अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी का कानपुर में आगाज, चंपत राय ने सुनाए आंदोलन से जुड़े संस्मरण
कानपुर। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय बुधवार को कानपुर पहुंचे। बेनाझावर स्थित बीएनएसडी कॉलेज में शाम पांच बजे अशोक सिंघल जन्मशताब्दी वर्ष के कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। इससे पहले चंपत राय ने संतों के साथ बैठक की। कार्यक्रम में अशोक सिंघल के सामाजिक, धार्मिक और संगठनात्मक योगदान को याद किया गया। वक्ताओं ने उनके जीवन से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए नई पीढ़ी तक उनके विचार पहुंचाने पर जोर दिया।
चंपत राय ने कहा कि अशोक सिंघल ने अपना जीवन साधु-संतों और समाज को एकजुट करने के लिए समर्पित किया। वर्ष 1994 में धर्म संसद का आयोजन कर उन्होंने देशभर के संतों को एक मंच पर एकत्र करने का महत्वपूर्ण काम किया था। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल के जीवन और चिंतन का अभी समग्र रूप से आकलन किया जाना बाकी है। उनका जन्म ही शायद भारतीय संस्कृति के उत्थान के लिए हुआ था।
दाऊदयाल खन्ना से मुलाकात का सुनाया प्रसंग

चंपत राय ने राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े पुराने प्रसंग को साझा करते हुए बताया कि एक हिंदू सम्मेलन में कांग्रेस नेता दाऊदयाल खन्ना, गुलजारीलाल नंदा और रज्जू भैया मौजूद थे। अशोक सिंघल उस समय वहां नहीं थे। सम्मेलन में दाऊदयाल खन्ना ने अयोध्या, मथुरा और काशी को मुक्त कराने की बात कही।
इसके बाद रज्जू भैया ने अशोक सिंघल से इस विषय को देखने के लिए कहा। चंपत राय के अनुसार, अशोक सिंघल दाऊदयाल खन्ना से मिलने मुरादाबाद पहुंचे। उन्होंने वहां स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि आगे चलकर राजनीतिक परिस्थितियों के कारण दाऊदयाल खन्ना पीछे हटे तो आंदोलन प्रभावित होगा।
चंपत राय ने दावा किया कि इसके बाद दाऊदयाल खन्ना ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि इसी तरह आगे चलकर राम जन्मभूमि आंदोलन की दिशा तैयार हुई।
डोम राजा के घर संतों को ले जाने की तैयारी
चंपत राय ने कहा कि अशोक सिंघल का कार्य केवल मंदिर आंदोलन तक सीमित नहीं था। वे सामाजिक समरसता को भी उतना ही महत्वपूर्ण मानते थे। उन्होंने संतों को मानसिक रूप से तैयार किया कि वे डोम राजा के घर जाएंगे।
उन्होंने बताया कि अशोक सिंघल डोम राजा को संतों के मंच पर लेकर आए और संतों के बीच उन्हें बैठाया। चंपत राय के अनुसार, अशोक सिंघल सामाजिक समरसता को केवल विचार के रूप में नहीं, बल्कि व्यवहार में उतारने के पक्षधर थे।
संत रविदास की वाणी का कराया संग्रह

चंपत राय ने बताया कि अशोक सिंघल ने संत रविदास की वाणी का संग्रह कराया और उसका ग्रंथ प्रकाशित करवाया। इसके बाद संत रविदास की वाणी को लेकर राजस्थान के उदयपुर से उनके जन्मस्थान काशी तक यात्रा भी निकाली गई।
उन्होंने कहा कि सामाजिक सद्भाव और समरसता के लिए अशोक सिंघल ने अलग-अलग स्तरों पर काम किया। देश में सिख आतंकवाद के दौर में भी उन्होंने सद्भावना यात्राओं के माध्यम से सामाजिक एकता का प्रयास किया।
कामेश्वर चौपाल और सामाजिक समरसता का किया उल्लेख
चंपत राय ने अपने संबोधन में कामेश्वर चौपाल और सामाजिक समरसता से जुड़े कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल का चिंतन समाज के विभिन्न वर्गों को साथ लेकर चलने पर केंद्रित था। उनका मानना था कि व्यापक सामाजिक एकता के लिए समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच संवाद और सहभागिता जरूरी है।
2001 के कुंभ में दलाई लामा और शंकराचार्य को एक मंच पर लाने का दावा
चंपत राय ने अशोक सिंघल के धार्मिक समन्वय के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि उनका मानना था कि दुनिया में हिंदू, सनातनी हिंदू और गौतम बुद्ध के अनुयायी एकत्र हो जाएं तो वे बड़ी ताकत बन सकते हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में प्रयागराज कुंभ मेले में दलाई लामा को आमंत्रित किया गया था। कांची कामकोटि पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को भी बुलाया गया और दोनों एक मंच पर साथ बैठे।
जितेंद्रानंद सरस्वती बोले- देश का Gen-Z आध्यात्म की ओर बढ़ रहा
अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि देश का Gen-Z अब आध्यात्म की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने हालिया दिल्ली प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं को पूरे Gen-Z की सोच से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक ओर कुछ युवाओं के प्रदर्शनों की चर्चा होती है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में युवा धार्मिक यात्राओं में भी शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कांवड़ यात्रा का उदाहरण देते हुए कहा कि हरिद्वार से गंगाजल लेकर चलने वाले करोड़ों श्रद्धालु भी युवा भारत का हिस्सा हैं।
धार्मिक रुझान बढ़ने का किया दावा
जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि कुछ समय पहले सामने आए एक अमेरिकी सर्वे में भी Gen-Z के धर्म की ओर बढ़ते रुझान की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि पहले की पीढ़ियों में भी धर्म के प्रति रुचि थी, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के कारण लोग उसका प्रदर्शन नहीं कर पाते थे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले का भारत आर्थिक रूप से कमजोर था और इसे स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि पिछली पीढ़ियां धार्मिक संस्कारों वाली नहीं होतीं तो वर्तमान पीढ़ी में धार्मिक भावनाएं कैसे आतीं।
पश्चिम बंगाल का उदाहरण देकर कही बात
जितेंद्रानंद सरस्वती ने पश्चिम बंगाल के चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी रुचि इस बात में नहीं है कि कौन सी राजनीतिक पार्टी चुनाव जीतती है। उन्होंने कहा कि उनकी चिंता महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर है।
उन्होंने संदेशखाली का संदर्भ देते हुए वहां महिलाओं से जुड़े लगाए गए आरोपों का उल्लेख किया और कहा कि किसी भी महिला का जीवन राजनीतिक संघर्ष या अपराध की परिस्थितियों से प्रभावित नहीं होना चाहिए।
विदेशी एजेंसियों को लेकर लगाए आरोप
जितेंद्रानंद सरस्वती ने कुछ चुनावों और देश में अशांति से संबंधित गतिविधियों के पीछे विदेशी एजेंसियों की भूमिका होने का आरोप लगाया। उन्होंने सीआईए, आईएसआई और बांग्लादेश की खुफिया एजेंसी का नाम लेते हुए दावा किया कि कुछ ताकतें भारत में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि दो अक्टूबर से देशभर में अशांति फैलाने के लिए अलग-अलग प्रकार की टीमें सक्रिय की जा रही हैं। हालांकि ये आरोप उनके संबोधन में किए गए दावों के रूप में ही सामने आए।
राम मंदिर निर्माण के बाद धार्मिक गतिविधियों में तेजी का दावा
जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के बाद देश में धार्मिक गतिविधियों में तेजी आई है। उन्होंने बद्रीनाथ और केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं का उदाहरण देते हुए कहा कि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद बड़ी संख्या में लोग धार्मिक यात्राओं पर जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देश में दिखाई दे रहे हिंदू जनजागरण में अशोक सिंघल की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनके प्रयासों से हिंदू समाज और संतों के बीच एकजुटता बढ़ी। उन्होंने कहा कि संतों के साथ मिलकर काम करने की परंपरा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
काशी-मथुरा समेत कई संकल्पों पर जोर
कार्यक्रम के संबंध में डॉ. उमेश पालीवाल ने बताया कि 27 सितंबर से अशोक सिंघल के जन्मशताब्दी वर्ष की शुरुआत के साथ उनके प्रेरणादायी जीवन, चिंतन और राष्ट्र व समाज के लिए किए गए योगदान को याद किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जन्मशताब्दी वर्ष के दौरान श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या की मुक्ति के संकल्प की पूर्णता के बाद काशी और मथुरा से जुड़े संकल्पों, अवैध धर्मांतरण पर रोक, घरवापसी, मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने, वैदिक ज्ञान-विज्ञान के संवर्धन, सेवा और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
हर जिले और प्रखंड स्तर पर होंगे कार्यक्रम
जन्मशताब्दी वर्ष के दौरान कानपुर प्रांत के प्रत्येक जिले, प्रखंड और खंड स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। एक वर्ष तक विचार गोष्ठियां, धर्मसभाएं, समरसता सम्मेलन, युवा संवाद और अशोक सिंघल के जीवन एवं कार्यों पर आधारित प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी।
इसके साथ ही वंचित बस्तियों में सेवा प्रकल्पों का विस्तार कर सामाजिक समरसता और एकात्मता को मजबूत करने के प्रयास किए जाएंगे।
ये रहे मौजूद
मुख्य कार्यक्रम में अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और उन्होंने आशीर्वचन दिया। चंपत राय मुख्य वक्ता रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता राजकुमार ने की।
कार्यक्रम में योगेश्वरी यति श्री महामंडलेश्वर पंचदशनाम जूना अखाड़ा, स्वामी महेश दास कबीर पंथ संत, अनिल ओक, संघ प्रचारक एवं क्षेत्र संगठन मंत्री पूर्वी उत्तर प्रदेश विश्व हिंदू परिषद, नीतू सिंह, राजीव महाना, भवानी भीख, प्रकाश शर्मा और युवराज द्विवेदी समेत कई संत और पदाधिकारी मौजूद रहे।
विहिप पदाधिकारियों के अनुसार, जन्मशताब्दी वर्ष के आयोजनों का उद्देश्य अशोक सिंघल के विचारों और जीवन-दर्शन को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

