1011 दिन, फिर भी नहीं खुला राज! एकता के कंकाल की डीएनए रिपोर्ट का इंतजार
चार माह की पुलिसिया देरी में शव हुआ कंकाल, कोर्ट में गवाही जारी; पहचान की पुष्टि के लिए डीएनए रिपोर्ट का इंतजार
कानपुर। एकता गुप्ता हत्याकांड में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई में हुई देरी का असर अब भी मुकदमे की जांच और सुनवाई पर दिखाई दे रहा है। करीब 1011 दिन बीत जाने के बाद भी उस कंकाल की डीएनए रिपोर्ट नहीं आ सकी है, जिसे पुलिस ने एकता का शव बताते हुए बरामद किया था। डीएनए रिपोर्ट के जरिए ही कंकाल की पहचान की वैज्ञानिक पुष्टि हो सकेगी।
सिविल लाइंस निवासी राहुल गुप्ता ने 24 जून 2024 को कोतवाली थाने में पत्नी एकता के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने जिम ट्रेनर विमल कुमार उर्फ विमल सोनी निवासी शक्कर मिल खलवा पर पत्नी को नशीला पदार्थ खिलाकर अगवा करने का आरोप लगाया था। शुरुआती स्तर पर पुलिस की कार्रवाई धीमी रही और करीब चार महीने बाद 26 अक्टूबर 2024 को विमल को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में सामने आया हत्या का दावा
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान विमल ने एकता की हत्या करने की बात स्वीकार की। उसकी निशानदेही पर डीएम आवास से सटे ऑफिसर्स क्लब परिसर में जमीन खोदकर एक कंकाल बरामद किया गया। पुलिस ने इसे एकता का शव बताया था। हालांकि, शव पूरी तरह कंकाल में बदल जाने के कारण मौके पर बरामद अवशेषों से पहचान की वैज्ञानिक पुष्टि संभव नहीं हो सकी।
पुलिस ने कंकाल और घटनास्थल से मिले नमूनों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा। गड्ढे से मिली मिट्टी और कंकाल से जुड़ी मिट्टी के नमूनों में समानता की बात भी सामने आई, जिससे घटनास्थल का संबंध मजबूत हुआ, लेकिन कंकाल वास्तव में एकता का ही है, इसकी अंतिम पुष्टि डीएनए जांच से होनी है।
70 पेज की चार्जशीट, आरोप तय
मामले में पुलिस ने करीब 70 पेज की चार्जशीट दाखिल की। अदालत ने अपहरण, हत्या और साक्ष्य मिटाने समेत अन्य धाराओं में आरोप तय कर मुकदमे का ट्रायल शुरू किया। मामले में अब तक पति राहुल गुप्ता, भाई हिमांशु गुप्ता, एफएसएल के वैज्ञानिक, पंचनामा भरने वाली महिला दारोगा, पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर और तत्कालीन विवेचक राष्ट्रदीप सिंह समेत कई गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं।
अब नौ अक्टूबर को फोरेंसिक विभाग के हेड कांस्टेबल की गवाही होनी है। इसके बाद भी डीएनए रिपोर्ट का इंतजार मुकदमे की अहम कड़ी बना हुआ है।
45 से 90 दिन में आने वाली रिपोर्ट वर्षों से लंबित
फोरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में डीएनए रिपोर्ट आने में करीब 45 से 90 दिन का समय लग सकता है। लेकिन इस मामले में लंबे समय बाद भी रिपोर्ट नहीं आने से सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच से जुड़े अधिकारियों के तबादले होते रहे और रिपोर्ट को जल्द हासिल करने की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई।
एडीजीसी संजय कुमार झा के अनुसार, डीएनए रिपोर्ट के बिना कंकाल की पहचान की अंतिम वैज्ञानिक पुष्टि बाकी है। रिपोर्ट आने के बाद मुकदमे की सुनवाई में एक महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस ने एफएसएल को भेजा पत्र
कोतवाली एसीपी अमित कुमार पांडेय के मुताबिक, पिछले सप्ताह एफएसएल अधिकारी को पत्र भेजकर डीएनए रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। पुलिस का प्रयास है कि करीब एक महीने के भीतर रिपोर्ट प्राप्त हो जाए, जिससे कंकाल की पहचान और मामले की स्थिति स्पष्ट हो सके।
जमानत भी हो चुकी खारिज
मामले में आरोपी विमल कुमार की जमानत अर्जी पहले अदालत से खारिज हो चुकी है। पांच अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने भी उसकी जमानत याचिका खारिज करते हुए ट्रायल को छह महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया था। ऐसे में डीएनए रिपोर्ट अब मुकदमे की सुनवाई में महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जा रही है।
एकता की गुमशुदगी से शुरू हुआ यह मामला हत्या के आरोप तक पहुंच चुका है, लेकिन बरामद कंकाल की पहचान की वैज्ञानिक पुष्टि अभी बाकी है। 1011 दिन बाद भी डीएनए रिपोर्ट का इंतजार पीड़ित परिवार के लिए सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।

