की ओर रंगीन रोशनी और धमाकों का प्रभाव पैदा होता है।
  • एरियल शेल: आसमान में जाकर बड़े आकार में रंगीन रोशनी फैलाता है।
  • लांस नेटवर्क: पटाखों की मदद से जमीन पर कोई आकृति, डिजाइन या रोशनी का पैटर्न बनाया जाता है।

डिस्प्ले फायरवर्क्स के मुख्य जोखिम

इनका इस्तेमाल गलत तरीके से करने पर आग लगने और गंभीर चोट पहुंचने का रिस्क होता है।

पटाखे जलाने से पहले जरूरी तैयारियां

पटाखे जलाने से पहले सुरक्षा से जुड़ी तैयारियां कर लें, ताकि हादसे का रिस्क कम हो, जैसेकि-

  • पटाखों के पैकेट पर दिए गए निर्देश पढ़ें।
  • पानी, रेत या फायर एक्सटिंग्विशर पास रखें।
  • पटाखे सुरक्षित जगह पर रखें।
  • प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड किट पास रखें।
  • पटाखे जलाते समय वीडियो बनाने की बजाय सिर्फ उसी पर ध्यान दें।

पटाखे जलाते समय कैसे कपड़े पहनें

पटाखे जलाते हुए ऐसे कपड़े नहीं पहनने चाहिए, जिनके आग पकड़ने की संभावना ज्यादा हो। जो बहुत ढीले, झालरों वाले हों या जिन्हें संभालने में मेहनत लगे। सेफ्टी डिटेल्स ग्राफिक में देखिए-

पटाखे खरीदते हुए जरूरी सावधानियां

पटाखे खरीदते हुए इन बातों का ध्यान रखें-

  • पटाखे लाइसेंस प्राप्त दुकानदार से ही खरीदें।
  • पैकेट पर निर्माता का नाम और जरूरी जानकारी देखें।
  • केवल प्रमाणित और वैध पटाखे खरीदें।
  • फटे, खुले या खराब पैकिंग वाले पटाखे न खरीदें।
  • प्रतिबंधित पटाखे बिल्कुल न खरीदें।
  • बच्चों की उम्र और सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही पटाखे चुनें।
  • पटाखे के पैकेट पर दिए गए सुरक्षा निर्देश जरूर पढ़ें।
  • घर पर पटाखों को सुरक्षित जगह पर रखें। ध्यान रखें कि आसपास कोई भी ज्वलनशील चीज न हो।

घर में पटाखे स्टोर करते हुए जरूरी सावधानियां

पटाखे स्टोर करते हुए इन बातों का ध्यान रखें–

  • पटाखों को सूखी और हवादार जगह पर रखें।
  • उन्हें बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
  • माचिस, लाइटर, गैस सिलेंडर जैसे ज्वलनशील पदार्थों के पास न रखें।
  • पटाखों को ओरिजनल पैकेजिंग में ही रखें।
  • पटाखों के पास धूम्रपान न करें और न ही आग जलाएं।
  • घर में जरूरत से ज्यादा पटाखे जमा न करें।

अगर पटाखे से जल जाएं तो क्या करें?

पटाखे से जलने पर तुरंत सही फर्स्ट एड देना जरूरी है। इससे चोट की गंभीरता और संक्रमण का खतरा कम होता है।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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