सजेती में पुरानी दीवार ढही, मलबे में मिला शिवलिंग और प्रतिमा का अवशेष
दहिलर गांव में पत्थर निकलने के बाद जुटे ग्रामीण, पुष्प अर्पित कर शुरू की पूजा-अर्चना; प्राचीनता की जांच के बाद होगी पुष्टि



कानपुर। घाटमपुर के सजेती थाना क्षेत्र के दहिलर गांव में गुरुवार सुबह एक पुरानी दीवार अचानक ढह गई। मलबा हटाने के दौरान ग्रामीणों को पत्थर का शिवलिंग और माता गौरा जैसी प्रतिमा के कुछ अवशेष मिलने का दावा किया गया। अवशेष मिलने की जानकारी गांव में फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। लोगों ने पत्थरों को मलबे से निकालकर सुरक्षित स्थान पर रखा और पुष्प अर्पित कर पूजा-अर्चना शुरू कर दी। ग्रामीणों के मुताबिक, यह दीवार काफी पुरानी थी और इसे मुगलकालीन समय का बताया जाता है। हालांकि, दीवार और मिले पत्थर के अवशेष वास्तव में कितने पुराने हैं और उनका ऐतिहासिक महत्व क्या है, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
डेढ़ मीटर चौड़ी थी पुरानी दीवार
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में यह पुरानी दीवार लंबे समय से मौजूद थी। इसकी चौड़ाई करीब डेढ़ मीटर बताई जा रही है। दीवार के निर्माण में राविश, चूना और ककई ईंटों के इस्तेमाल की बात ग्रामीणों ने कही है। दीवार के पास एक पुराना चबूतरा भी बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि कई पीढ़ियों से यह स्थान गांव में मौजूद है और पुराने समय में इसी चबूतरे और दीवार का निर्माण कराया गया था। स्थानीय लोग इस स्थान को मजार के नाम से भी जानते रहे हैं।
मलबा हटाते समय दिखाई दिया शिवलिंग
गुरुवार सुबह अचानक पुरानी दीवार भरभराकर गिर गई। इसके बाद ग्रामीणों ने जब मलबा हटाना शुरू किया तो उसमें पत्थर का शिवलिंग दिखाई दिया। इसके साथ ही माता गौरा जैसी प्रतिमा के कुछ पत्थर के अवशेष भी मिलने की बात सामने आई। अवशेष दिखाई देने के बाद ग्रामीणों ने उन्हें सावधानी से मलबे से बाहर निकाला और अलग स्थान पर रख दिया। इसके बाद लोगों ने वहां पुष्प चढ़ाकर पूजा-अर्चना शुरू कर दी।
अवशेष देखने के लिए जुटी भीड़
पत्थर के अवशेष मिलने की जानकारी गांव में तेजी से फैल गई। इसके बाद मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुटने लगी। लोग पुरानी दीवार, चबूतरे और मिले अवशेषों को लेकर तरह-तरह की चर्चा करते रहे। ग्रामीणों का कहना है कि दीवार और चबूतरे का इतिहास काफी पुराना है। उनका दावा है कि यह स्थान मुगलकालीन समय से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दीवार का निर्माण किस काल में हुआ था और मिले पत्थर के अवशेष कितने पुराने हैं। पुरातत्व विशेषज्ञों की जांच के बाद ही दीवार और अवशेषों की वास्तविक प्राचीनता तथा ऐतिहासिक महत्व की पुष्टि हो सकेगी।

