चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ को लेकर कानपुर में अलर्ट, 28 से 31 अक्टूबर तक भारी बारिश की आशंका

चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ को लेकर कानपुर में अलर्ट, 28 से 31 अक्टूबर तक भारी बारिश की आशंका

तेज हवाओं, गरज-चमक और वज्रपात से बचाव के लिए प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी, किसानों और पशुपालकों को भी सतर्क रहने की अपील

कानपुर नगर। बंगाल की खाड़ी में उठ रहे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के संभावित प्रभाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने जनपद में सतर्कता बरतने की अपील की है। जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मौसम विभाग के पूर्वानुमान के आधार पर 28 से 31 अक्टूबर के बीच भारी वर्षा, तेज हवाएं, गरज-चमक और वज्रपात की आशंका जताई गई है। इसे देखते हुए आम नागरिकों, किसानों, पशुपालकों और शिक्षण संस्थानों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) डॉ. विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि संभावित प्रतिकूल मौसम से जनहानि और संपत्ति के नुकसान को रोकने के लिए संबंधित विभागों को सतर्क रहने तथा राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने लोगों से मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की।

आंधी और वज्रपात के दौरान रहें सतर्क

प्रशासन ने लोगों को तेज हवा और बारिश के दौरान पक्के भवनों में सुरक्षित रहने की सलाह दी है। पेड़ों, बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मरों, जर्जर दीवारों, होर्डिंग और लटकते बिजली के तारों से दूर रहने को कहा गया है। वज्रपात के समय खुले मैदान, खेत, तालाब और ऊंचे पेड़ों के नीचे शरण लेने से बचने की अपील की गई है। साथ ही जलभराव वाले रास्तों और तेज बहाव वाले स्थानों से गुजरने में सावधानी बरतने तथा बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।

किसानों और पशुपालकों के लिए भी दिशा-निर्देश

किसानों को फसलों की कटाई, मड़ाई और भंडारण मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार करने की सलाह दी गई है। खुले में रखी कृषि उपज, भूसा और उपकरणों को सुरक्षित रखने तथा कटी हुई फसल को तिरपाल से ढककर मजबूती से बांधने को कहा गया है। खराब मौसम के दौरान खेतों में कीटनाशकों और उर्वरकों का छिड़काव नहीं करने की भी सलाह दी गई है।

पशुपालकों से पशुओं को खुले मैदान, पेड़ों के नीचे और कमजोर छप्परों में न बांधने तथा सुरक्षित स्थानों पर रखने की अपील की गई है। तेज हवा और वज्रपात के दौरान पशुओं को चराने के लिए बाहर नहीं ले जाने को कहा गया है।

जर्जर भवनों की पहचान और राहत दलों को सक्रिय रखने के निर्देश

प्रशासन ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर भवनों, कमजोर दीवारों और असुरक्षित संरचनाओं की पहचान कर आवश्यक सुरक्षा उपाय करने के निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था रखने को भी कहा गया है। इसके साथ ही आपदा मित्रों, एनएसएस, एनसीसी, स्काउट गाइड, युवक मंगल दल, होमगार्ड और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों को ग्राम पंचायत स्तर पर सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं।

डॉ. विवेक चतुर्वेदी ने कहा कि प्रशासन संभावित आपदा से निपटने के लिए सतर्क है। उन्होंने लोगों से मौसम संबंधी जानकारी अधिकृत स्रोतों से प्राप्त करने, अफवाहों से बचने और किसी भी आपात स्थिति में पुलिस हेल्पलाइन 112 या स्थानीय प्रशासन को सूचना देने की अपील की।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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