साढ़ में रामगंगा नहर का ब्रिटिशकालीन पुल धंसा, आवागमन बंद
भारी वाहनों पर रोक न लगाने से बढ़ा खतरा, पुल की हालत को लेकर पहले भी उठते रहे सवाल

साढ़। कानपुर की नरवल तहसील क्षेत्र में साढ़ कस्बे से प्रयागराज नेशनल हाईवे को जोड़ने वाले मार्ग पर रामगंगा नहर में बना ब्रिटिशकालीन पुल रविवार को अचानक धंस गया। पुल की स्थिति गंभीर होने के बाद आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। फिलहाल केवल बाइक सवारों को ही किसी तरह निकलने दिया जा रहा है, जबकि चार पहिया और भारी वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है।
पुल के धंसने से साढ़ कस्बे समेत आसपास के गांवों और प्रयागराज की ओर आने-जाने वाले लोगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। इस मार्ग से रोजाना बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। पुल बंद होने के बाद अब लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ेगा, जिससे उनकी दूरी और समय दोनों बढ़ेंगे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल काफी समय से जर्जर हालत में था। इसकी स्थिति और पुल से गुजरने वाले भारी व ओवरलोड वाहनों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। मीडिया के माध्यम से भी कई बार जिम्मेदार विभाग का ध्यान इस ओर दिलाया गया, लेकिन समय रहते भारी वाहनों के आवागमन पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई।
लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते ओवरलोड और भारी वाहनों पर रोक लगाई जाती तथा पुल की तकनीकी जांच कराकर मरम्मत या सुदृढ़ीकरण कराया जाता तो शायद आज यह स्थिति नहीं आती। पुल के धंसने के बाद लोक निर्माण विभाग की सक्रियता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि विभाग को पुल की स्थिति गंभीर होने से पहले ही आवश्यक कदम उठाने चाहिए थे।
पुल धंसने के बाद बढ़ी परेशानी

रामगंगा नहर पर बने इस पुल के धंसने से क्षेत्र के लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हुई है। नौकरी, व्यापार, स्कूल और अन्य जरूरी कामों के लिए इस मार्ग का इस्तेमाल करने वाले लोगों को अब वैकल्पिक रास्तों से जाना पड़ेगा। सबसे अधिक परेशानी आसपास के ग्रामीणों और छोटे वाहन चालकों को उठानी पड़ रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से पुल का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराने, सुरक्षित वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था करने और स्थायी समाधान के लिए नए पुल के निर्माण की मांग की है। लोगों का कहना है कि साढ़ क्षेत्र में रामगंगा नहर पर बने पुलों की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। ऐसे में किसी बड़े हादसे से पहले जिम्मेदार विभाग को जर्जर पुलों की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।

