रील की चमक में कहीं पीछे न छूट जाए असली पहचान

रील की चमक में कहीं पीछे न छूट जाए असली पहचान

आज का युवा ऊर्जा, प्रतिभा और नई सोच का प्रतीक है। उसके हाथ में तकनीक है, सामने संभावनाओं की लंबी दुनिया है और सोशल मीडिया ने अपनी बात दुनिया तक पहुंचाने का एक आसान मंच भी दे दिया है। लेकिन इसी मंच पर लोकप्रियता की होड़ ने युवाओं के एक वर्ग को ऐसे दिखावे की ओर भी धकेल दिया है, जहां गाड़ियों के काफिले, तेज आवाज में बजता संगीत और सड़क पर बनती रील ही पहचान का माध्यम बनते जा रहे हैं।

किसी युवा का अपने दोस्तों के साथ निकलना या अपनी खुशी के पल कैमरे में कैद करना गलत नहीं है। समस्या तब पैदा होती है, जब रील के कुछ सेकंड के लिए सड़क की सुरक्षा, यातायात नियम और सामाजिक जिम्मेदारी पीछे छूट जाते हैं। कई बार गाड़ियों का लंबा काफिला, वाहनों से बाहर निकलकर वीडियो बनाना, सड़क पर अनावश्यक प्रदर्शन और खतरनाक तरीके से वाहन चलाना महज मनोरंजन नहीं रह जाता, बल्कि दूसरों के लिए परेशानी और दुर्घटना का कारण बन सकता है।

सोशल मीडिया ने लोकप्रियता का पैमाना भी बदल दिया है। पहले युवा अपनी मेहनत, पढ़ाई, खेल, कला, व्यवसाय या सामाजिक कार्यों से पहचान बनाते थे। आज कई बार लाइक, व्यू और फॉलोअर संख्या को सफलता का प्रमाण मान लिया जाता है। कुछ सेकंड की वायरल रील के लिए ऐसा प्रदर्शन किया जाता है, जिसका वास्तविक जीवन में कोई स्थायी महत्व नहीं होता।

सवाल यह नहीं है कि युवा रील क्यों बनाते हैं। सवाल यह है कि रील के लिए युवा अपनी असली पहचान किस दिशा में बना रहे हैं?

गाड़ी के काफिले के साथ सड़क पर निकलने की तस्वीर शायद सोशल मीडिया पर कुछ समय के लिए आकर्षण पैदा कर दे, लेकिन समाज को प्रभावित करने वाली पहचान उससे कहीं बड़ी होती है। जिस युवा के पास शिक्षा है, हुनर है, रोजगार पैदा करने की क्षमता है, खेल या कला में प्रतिभा है अथवा समाज के लिए कुछ करने का जज्बा है, उसकी पहचान किसी कैमरे के सामने किए गए दिखावे से कहीं अधिक मजबूत होती है।

परिवार और समाज की भूमिका भी यहां महत्वपूर्ण है। युवाओं को केवल रोकने या डांटने के बजाय उन्हें यह समझाने की जरूरत है कि आधुनिक होना और जिम्मेदार होना एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें, लेकिन अपनी रचनात्मकता और उपलब्धियों को सामने लाने के लिए। रील बनाएं, लेकिन ऐसी जो दूसरों को प्रेरित करे, न कि जोखिम में डाले।

युवाओं के लिए भी यह सोचने का समय है कि आज की वायरल रील कल की पहचान बनेगी या केवल मोबाइल की मेमोरी में पड़ी एक वीडियो बनकर रह जाएगी।

सड़कों पर काफिला दिखाने से कुछ पल की वाहवाही मिल सकती है, लेकिन जीवन की असली जीत उस दिन होगी जब वही युवा अपने परिवार, समाज और देश के लिए किसी सकारात्मक उपलब्धि के कारण पहचाना जाएगा।

सोशल मीडिया बुरा नहीं है, दिखावा भी हर स्थिति में गलत नहीं है। लेकिन जब दिखावा जिम्मेदारी पर भारी पड़ने लगे, तब ठहरकर सोचना जरूरी है। आखिर युवा शक्ति का मतलब केवल तेज रफ्तार गाड़ियां नहीं, बल्कि तेज सोच, सही दिशा और जिम्मेदार कदम भी है।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

Related articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *