सरकारी अस्पताल में इलाज शुरू नहीं, डॉक्टर ने गेट पर ही खोल दी निशुल्क ओपीडी
वीआरएस ले चुके डॉ. शशिकांत मिश्रा की पहल, जरूरतमंद मरीजों को मिलेगा मुफ्त चिकित्सा परामर्श
कानपुर। स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित होने के एक साल बाद भी दक्षिण सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। अस्पताल तैयार होने के बावजूद मरीजों को उपचार की सुविधा नहीं मिलने से क्षेत्रीय लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में जनहित को प्राथमिकता देते हुए वीआरएस ले चुके वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शशिकांत मिश्रा ने अनूठी पहल की है। उन्होंने बृहस्पतिवार से अस्पताल के मुख्य गेट पर ही निशुल्क ओपीडी सेवा शुरू कर दी।
डॉ. मिश्रा ने पूजा-अर्चना के साथ नर सेवा नारायण सेवा केंद्र का शुभारंभ किया। इस दौरान प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की तस्वीरें स्थापित कर अगरबत्ती जलाकर विधिवत पूजा की गई। केंद्र के माध्यम से क्षेत्र के गरीब, आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद मरीजों को निशुल्क चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि सोमवार से शुक्रवार तक सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक मरीजों को निशुल्क परामर्श दिया जाएगा। जब तक सरकारी अस्पताल में विधिवत स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो जातीं, तब तक यह केंद्र लगातार संचालित रहेगा। उन्होंने कहा कि अस्पताल पूरी तरह तैयार है, लेकिन इसके बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं होने से आम जनता को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। लोगों की इसी परेशानी को देखते हुए उन्होंने समाजहित में यह कदम उठाया है।
तबादले से आहत होकर लिया वीआरएस
डॉ. शशिकांत मिश्रा ने बताया कि वह बलरामपुर जिला मेमोरियल अस्पताल में वरिष्ठ परामर्शदाता के पद पर तैनात थे। इससे पहले उर्सला अस्पताल में ब्लड बैंक प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उन्होंने बताया कि करीब दो महीने पहले वीआरएस के लिए आवेदन किया था, जिसमें एक नवंबर की तारीख निर्धारित की गई थी। अब उनका वीआरएस प्रभावी हो चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों के विपरीत उनका तबादला बलरामपुर कर दिया गया था। इस संबंध में कई बार पत्र लिखकर अपनी बात रखी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई और तबादले में भी बदलाव नहीं किया गया। इससे आहत होकर उन्होंने वीआरएस लेने का निर्णय लिया। डॉ. मिश्रा ने कहा कि अब वह शहर में रहकर चिकित्सा के माध्यम से समाजसेवा करना चाहते हैं। उनका उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को बेहतर चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक अभाव के चलते किसी मरीज को उपचार संबंधी परेशानी न उठानी पड़े।


