वर्षों तक देवी का इंतजार करता रहा शेर, ऐसे बना मां दुर्गा का दिव्य वाहन

वर्षों तक देवी का इंतजार करता रहा शेर, ऐसे बना मां दुर्गा का दिव्य वाहन

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में मां दुर्गा को आदि शक्ति, जगत जननी और असीम दिव्य ऊर्जा की प्रतीक देवी माना जाता है। मान्यता है कि देवी दुर्गा धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए विभिन्न रूपों में प्रकट होती हैं। मां दुर्गा का प्रमुख वाहन सिंह यानी शेर है और इसी कारण उन्हें कई स्थानों पर ‘शेरावाली माता’ के नाम से भी पुकारा जाता है। देवी के शेर पर सवार होने की कथा देवी पार्वती की कठोर तपस्या से जुड़ी बताई जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए देवी पार्वती ने लंबे समय तक कठोर तप किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तपस्या के प्रभाव से देवी पार्वती का रंग काला पड़ गया था। एक प्रसंग में भगवान शिव ने उन्हें काली कह दिया, जिससे देवी पार्वती अप्रसन्न हुईं और फिर तपस्या करने चली गईं। इसी दौरान एक शेर घूमते हुए उस स्थान पर पहुंचा, जहां देवी पार्वती तपस्या कर रही थीं। शेर उन्हें अपना भोजन बनाना चाहता था, लेकिन देवी की तपस्या और तेज के कारण वह उनके पास नहीं जा सका। वह एक स्थान पर बैठकर देवी की तपस्या समाप्त होने की प्रतीक्षा करता रहा। समय बीतता गया और शेर वर्षों तक वहीं प्रतीक्षा करता रहा। तपस्या पूरी होने के बाद भगवान शिव देवी पार्वती के सामने प्रकट हुए और उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा। देवी ने अपने पुराने गौर वर्ण को वापस पाने की इच्छा व्यक्त की। भगवान शिव ने उनकी इच्छा पूरी की। इसके बाद देवी पार्वती के शरीर से काले आवरण के अलग होने की मान्यता है और उससे कौशिकी देवी के प्रकट होने की कथा कही जाती है। इस घटना के बाद पार्वती को गौरी नाम प्राप्त हुआ। जब देवी की नजर उस शेर पर पड़ी, जो लंबे समय से उनके पास बैठा था, तो उन्होंने भगवान शिव से उसके लिए वरदान मांगा। देवी ने कहा कि जिस तरह उन्होंने वर्षों तक तपस्या की, उसी तरह शेर ने भी उनके पास रहकर लंबे समय तक प्रतीक्षा की है। उसकी इसी प्रतीक्षा और धैर्य को देखते हुए उन्होंने उसे अपनी सवारी बनाने का वरदान मांगा। भगवान शिव ने देवी की इच्छा स्वीकार कर ली और शेर को उनका वाहन बना दिया। इसी पौराणिक मान्यता के आधार पर देवी के शेर पर सवार स्वरूप को शक्ति, साहस और निर्भयता का प्रतीक माना जाता है। मां दुर्गा के हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र और उनके साथ सिंह का स्वरूप यह संदेश देता है कि शक्ति का उपयोग अधर्म और बुराई के विनाश तथा धर्म की रक्षा के लिए किया जाना चाहिए। देवी के वाहन के रूप में शेर केवल उनकी शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि साहस और आत्मविश्वास का भी प्रतिनिधित्व करता है। मां दुर्गा की उपासना में उनके इस स्वरूप का विशेष महत्व माना जाता है और नवरात्र सहित विभिन्न अवसरों पर श्रद्धालु देवी के सिंहवाहिनी रूप की पूजा करते हैं। इस कथा में तपस्या, धैर्य, समर्पण और भक्ति को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता के अनुसार, शेर पहले देवी को अपना शिकार बनाना चाहता था, लेकिन अंततः उनकी शक्ति और तप के प्रभाव से प्रभावित होकर उनके जीवन का हिस्सा बन गया। यही कारण है कि मां दुर्गा का सिंहवाहिनी स्वरूप भारतीय धार्मिक परंपरा में शक्ति और संरक्षण की भावना से जुड़ा हुआ है।

पार्वती की कठोर तपस्या

पौराणिक कथा के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसके बाद एक प्रसंग में देवी पार्वती अपने वर्ण को लेकर तपस्या करने चली गईं। इसी दौरान एक शेर उनके पास पहुंचा। वह देवी को अपना भोजन बनाना चाहता था, लेकिन तपस्या के तेज के कारण उनके निकट नहीं जा सका। इसके बाद वह वहीं बैठकर देवी की तपस्या पूरी होने की प्रतीक्षा करने लगा।

Pankaj

worldkhabarexpress.com

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